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2009/11/21 <[email protected]>

>   Today's Topic Summary
>
> Group: http://groups.google.com/group/css-design/topics
>
>    - घर आया वो मर्ज तो जिंदगी हुई कर्ज <#12515a81e5b63709_group_thread_0>[3 
> Updates]
>    - css menu problem <#12515a81e5b63709_group_thread_1> [3 Updates]
>
>   Topic: घर आया वो मर्ज तो जिंदगी हुई 
> कर्ज<http://groups.google.com/group/css-design/t/e6b895d31881c8b6>
>
>    narhari gaikwad <[email protected]> Nov 20 06:50PM +0530
>
>    *राग दरबारी.* हे मूर्ख, उक्त संबोधन प्रदान करते हुए मुझे अशिष्टता का
>    अनुभव
>    हो रहा है, किंतु मैं क्या करूं, झूठ बोलना ऐसे समय उचित नहीं है। इसे तू
>    मेरी
>    महानता भी समझ सकता है। महानता इसलिए कि मैं तुझे चेता रहा हूं, जबकि मुझे
>    किसी
>    ने विपत्ति में आगाह नहीं किया था।
>
>    अरे, सावन के अंधे! तुझे हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है। तुझे हरियाली
>    के
>    पीछे छुपा पतझड़ नहीं दिख रहा है। यह संसार चार दिनों का मेला है। तू इसे
>    भली-भांति जी ले। अरे तू इस दुनिया में अकेला आया है, अकेला ही जाएगा।
>    मुझे तो
>    यह समझ में नहीं आता कि तू क्यों अपनी स्वतंत्र जिंदगी को बंधन में बांध
>    रहा
>    है। अरे, जरा अपने वर्तमान के बारे में सोच, तू रात को देर से घर आता है,
>    कोई
>    कुछ नहीं कहता। तू सदैव चौराहों पर जमी महफिलों का हीरो रहता है। पान की
>    दुकानों के खाते तेरे शौक के कारण दिनोदिन स्वस्थ होते जा रहे हैं। तू
>    इनका
>    त्याग कर सकेगा?
>
>    पहला दिन पहला शो देखने वाले नौजवान! तू पिक्चरों के लिए तरस जाएगा। तू
>    कहीं का
>    नहीं रहेगा। वेटर को दिलेरी से टिप देने वाले ‘धन्ना सेठ’! तुझे पता नहीं
>    है,
>    शादी तुझे टिप लेने वाली हालत में पहुंचा सकती है। तू, अपने दस-पंद्रह
>    हजार के
>    फिक्स-डिपॉजिट पर मुग्ध हो रहा है। तू नहीं जानता कि गृहस्थ संसार के
>    भवसागर
>    में ये रकम एक बूंद से अधिक नहीं है। हिंदी साहित्य में सानुग्रह उत्तीर्ण
>    होने
>    वाले छात्र! इस रकम से तेरे सपनों की मलिका की आंखों का सुरमा भी नहीं
>    आएगा।
>    तुझे पता नहीं कि मेकअप पर कितना भारी व्यय होता है। तू सरकार की आर्थिक
>    नीतियों का अनुसरण मत कर। बीवी के मेकअप को दुरुस्त करने के चक्कर में
>    अपने
>    चेहरे पर उधार की कालिख मत पोत। यह सीमाहीन श्रंगार तेरे बजट का सत्यानाश
>    कर
>    देगा।
>
>    तू जिन हाथों में टेनिस का रैकेट लिए इतराता हुआ गलियों में निकलता है। तू
>    सोच,
>    जब कल को इन्हीं गलियों से निकलते वक्त तेरे हाथ में परचूनी का सामान व
>    सब्जी
>    का थैला होगा तो वे तथाकथित विश्व सुंदरियां, जिन पर तू चमचमाते कपड़े व
>    टेनिस
>    के रैकेट का रौब गालिब करता था, जिनके लिए तूने सैकड़ों लीटर पेट्रोल की
>    आहुति
>    दी थी, उनके समक्ष साइकिल पर मिट्टी के तेल का कनस्तर लिए तू कैसा लगेगा।
>
>    सुबह के नौ-दस बजे उठने वाले कुंभकर्ण! अब तेरी रातों की नींद हराम होने
>    वाली
>    है। जरा संभल जा। शादी के बाद जब तेरे बच्चे हो जाएंगे और अनवरत स्वर तुझे
