अपने किसी आदिवासी नेता ( सांसद) ने भुमिअधिग्रहण अध्यादेश का विरोध दर्ज नहीं कराया, कुछ भी नहीं कहा, जबकि भुमिअधिग्रहण अध्यादेश आदिवासी समाज के अस्तित्व पर संकट खड़ा करने वाला है,
लोकसभा, विधानसभा मे अपने समाज के लिए सीट आरक्षित इसलिए की गई थी, ताकि अपने समाज के जनप्रतिनिधि अपने समाज के हित में आवाज उठा सके, लेकिन लगता है कि अपने आदिवासी समाज के सांसदो, जनप्रतिनिधियों को, समाज के हित, अहित से कोई मतलब नहीं है, चाहे आदिवासी समाज, गर्त में चले जाये, इन्हें कोई मतलब नहीं है On Thursday, April 16, 2015 at 11:23:00 PM UTC+5:30, AYUSH Adivasi Yuva Shakti wrote: > > > धोबनचोपा ग्राम, पंचायत भुरकुंडा,प्रखण्ड दुमका(स.प.),झारखण्ड के अन्तर्गत > मातकोम टंडी मैदान में दिनांक:12-04-2015 को ग्रामीणों दुवारा भूमि अधिग्रहण > बिल,झारखण्ड सरकार दुवरा गलत स्थानीय निति 1995 को आधार वर्ष बताना,झारखण्ड के > मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास दुवरा यह बयान देना कि पुरे देश का डोमेसाइल एक > है,देश के नागरिक को किसी भी राज्य में नौकरी का अधिकार,बाबूलाल मरांडी दुवारा > झारखंडी स्थानीय नति का आधार जन्म आदि होना,स्थानीय निति को लेकर रांची में > सर्वदलीय बैठक में किसी भी राजनितिक पार्टी और विधायक दुवारा 1932 खतियान को > आधार की मांग नहीं करना,अग्रेज़ जमाने में असम गए झारखंडि आदिवासी को असम का > आदिवासी का दर्जा नहीं मिलना,सरकारी नौकरियों में अनुबंध प्रथा,सरकारी > अस्पताल,शिक्षण आदि संस्थानों का निजीकरण करना आदि को लेकर विभिन्न गांव के > ग्रामीण और मांझी बाबाओं ने झारखण्ड के सामाजिक और परम्परिक व्यवस्था के > अन्तर्गत “ मोड़े मांझी बैसी ” का आयोजन किया.”मोड़े मांझी बैसी” कि शुरुवात देश > के स्वतंत्रा सेनानी सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू के फोटो पर माल्यापर्ण कर > किया गया. “ मोड़े मांझी बैसी ” में विपक्ष में सभी राजनितिक पार्टीयों और > नेताओं को रखा गया. > मांझी बाबाओं और बुद्दिजीवी लोगों ने ग्रामीणों को इन सारे नियमों के > कुप्रभावों को समझाया गया.कई घंटो के बहस के बाद मांझी बाबाओं,ग्रामीणों और > बुद्दिजीवी लोग इस नतीजे पर पहुचे कि मोदी सरकार दुवरा लाया गया भूमि अधिग्रहण > बिल जन विरोधी बिल है,यह आजाद भारत में अंग्रेज ज़माने कि पुनरावृत्ति है,यह एक > काला नियम है,यह आदिवासियों के साथ-साथ सभी गैर आदिवासियों के गरीबों,किसानों > के हित में नहीं है.झारखण्ड के रघुवर दास सरकार दुवरा स्थानीय निति में वर्ष > 1995 को आधार वर्ष बताना और पुरे देश का डोमेसाइल एक है,देश के नागरिक को किसी > भी राज्य में नौकरी का अधिकार बता कर झारखण्ड वासियों को गुमराह करना,बाबूलाल > मरांडी दुवारा झारखंडी स्थानीय नति का आधार जन्म आदि बताना, रांची में > सर्वदलीय बैठक में किसी भी राजनितिक पार्टी और विधायक दुवारा 1932 खतियान को > आधार की मांग नहीं करना,झारखण्ड के मूल रैयत गैर आदिवासी और आदिवासी के हित > में नहीं है.