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`करेंसी बदलने के फैसले से तो गरीब तबाह हो जाएंगे`
Last Updated: Thursday, January 23, 2014 - 20:56

नई दिल्ली : भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने कालेधन पर काबू पाने के नाम
पर वर्ष 2005 से पहले के सभी करेंसी नोट वापस लेने का जो निर्णय किया है
वह आम आदमी को परेशान करने और उन ‘चहेतों’ को बचाने के लिए है जिनका भारत
के कुल सकल घरेलू उत्पाद के बराबर का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा है।
पार्टी ने कहा कि यह निर्णय बैंक सुविधाओं से वंचित दूर दूराज के इलाकों
में रहने वाले उन गरीब लोगों की खून पसीने की गाढ़ी कमाई को मुश्किल में
डाल देगा जिसे उन्होंने वक्त जरूरत के लिए जमा किया है।
भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने यहां कहा, अवसरों को गंवाने वाले संप्रग
के 10 साल के शासन में पी चिदंबरम 7 साल वित्त मंत्री रहे हैं और अब
सरकारी की चली चलाई की बेला में वह लोगों द्वारा पूछे जा रहे सवालों से
भागने के लिए कालेधन के विषय से जनता के असली मु्द्दों को भ्रमित करना
चाहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘..लेकिन सरकार का यह फैसला विदेशी बैंकों में अमेरिकी
डालर, जर्मन ड्यूश मार्क और फ्रांसिसी फ्रांक आदि करेंसियों के रूप में
जमा भारतीयों के कालेधन में से एक पाई भी वापस नहीं ला सकेगा। इससे साफ
है कि सरकार का विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन को वापस लाने का कोई
इरादा नहीं है और वह केवल चुनावी स्टंट कर रही है।’ लेखी के अनुसार दूसरी
ओर इस निर्णय से दूर दराज के इलाकों के गरीबों की मेहनत की कमाई पर पानी
फिर जाने का पूरा खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि देश की 65 प्रतिशत आबादी
के पास बैंक खातों की सुविधाएं नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि गरीब और आदिवासी लोग पाई पाई करके अपनी बेटियों की शादी
ब्याह और अन्य वक्त जरूरत के लिए घर के आटे-दाल के डिब्बों आदि में धन
छिपा कर रखते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में बैंकों की सुविधा नहीं
होने के कारण अधिकतर लोग अपना धन 2005 के बाद की करेंसी से नहीं बदल
पाएंगे या बिचौलियों के भारी शोषण का शिकार होंगे।

भाजपा नेता ने कहा कि देश की बहुत बड़ी आबादी ऐसी होगी जिसे इस खबर का
पता भी नहीं होगा और वक्त जरूरत के लिए जब वे अपना यह कीमती धन खर्च करने
के लिए निकालेंगे तब उन्हें एहसास होगा कि उनकी कड़ी मेहनत की कमाई कागज
का टुकड़ा भर रह गई है। सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि
यह निर्णय आम आदमी और आम औरत को परेशान करने तथा उन ‘चहेतों’ को बचाने के
लिए है जिनका भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद के बराबर का कालाधन विदेशी
बैंकों में जमा है।
उल्लेखनीय है कि कालेधन और नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिये
भारतीय रिजर्व बैंक ने 2005 से पहले जारी सभी करेंसी नोट वापस लेने का
फैसला किया है। इसके तहत 500 रुपये व 1000 रुपये सहित सभी मूल्य के नोट
वापस लिए जाएंगे और यह काम एक अप्रैल से शुरू हो जायेगा। रिजर्व बैंक ने
एक बयान में कहा है, कि एक अप्रैल 2014 से लोगों को इस तरह के अपने नोट
बदलने के लिए बैंकों से संपर्क करना होगा। (एजेंसी)



First Published: Thursday, January 23, 2014 - 18:02
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