---------- Forwarded message ----------
From: saif rehman <[email protected]>
Date: Wed, 31 Aug 2011 20:33:06 -0700
Subject: the biggest Ied (read with Hindi TTS)
To: [email protected]

सब से बड़ी ईद.

 यूँ तो हर साल ईड   आती है,
गीत   खुशियों के गुनगुनाती है,
माहे रमजान के रोज़ा दारों को,
फल इबादत का दे के जाती है.

पर जहां में हैं बद नसीब ऐसे,
जिनके बिगड़े हैं कुछ नसीब ऐसे,
जिंदगी है उन्हें फकत  रोटी,
वो भी हर दिन मगर नहीं होती,
पेट   घर भर   का जब न हो खाली,
वो मनाते हैं ईदओदीवाली.

ऐसे कम बख्त लोग भी हैं यहाँ,
जिनका शायद  उजड गया है जहां,
है खुशी क्या उन्हें नहीं मालूम,
क्या हंसी   है उन्हें नहीं मालूम,
जिंदगी उन की सिर्फ मातम है,
घम   के अश्कों से आँख पुर नम है.

आओ; कुछ ऐसा इन्तिजाम करें,
दम को उनके ज़रा सलाम करें,
कुछ तसल्ली दिलों को दे उनके,
ऐसा हम भी तो कोई काम करें,
बाँटें  थोड़ा सा  दर्द भी उनका,
उनके कुछ आंसू अपने नाम करें.

हम उन्हें भी गले लगाएं ज़रा,
ईद मिलकर चलो मनाएं ज़रा,
सबके होंटों पे जब हंसी होगी,
ईद सब से बड़ी वोही    होगी.
आप का सैफ.
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