इंटरनेट का प्रयोग विश्व के बहुत से लोगों के जीवन का
अपरिहार्य भाग बन चुका है। इस प्रकार से कि विश्व के लगभग
एक तिहाई लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। हालिया वर्षों में
सामाजिक संचार माध्यम वेब की दूसरी पीढ़ी के रूप में संपर्क,
प्रचार, विज्ञापन और व्यापारिक लक्ष्यों के साथ वर्चुअल हो
गये हैं। इन संचार माध्यमों का प्रयोग करने वाले इनके द्वारा
उपलब्ध की जाने वाली जानकारियों को केवल पढ़ने वाले नहीं
रह गये हैं बल्कि स्वयं वे जानकारियों के एक भाग को तैयार करके
इन संचार माध्यमों के हवाले करते हैं जबकि वेब की पहली पीढ़ी
में समाचार पत्र, किताब, टेलीविजन और रेडियो जैसे संचार
माध्यमों में संबोधक से परस्पर संपर्क स्थापित करने की
संभावना नहीं होती थी। सामाजिक साइटों का प्रयोग करने
वालों की संख्या में दिन प्रतिदिन वृद्धि इन साइटों के महत्व
व आकर्षण का सूचक है। वर्तमान समय में फेस बुक और टयूटर जैसी
साइटें एसी साइटों में परिवर्तित हो गयी हैं जिनका लोग बहुत
प्रयोग कर रहे हैं। सामाजिक साइटों ने भौगोलिक,
सांस्कृतिक, राजनीतिक और आस्थाओं की सीमा को समाप्त
करके लोगों को एक दूसरे के पास बिठा दिया है। ये साइटें उस
स्थान में परिवर्तित हो गयी हैं जहां लोग एक दूसरे के विचारों
एवं दृष्टिकोणों से परिचित हो सकते हैं। इन साइटों का प्रयोग
करने वाले संस्कृति, शिक्षा, आयु, भाषा आदि की दृष्टि से
विभिन्न स्तर के होते हैं और वे अपनी रूचि एवं आवश्यकता के
आधार पर इन साइटों से जानकारी लेते या उनका उत्पाद व
प्रचार करते हैं।
सामाजिक साइटों ने सूचना पहुंचाने के क्षेत्र को भी
परिवर्तित कर दिया है। सामाजिक साइटों ने लिखित व
पारम्परिक संचार माध्यमों की ओर लोगों की रूचि को बहुत
कम कर दिया है। क्योंकि २१वीं शताब्दी के लोग पल पल का
समाचार जानना चाहते हैं और जो  साप्ताहिक पत्रिकाएं यहां
तक कि जो समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं उनमें भी
प्रकाशित खबरें पुरानी हो चुकी होती हैं। क्योंकि इन
समाचारों के प्रकाशन से पूर्व हज़ारों लोग इनसे अवगत हो चुके
होते हैं। सामाजिक साइटें प्राकृतिक और सामाजिक संकटों में
प्रभावी भूमिका निभाती हैं और इनसे संबंधित घटनाओं व
पहलुओं को कवरेज देने में पारम्परिक संचार माध्यमों से बेहतर
कार्य करती हैं। उदाहरण स्वरूप बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक
आपदा में इंटरनेट का प्रयोग करने वाले इनसे संबंधित तस्वीरों,
फिल्मों और आवाज़ों आदि को यथाशीघ्र भेजते हैं और दूसरी
ओर सहायता भेजने एवं लोगों से आवश्यक वस्तुओं के लिए अपील
करने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक साइटों ने विश्व के लोगों की जीवन शैली को भी
परिवर्तित कर दिया है। यद्दपि भौगोलिक, सांस्कृतिक और
सामाजिक परिस्थियों के दृष्टिगत विश्व के विभिन्न क्षेत्रों
में यह परिवर्तन अलग अलग है यानी कहीं कम तो कहीं अधिक
परंतु यह परिवर्तन अपरिहार्य है। इन साइटों ने समाज के लोगों
के साहित्य, रीति रिवाज और महिला एवं पुरुष के मध्य संबंधों
को भी परिवर्तित कर दिया है। वातावरण तैयार करने,
प्रतीकों, मूल्यों और आदर्शों को बहुत ही दक्षतापूर्ण तरीकों
से प्रयोग करना सामाजिक साइटों के सांस्कृतिक व
सामाजिक शक्ति का सूचक है और उसका शक्तिशाली होना
इस सीमा तक आगे बढ़ सकता है कि एक आम व स्थानीय
संस्कृति से विरोधाभास हो सकता है। सामाजिक पहचान
उत्पन्न करने में सामाजिक साइटों की एक अलग भूमिका है