इससे यहाँ के मूल रैयत(गैर आदिवासी और आदिवासी) सभी सम्प्रदाय के > लोगों को हानि है,विशेष कर यहाँ के युवा,गरीब बेरोजगार के शिकार हो > जायेगे,उनके नौकरी और रोजगार गैर झारखंडी अधिक लुट लेगे.मोदी सरकार का भूमि > अधिग्रहण बिल हमारे जमीन को लुटेगी,हर संप्रदाय के किसान,गरीबों का शोषण करेगी > और रांची में सर्वदलीय बैठक में किसी भी राजनितिक पार्टी और विधायक दुवारा > 1932 खतियान को आधार की मांग नहीं करना झारखण्ड को लुटेगी और यहाँ के मूल > युवाओं को चाहे वे गैर आदिवासी है चाहे आदिवासी है को बेरोजगार करेगी,खासकर > गरीबों को कभी नौकरी नहीं मिल पायेगी. मोड़े मांझी बैसी झारखण्ड के मुख्यमंत्री > से यह भी पूछना चाहती है कि अगर पुरे देश का डोमेसाइल एक है,तो फिर स्थानीय > निति का क्या ओचित्य ? मोड़े मांझी बैसी सभी राजनीतक पार्टी से मांग करती है कि > बाहरी लोगों के हित के लिए राजनितिक करना छोड़े और 1932 खतियान को ही आधार > मानकर स्थानीय निति जल्द से जल्द बनाये नहीं तो सभी पार्टी और नेता का > बिटलाहा(सामाजिक बहिष्कार) किया जायेगे. मोड़े मांझी बैसी सारे राजनीतक > पार्टियों के विधायक और सांसदों से यह पूछती है कि अग्रेज़ जमाने में असम गए > झारखंडि आदिवासी को असम में आदिवासी का दर्जा अब तक क्यों नहीं दिया गया > है?मोड़े मांझी बैसी सभी राजनीतक पार्टियों के विधायक और सांसदों से यह पूछती > है कि झारखण्ड का स्थानीय निति 1932 का खतियान को आधार मानकर झारखण्ड का > स्थानीयता का मांग क्यों नहीं करते है ? ”मोड़े मांझी बैसी” के बैठक में यह भी > प्रस्ताव रखा गया कि झारखण्ड के रघुवर दास सरकार अनुबंध पर नौकरी देना बंद करे > और झारखण्ड के मूल रैयतो(गैर आदिवासी और आदिवासी) को स्थायी नौकरी दे ताकि उसे > कम मानदेय और शोषण का शिकार नहीं होना पड़े.इसके साथ साथ मोड़े मांझी के बैठक > में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि सरकार अस्पताल,शिक्षण संस्थानों का निजीकरण बंद > करे.सरकार के गलत नीतियों के विरोध में झारखंडी सामाजिक और परम्परिक व्यवस्था > के अन्तर्गत .”मोड़े मांझी बैसी” दुवरा देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र > मोदी,झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास, दुमका विधायक सह कल्याण मंत्री > डॉ लुईस मरांडी,जेभीएम(JVM)पार्टी के बाबूलाल मरांडी और सभी राजनितिक पार्टी > AJSU,JMM,CONGRESS,BJP,RJD,TRINMUL और अन्य सभी पार्टी > के पुतले पर मांझी बाबओं(प्रधान),महिलओं और पुरूषो ने तीर का बौछार कर,जला > कर, और काट कर कड़ा सामाजिक विरोध दर्ज करती है और निम्नलिखित मांग करती है : > (1) सरकार भूमि अधिग्रहण बिल तुरंत वापस ले > (2) झारखण्ड के रघुवर सरकार दुवरा स्थानीय निति का आधार वर्ष 1995 बताना और > झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास दुवरा यह बयान देना कि पुरे देश का > डोमेसाइल एक है,देश के नागरिक को किसी भी राज्य में नौकरी का अधिकार के बयान > का ”मोड़े मांझी बैसी” और ग्रामीण कड़ा विरोध करती है और 1932 तक के खतियान को > ही मूल आधार मान कर स्थानीय निति जल्द से जल्द बनाने का मांग करती है.