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 नई दिल्ली।। पेट्रोल की कीमतों पर हो-हल्ला के बीच आम जनता पर एक और पेट्रोल
मूल्य वृद्धि की तलवार लटक रही है। देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल
कॉर्पोरेशन ( आईओसी ) ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने उसके घाटे की भरपाई
नहीं की तो वह फिर दाम बढ़ाने की तैयारी में है।

आईओसी के चेयरमैन आर. एस. बुटोला ने कंपनी के सबसे बड़े तिमाही नुकसान के एलान
के बाद कहा कि बाजार से कम कीमत पर केरोसिन, रसोई गैस और डीजल बेचने से हुए
कंपनी के घाटे की भरपाई नहीं की गई है। इससे आईओसी को कर्ज लेकर कच्चा तेल
खरीदना पड़ रहा है। हालांकि, बैंक लंबे समय तक इसे जारी नहीं रख सकते। आईओसी
पर कर्ज बढ़कर 73,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

आइओसी को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7,485 करोड़ रुपये का घाटा हुआ
है, जो कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा घाटा है। कंपनी ने जुलाई-सितंबर, 2010
में 5,293.95 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। बुटोला ने कहा कि आमदनी में
11,757 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार के एक भी पाई नहीं देने
से यह घाटा हुआ है।

आईओसी चेयरमैन ने कहा, 'ऐसी स्थिति हमने कभी नहीं देखी है। सरकार ने केवल
पेट्रोल की कीमत तय करने का अधिकार कंपनियों को दिया। डीजल, रसोई गैस और
केरोसिन के दाम बढ़ाने का अधिकार अपने पास रखा। इसके बावजूद हमारे घाटे की
भरपाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।'

उन्होंने कहा, 'दिसंबर के बाद पैसे का इंतजाम करने में हमें दिक्कत होगी।
हमारे पास क्रूड ऑयल के आयात के लिए पर्याप्त फंड नहीं होगा। हमें कुछ
रिफाइनरियों को बंद करना पड़ेगा और सप्लाई पर असर पड़ेगा। अगर सरकार चाहती है
कि पेट्रोल की खुदरा कीमत नहीं बढ़े तो हमारे घाटे की भरपाई की व्यवस्था करनी
होगी।'

तेल कंपनियां सरकार की राजनीतिक और आर्थिक मजबूरियों का शिकार हो गई हैं। न तो
उन्हें सब्सिडी का भुगतान हो रहा है और न ही पेट्रो प्रोडक्ट्स की कीमतों में
बढ़ोतरी। सरकार पर तेल की कीमतों को नहीं बढ़ाने का भारी दबाव है, क्योंकि
मुदास्फीति पहले से ही ऊंचे स्तर पर है। उधर, राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने के
लिए संघर्ष करता वित्त मंत्रालय रेवेन्यू बढ़ाने और सब्सिडी खर्च घटाने के
उपाय तलाश रहा है।
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10675294.cms

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