>    न
>    चाहते हुए भी सुनने पड़ेंगे तो याद आएगा कि मैंने भी कुछ कहा था।
>
>    ये घूमना-फिरना, जो तुझे अत्यधिक सुखद प्रतीत हो रहा है, इतिहास बनकर रह
>    जाएगा।
>    स्कूटर की दिशाएं रेस्टोरेंट के स्थान पर नर्सिग होम तक सिमटकर रह जाएंगी।
>    सिनेमा के लिए टिकट की लाइन तोड़ने वाले अभागे प्राणी, तू बच्चों के
>    डॉक्टर की
>    लाइन में लग-लगकर थक जाएगा। राजनीति, कला व साहित्य पर विस्तृत चर्चा करके
>    सभी
>    समस्याओं का हल चुटकी में निकालने वाले प्राणी! तेरा ज्ञान दर्शन तक
>    सिमटकर रह
>    जाएगा। तुझे ज्ञान प्राप्त होगा पर तब तक कुछ नहीं बचेगा रे।
>
>    अत: जागना है तो अभी जाग, बाद में कुछ नहीं होगा। पर मैं जानता हूं तू
>    नहीं
>    मानेगा। एक राज की बात बताऊं, मैंने तुझसे झूठ कहा था कि किसी ने मुझे
>    नहीं
>    चेताया था। जब मेरी शादी हुई थी, तब कुछ अनुभवी लोगों ने मुझे भी सावधान
>    किया
>    था। किंतु मैंने उनका कहा नहीं माना और आज.. आज के लिए तुझे क्या लिखूं।
>    वो तो
>    जब तुझ पर गुजरेगी, तब तू ही जानेगा। इतना समझाने के बाद तेरे भविष्य के
>    लिए
>    श्रद्धांजलि अर्पित करने के अलावा मेरे पास है ही क्या। ईश्वर तेरे सुख की
>    आत्मा को शांति प्रदान करें।
>
>
>
>    --
>    Narhari Gaikwad
>    Web Designer
>    Indore, INDIA
>    e-mail : [email protected]
>    : [email protected]
>
>
>
>
>    "Paulo Diovani" <[email protected]> Nov 20 11:52AM -0200
>
>    English, please.
>
>
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>
>    Anuj Kanojia <[email protected]> Nov 20 10:51PM +0530
>
>    hehhehehe... What's going on in *css-design* *group...* *:D*
>
>    2009/11/20 Paulo Diovani <[email protected]>
>
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>    --
>    -Thanks
>    Anuj Kanojia.
>
>
>
>   Topic: css menu 
> problem<http://groups.google.com/group/css-design/t/8d8c8877705879bc>
>
>    PhillipB <[email protected]> Nov 20 02:12AM -0800
>
>    #navlinks li a:hover { color:#0033FF
>    }
>
>
>
>
>
>    crni <[email protected]> Nov 20 02:24AM -0800
>
>    It's not working with that either.
>    When i put lia:hover, i dont get hover it's like it dont recognize
>    that is is a link...
>
>
>
>
>
>
>
>    jkronika <[email protected]> Nov 20 09:19AM -0800
>
>    Looks to me like the problem may be your HTML. The <A> tags are closed
>    before the text within the <LI>s. Try replacing it with this:
>
>    <ol id="navlinks">
>    <li ><a href="http://www.manded.rs";>www.maned.rs</a></li>
>    <li><a href="http://www.manded.co.rs";>www.maned.co.rs</a></li>
>    <li><a href="http://www.manded.rs";>www.maned.rs</a></li>
>    <li><a href="http://www.manded.co.rs";>www.maned.co.rs</a></li>
>    <li><a href="http://www.manded.rs";>www.maned.rs</a></li></ol>
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Thanks and regards,
Anjan Phukan

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