उसके > बनने के बाद ही कोई सरकारी बहाली हो और चतुर्थ और तृतीय पदों के साथ-साथ मूल > रैयत (गैर आदिवासी और आदिवासी) को उच्च पदों पर भी आरक्षण मिले. > (3) अग्रेज़ जमाने में असम गए झारखंडि आदिवासी को असम का आदिवासी का दर्जा > दिया जाय. > (4) सरकारी अस्पताल,शिक्षण संस्थानों आदि का निजीकरण बंद हो. > (5) सरकारी नौकरियो में अनुबंध प्रथा बंद कर स्थायीकारण कर उन्हें स्थायी > नौकरी दिया जाय. > (6)सभी राजनितिक पार्टी विधायक,सांसद झारखण्ड और झारखण्ड के मूल रैयतो(1932 > खतियान)(गैर आदिवासी और आदिवासी) के हित में काम करे और झारखण्ड के स्थानीय > निति का आधार 1932 खतियान को समर्थन दे और मांग करे और जल्द से जल्द लागु करे. > इस मोड़े मांझी बैसी में मांझी बाबओं(ग्राम प्रधान),ग्रामीणों और बुद्दिजीवी > ने सर्वसम्मति से यह भी प्रस्ताव पास किया कि किसी भी राजनितिक पार्टी के > विधायक और सांसद मोड़े मांझी बैसी के इन मांगो का समर्थन नही करेगे तो उसका और > उसके पार्टी का बिटलाहा(सामाजिक बहिष्कार) किया जायेगे.उसके बाद भी अगर मांगो > को नहीं माना जाता है तो अंत में एक और संताल हुल और उलगुलान के लिए विवश हो > जायेगे. > इस .”मोड़े मांझी बैसी” मे बालेश्वर मुम्रू,विलियम मरांडी,मानसिंह > मुर्मू,स्टेफन मरांडी,जयश्री टुडू,सुरेन्द्र राणा,भोंडा मरांडी,संजय > मुर्मू,शिवलाल मुम्रू,बेटका हांसदा,लखन मरांडी,सलीम मरांडी,अंजय > हेम्ब्रोम,बबुधन मुर्मू,परमेश्वर मरांडी,प्रदीप मरांडी,धुनीराम मुर्मू,जोसेफ > सोरेन,फिनिमन मरांडी,रंजीत सोरेन,बाबुधन मुर्मू,विश्वनाथ सोरेन,राजा मरांडी के > साथ भालपहाड़ी,बुड़यारी,गरडी,माचखिचा,पतायथान,धोबंचोपा आदि गांव के ग्रामीण > महिला और पुरुष उपस्थिति थे. > For TV news(video) please click on https://youtu.be/xDXQGIyLBXk > <https://www.facebook.com/l.php?u=https%3A%2F%2Fyoutu.be%2FxDXQGIyLBXk&h=ZAQFVwWW2&enc=AZO20vyvYUA_8m1MoQTuIbEDbmy4nBCoI1XPRmEOFKLhK7ehnc_ilwgL2Yr6-M3xl0UIOnfbie6L6Z8Brb0rR7vod3SbQ53DoepBc-vlbLAm0DNMH9h_Bm22gpnr9mSnrS5-38pLXhNeSu7vWYa0T3AKNm9S2uNL6DjKz358ieqDBQ&s=1> > > > > > > > -- Learn More about AYUSH online at : http://www.adiyuva.in/2013/10/ayush.html --- You received this message because you are subscribed to the Google Groups "AYUSH | adivasi yuva shakti" group. 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