जिसके दृष्टिगत वे एक एसी शक्ति की परिचायक हैं जो
राष्ट्रीय सरकारों के इरादों से हटकर काम करती हैं।
दूसरी ओर इंटरनेट के माध्यम से आन लाइन व्यापार व क्रय विक्रय
भी होता है जिससे सामाजिक साइटों को असारण महत्व
प्राप्त हो गया है। कम्पनियां, छोटे संगठन और छोटे व्यापारी
सामाजिक साइटों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लेन देन करते हैं।
इसके अतिरिक्त इंटरनेट की विशेष साइटों के प्रयोग करने वालों
को भविष्य में एक ग्राहक के रूप में देखा जा सकता है। व्यापार
जगत की जो जानकारियां उनके प्रयोग करने वालों के लिए दी
गयी हैं वे कम्पनियों, संगठनों और सरकारों के ध्यान को
आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस आधार पर
इंटरनेट का प्रयोग करने वालों की रूचियों को जानना और अपने
उत्पादों एवं उनसे संबंधित सेवाओं के बारे में इंटरनेट पर जानकारी
देना इन वस्तुओं के उत्पादकों व निर्माताओं के लिए विशेष
महत्व रखता है। सामाजिक साइटों पर प्रभाव डालने वाले लोग
हालिया वर्षों में अपनी विरोधी सरकारों को प्रभावित करने
के लिए इन साइटों का प्रयोग किया। मध्यपूर्व और अफ्रीक़ा में
घटने वाली घटनाओं एवं राजनीतिक परिवर्तनों को इसी
परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
यही विषय इस बात का कारण बना है कि दूसरे समाजों के
लोगों के मस्तिष्कों पर नियंत्रण करने के लिए पश्चिमी सरकारें
अधिक से अधिक इन साइटों के प्रयोग पर ध्यान दे रही हैं और इस
परिस्थिति में सामाजिक साइटों का प्रयोग नर्मयुद्ध में
हथियार के रूप में हो रहा है। आपत्ति व प्रदर्शन करने के लिए
लोगों को संगठित करना, उपद्रवों को हवा देना, सरकार
विरोधी लोगों व तत्वों का दिशा निर्देशन, घटना के बारे में
सही और ग़लत जानकारी देना उन कार्यों में से है जिसमें
पश्चिमी सरकारों ने इन साइटों का प्रयोग करके अपनी
विरोधी सरकारों को कमज़ोर करने में खर्चों को कम कर
दिया। इसके अतिरिक्त समाज के कुछ व्यक्तियों व तत्वों
द्वारा सामाजिक साइटों पर ग़लत जानकारियों को रखना
पश्चिमी विशेषकर अमेरिकी सरकार की कार्यसूचि में शामिल
है और इसका उद्देश्य किसी राष्ट्र की सुरक्षा व एकजुटता को
आघात पहुंचाना होता है। इस कार्य के लिए अमेरिका और
पश्चिमी सरकारों को दूसरे देशों में एक जासूस भेजने के लिए जो
खर्च आता है उसकी अपेक्षा सामाजिक साइटों पर जो
जानकारियां होती हैं उन्हें जुटाने में बहुत कम खर्च आता है। एक
जासूस उस विस्तृत पैमाने पर कार्य नहीं कर सकता जिस पैमाने
पर एक सामाजिक साइट सूचनाओं को कवरेज दे सकती है। इसी
प्रकार जिस तरह सामाजिक साइटों पर दी जाने वाली
जानकारी अपडेट रहती है उस तरह जासूस द्वारा दी जाने
वाली जानकारी अपडेट नहीं रहती।
सामाजिक साइटों के प्रयोग का एक ग़लत प्रभाव समाज में
सार्वजनिक अज्ञानता उत्पन्न करना है। ये साइटें बड़ी सरलता
से एक समाज के लोगों की दृष्टि को सही मार्ग से हटा देती हैं
और अपनी विशेष शैलियों का प्रयोग करके साधारण लोगों को
बुद्धि से काम लेने के बजाये भावुक बना देती हैं यहां तक कि ये
साइटें इन लोगों को गुमराह करके आतंकवादी बना देती हैं। इन
साइटों के जो सकारात्मक लाभ हैं उसके साथ ही इन साइटों के
प्रयोग के कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं। जैसे इन साइटों का
प्रयोग करने वाले व्यक्तियों के मध्य आमने सामने एक दूसरे से
मिलना जुलना कम हो गया है। इन साइटों का प्रयोग करने वाले
बहुत कम अपने मित्रों एवं निकट संबंधियों से मिलने के लिए जाते
