भोले और शांति प्रिय आदिवासी हिंसक होने के जिम्मेदार कोण है ???
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हजारो बरसों से या कहूँ सदियों से आदिवासियों को खदेड़ने का काम जारी है उन्हें
जंगलो में आदिम जीवन जीने के लिए मजबूर कर सभ्यता से दूर रखने की साजिश भी इसी
बिच जारी रही और जारी रहा उनका शोषण और दोहन | उनकी संस्कृति को नष्ट किया |
हमेशा उन पर असभ्य ,आदिम या जंगलीपन की पहचान थोपकर,उनमे हिन् भावना भरी जाती
रही जिससे आदिवासियों पर उनका वर्चस्व कायम रहे |आदिवासियों के महान नेता
भारतीय सविधान निर्माण समिति के सद्श्य ,आदिवासियों के लिए सविधान में विशेष
प्रावधानों का मसोदा तैयार करने वाले देश के पूर्व कप्तान व विख्यात हाकी
खिलाडी स्व. जयपाल सिंह मुंडा ने आज से 65 साल पहले तल्ख़ टिपण्णी करते हुए कहा
था की , पिछले 5 हजार सालो से भारत के आदिवासियों का उत्पीडन हो रहा है | जो
लोग भारत में शासन कर रहे है वे भारत में बहार से आकर बसे है | सिन्धु घाटी से
हमे निकाला गया | हमारा इतिहास अगर विद्रोह और संघर्ष का है तो उसकी वजह आर्य
लोग है | में प जवाहर लाल नेहरु की इस बात पर भरोसा कर रहा हूँ की ,आजाद भारत
आदिवासियों को बहतर जिंदगी देगा'' यह आक्रोस भरा व्यक्ति जिस समय जयपाल सिंह
जी ने दिया था उस वक्त बाबा साहेब अम्बेडकर,पुरुषोतम दास टंडन, डॉ.श्यामा
प्रसाद मुखर्जी,सोमनाथ लाहिड़ी जैसे विख्यात विद्वान् उपस्थित थे आदिवासियों के
समग्र विकास का सपना देखने वाले इस महान नेता की इच्छा अधूरी ही नहीं वरन बिखर
भी गई | जयपाल जी के विश्वासों को प.नेहरु की कांग्रेश और स्यामा प्रसाद
मुखर्जी की भारतीय जनता पार्टी (तत्कालीन जन संघ ) दोनों ने तोडा |
आदिवासियों की सहजता और सरलता के कारन भारत में आजादी के पूर्व तथा पश्चात्
में इतने अधिक सामाजिक,आर्थिक,मानसिक,शेक्षणिक और राजनेतिक बलात्कार किये गए
की आज आदिवासी समाज लाचार व बेबस दिखई देते है | राजनेतिक प्रतिनिधितव के नाम
पर दोनों पार्टियों ने चमचो की जमात खड़ी कर दी है जो पार्टी की रीती निति की
ही बात करते है आदिवासी रीती निति की नहीं | सारे देश में आदिवासियों की लाशो
पर राजनीती की सेज सजती रही है आदिवासी बालाओ को भरे बाजारों में नंगा किया
जाता है उनके साथ सामूहिक बलात्कार कर गुप्तांगो में पत्थर ठोस दिए जाते है
शांति प्रिय गरामिन आदिवासियों का सामूहिक नरसंहार किया जाता है लोकतंत्र के
और मानवाधिकारों के हिमायती चुप्पी साद लेते है | यह सही है की किसी भी समस्या
का समाधान हिंसा से नहीं होता जनांदोलन और वार्ता से होता है पर सोनी सोरी
कितने वर्षो से अनसन पर है किसी ने सुनी मनोरमा व सोनी सोरी की सह्लियो ने
नंगा होकर भारतीय फोज के सामने प्रदर्शन किया किसी सभ्य समाज के व्यक्ति ka सर
शर्म से jhuka, क्यों नहीं झुका?? आदिवासी भी शांति से जीवन jeena चाहते है पर
कोई उनकी संस्याओ को शांति पूर्ण सुने तो सही ?? एम् के गाँधी से भी अधिक
अहिंसक आदिवासी समाज का कभी कभी हिंसक होने का मतलब ही पानी सर से ऊपर हो जाना
है |

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