हैं और इस कार्य के स्थान पर वे आनलाइन उन्हें देख लेते हैं या उनके
लिए ईमेल या कमेंट भेजकर उनसे संपर्क स्थापित करते हैं। इन
साइटों का प्रयोग करने वाले अपने परिवार के दूसरे सदस्यों से
कम बात करते हैं।
इन साइटों के प्रयोग से एक प्रकार का नशा होने लगता है। इन
साइटों का प्रयोग करने वालों पर भिन्न भिन्न मानसिक
प्रभाव पड़ते हैं। अवसाद, शर्मिला हो जाना, अलग थलग हो
जाना, समाज से दूरी का रुझान और आत्म विश्वास कम होने
जैसे मानसिक प्रभाव पड़ते हैं। अटलांटिक साइट/ “क्या फेसबुक
ने हमें अलग थलग कर दिया है” शीर्षक के अंतर्गत अपनी रिपोर्ट
में लिखती है” जो लोग केवल दूसरों द्वारा पेस्ट की गयी
जानकारियों को पढ़ते हैं और अकेले में रहने को प्राथमिकता देते
हैं संभव है कि जो प्रतीत होता है उससे कहीं अधिक उन्हें एकांत
में पड़ने और अवसाद का ख़तरा हो। जो लोग सामाजिक
साइटों का प्रयोग करते हैं वे इंटरनेट की दूसरी साइटों का
प्रयोग करने वालों की तरह कम धैर्य करते हैं और वास्तविक
जीवन में भी कम धैर्य करते हैं। इस प्रकार के लोग अधिकतर अपने
विचारों को पेश किये जाने के प्रयास में रहते हैं और दूसरों के
विचारों को कम ही सुनना पसंद करते हैं। यह विषय समाज में
व्यक्तित्वाद में वृद्धि का कारण बना है।
सामाजिक साइटों के अधिक प्रयोग से इंटरनेट पर लोग एक दूसरे
से परिचित होते और विवाह करते हैं, तलाक़ होते हैं, परिवार टूटते
व बिखरते हैं, बच्चे समय से पहले बालिग़ हो जाते हैं और यह वह
चीज़े हैं जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विश्व के भिन्न देशों में
ध्यान योग्य वृद्धि हो गयी है। इसी प्रकार शीकागो विश्व
विद्यालय के एक शोध व अध्ययनकर्ता का मानना है कि इंटरनेट
साइटों के माध्यम से स्थापित किये गये समस्त संबंध कृत्रिम हैं।
परिणाम स्वरूप यह संबंध समय बीतने के साथ धीरे- धीरे ठंडे पड़ते
जा रहे हैं। इन साइटों का प्रयोग करने वाले यह सोचते हैं कि एक
बड़े समाज के लाखों लोग उसके संपर्क में हैं जबकि वास्तव में वह
अपने कम्प्यूटर के पास अकेला बैठा है। अमेरिका के एम आई टी
के एक शोधकर्ता शेरी टरकेल कहते हैं कि फेस बुक लोगों की
पहचान को खराब कर रही है क्योंकि जो एक व्यक्ति की सेन्ड
रिकवेस्ट होती है संभव है कि वह सही न हो। इसी प्रकार
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो लोग प्रतिदिन
विशेषकर सोने से पहले सामाजिक साइटों का प्रयोग करते हैं वे
गम्भीर रूप से अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त हैं। सामाजिक
साइटें कभी बंद नहीं होती हैं और उनमें सूरज नहीं डूबता है इसलिए
इनका प्रयोग करने वाले रातों को देर तक जागते हैं और दिन से
जिस तरह लाभ उठाया जाना चाहिये उससे वे कम ही लाभ
नहीं उठा पाते हैं।
यद्यपि ज्ञान- विज्ञान की प्रगति से मानव समाज के
कल्याण के लिए बहुत सी सुविधाएं व संभावनाएं उत्पन्न हो
गयी हैं परंतु उनके ग़लत प्रयोग से विनाशकारी और अपूर्णीय
क्षति का सामना करना पड़ सकता है। वास्तविकता यह है कि
इंटरनेट व सामाजिक साइटें दोधारी तलवार की भांति कार्य
करती हैं। इस आधार पर हमें इस बात की अनुमति नहीं देनी
चाहिये कि हम सामाजिक साइटों में व्यस्त हो जायें और जहां
चाहें जायें बल्कि हमें उनसे सही लाभ उठाने को सीखना
चाहिये और इन साइटों का प्रयोग अपनी और अपने निकटवर्ती
लोगों की आवश्यकताओं को दूर करने के लिए करना चाहिये।
On Feb 10, 2016 11:24 AM, "Shreenivas Naik" <
[email protected]> wrote:

> इंटरनेट
> आधुनिक समय में, पूरी दुनिया में इंटरनेट एक बहुत ही
> शक्तिशाली और दिलचस्प माध्यम बनता जा रहा है। ये एक
> नेटवर्कों का नेटवर्क है और कई सारी सेवाओं तथा संसाधनों
> का समूह है जो हमें कई प्रकार से लाभ पहुँचाता है। इसके
> इस्तेमाल से हमलोग कहीं से भी वर्ल्ड वाइड वेब तक पहुँच सकते
> है। ये हमें बड़ी तादाद में सुविधा मुहैया कराता है जैसे-ईमेल,
> सर्फिंग सर्च इंजन, सोशल मीडिया के द्वारा बड़ी हस्तियों
> से जुड़ना, वेब पोर्टल तक पहुँच, शिक्षाप्रद वेबसाइटों को
> खोलना, रोजमर्रा की सूचनाओं से अवगत रहना, विडियो
> बातचीत आदि। ये सभी का सबसे अच्छा दोस्त बनता है।
> आधुनिक समय में लगभग हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल विभिन्न
> उद्देश्यों के लिये कर रहा है। जबकि हमें अपने जीवन पर इससे
> पड़ने वाले फायदे-नुकसान के बारे में भी जानना चाहिये।
> विद्यार्थीयों के लिये इसकी उपलब्धता जितनी लाभप्रद है
> उतनी ही नुकसानदायक भी क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता
> के चोरी से इसके माध्यम से गलत वेबसाइटों का भी इस्तेमाल
> करते है जोकि उनके भविष्य को नुकसान पहुँचा सकता है।
> ज्यादातर माता-पिता इस खतरे को समझते है लेकिन कुछ इसे
> नज़रअंदाज कर देते है और खुलकर इंटरनेट का इस्तेमाल करते है।
> इसलिये घर में बच्चों द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल अभिवावकों
> की देखरेख में होनी चाहिये।
> अपने कम्प्यूटर सिस्टम में पासवर्ड और प्रयोक्ता नाम डाल कर
> अपने खास डाटा को दूसरों से सुरक्षित रख सकते है। इंटरनेट हमें
> किसी भी ऐप्लिकेशन प्रोग्राम के द्वारा अपने दोस्त,
> माता-पिता और शिक्षकों को किसी भी क्षण संदेश भेजने
> की आजादी देता है। ये जान कर हैरानी होगी कि उत्तरी
> कोरिया, म्यांमार आदि कुछ देशों में इंटरनेट पर पाबंदी है
> क्योंकि वो इसे बुरा समझते है। कभी-कभी इंटरनेट से सीधे-तौर
> पर कुछ भी डाउनलोड करने के दौरान, हमारे कम्प्यूटर में
> वाइरस, मालवेयर, स्पाइवेयर, और दूसरे गलत प्रोग्राम आ जाते
> है जो हमारे सिस्टम को नुकसान पहुँचा सकते है। ऐसा भी हो
> सकता है कि हमारे सिस्टम में रखे डाटा को बिना हमारी
> जानकारी के पासवर्ड होने के बावजूद भी इंटरनेट के द्वारा
> हैक कर लिया जाये।
>

-- 
1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/forum/hindistf
Hindi KOER web portal is available on 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi

2. For Ubuntu 14.04 installation,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha   (It has Hindi 
interface also)

3. For doubts on Ubuntu and other public software,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions

4. If a teacher wants to join STF,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member

5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software 
सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर
--- 
You received this message because you are subscribed to the Google Groups 
"HindiSTF" group.
To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email 
to [email protected].
To post to this group, send an email to [email protected].
Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf.
To view this discussion on the web, visit 
https://groups.google.com/d/msgid/hindistf/CAOWNnMFDM5f6D%3Dvw6bfLVTrFYAqNPn8To_CmF8jKMmchPiYTBg%40mail.gmail.com.
For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.

Reply via email to