Sent from my Intex Smartphone On Mar 5, 2016 10:47 AM, "veeresh.arakeri" <[email protected]> wrote: > > हिंदी कक्षा 10 सरल और महत्वपूर्ण प्रशन साथ में उत्तर > Contents > दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए। > > 1} सभी का मनोरथ कैसे पूर्ण होता है ? > उत्तर :- दया दयानिधि )भगवान) की प्रार्थना करने से सभी का मनोरथ पूर्ण होता है। > 2} प्रभु की दया को कौन दर्शा रही है ? > उत्तर:- प्रभु की दया को चाँद, चाँदनी, सूरज तथा सागर की तरंगमालाएँ दर्शा रही > है। > 3} रवींद्रनाथ जी ने ‘सर’ की उपाधि क्यों त्याग दी ? > उत्तर :- 1919 में जलियाँवाला बाग के अमानुषिक हत्याकाण्ड से दुखित होकर > रवींद्रनाथ जी ने ‘सर’ की उपाधि त्याग दी । > 4} शांतिनिकेतन का आशय क्या था ? > उत्तर :- शांतिनिकेतन का आशय यह था कि युवक-युवतियों की औपचारिक शिक्षा के > साथ-साथ प्रतिभा तथा कौशल की अभिव्यक्ति के लिए आवश्यक मंच का निर्माण करना । > 5} रवींद्र जी ने किन-किन विषयों पर लेख लिखे हैं ? > उत्तर :- रवींद्र जी ने राजनीति, शिक्षा, धर्म, कला आदि विषयों पर लेख लिखे हैं । > 6} करोड़पति के होशहवास क्यों उड़ गए ? > उत्तर:- नौकर ने कहा- “मालिक ! बाज़ार में एकदम कीमतें गिर गयीं। बहुत बड़ा घाटा > हुआ है, मालिक।” यह समाचार सुनकर करोड़पति के होशहवास उड़ गए । > 7} लोग क्या कहकर चीख रहे थे ? > उत्तर :- लोग इस प्रकार चीख रहे थे कि- “अरे, अरे, बूढ़ा मोटर के नीचे कुचला > जाएगा, मर गया, मर गया । > 8} बूढ़े को किसने बचाया ? कैसे ? > उत्तर :- बूढ़े को भिखारी ने बचाया। भिखारी बेतहाश भागते हुए गया और बूढ़े का > हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचते हुए बचाया । > 9} इंटरनेट का मतलब क्या है ? > उत्तर :- इंटरनेट अनगिनत कंप्यूटरों के कई अंतर्जालों का, एक दूसरे से संबध > स्थापित करने का जाल है । > 10} व्यापार और बैंकिंग में इंटरनेट से क्या मदद मिलती है ? > उत्तर :- इंटरनेट द्वारा घर बैठे-बैठे खरीदारी तथा कोई भी बिल भर सकते हैं । > इंटरनेट बैंकिंग द्वारा दिनिया की किसी भी जगह पर चाहे जितनी भी रकम भेजी जा > सकती है । > 11} ई-गवर्नेंस क्या है ? > उत्तर:- ई-गवर्नेंस के द्वारा सरकार के सभी कामकाज का विवरण, अभिलेख, सरकारी > आदेश आदि को यथावत् लोगों को सूचित किया जाता है। > 12} भारत माँ के प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन कीजिए । > उत्तर:- भारत माँ के यहाँ हरे-भरे खेत, फल-फूलों से युत वन-उपवन तथा खनिजों का > व्यापक धन है। इस प्रकार प्राकृतिक सौंदर्य ने सबको मोह लिया है । > 13} मातृभूमि का स्वरूप कैसे सुशोभित है ? > उत्तर :- मातृभूमि अमरों की जननी है। उसके ह्रदय में गाँधी, बुध्द और राम समायित > हैं। माँ के एक हाथ में न्याय पताका तथा दूसरे हाथ में ज्ञान दीप है। इस प्रकार > मातृभूमि का स्वरूप सुशोभित है । > 14} लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था ? > उत्तर:- लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू लेखिका के पैर तक आकर सर्र > से परदे पर चढ़ जाता और फिर उसी तेजी से उतरता । उसका यह क्रम तब तक चलता, जब तक > लेखिका उसे पकड़ने के लिए न उठती । > 15} लेखिका ने गिल्लू के प्राण कैसे बचाये ? > उत्तर :- लेखिका ने गिलहरी को हौले से उठाकर कमरे में लाया, फिर रुई से रक्त > पोंछकर घावों पर पेंसिलिन का मरहम लगाया। कई घंटे के उपचार के बाद उसके मुँह में > एक बूँद पानी टपकाया जा सका। > 16} गिल्लू ने लेखिका की गैरहाजरी में दिन कैसे बिताये ? > उत्तर :- गिल्लू लेखिका की गैरहाजरी में उदास रहता था। अपना प्रिय खाद्य काजू कम > खाता था। लेखिका के घर आने तक गिल्लू अकेलापन महसूस कर रहा था । > 17} छलनी से क्या-क्या कर सकते हैं ? > उत्तर:- छलनी से दूध छान सकते हैं । इसके अलावा चाय भी छान सकते हैं । > 18} बसंत राजकिशोर से दो पैसे लेने से क्यों इनकार करता है ? > उत्तर:- बसंत एक स्वाभिमानी लड़का था । वह मुफ्त में पैसे लेने को भीख समझता था। > इसलिए बसंत राजकिशोर से दो पैसे लेने से इनकार करता है । > 19} प्रताप राजकिशोर के घर क्यों आया ? > उत्तर:- बसंत राजकिशोर द्वारा दिये गए नोट को भुनाकर वापस आते समय मोटर के नीचे > आ गया । इससे उसके दोनो पैर कुचले गये । इसलिए वह नहीं लौटा । छुट्टे पैसे वापस > देने के लिए प्रताप राजकिशोर के घर आया । > 20} कर्नाटक की प्रमुख नदियाँ और जलप्रपात कौन-कौन-से हैं ? > उत्तर :- कर्नाटक की प्रमुख नदियाँ है- कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा आदि । कर्नाटक > के प्रमुख जलप्रपात है- जोग, अब्बी, गोकाक, शिवनसमुद्र आदि । > 21} कर्नाटक के किन सहित्यकारों को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त है ? > उत्तर :- कर्नाटक के निम्न साहित्यकरों को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त है- > कुवेंपु, द.रा. बेंद्रे, शिवराम कारंत, मास्ति वेंकटेश अय्यंगार, वि.कृ.गोकाक, > यू.आर.अनंतमूर्ति, गिरिश कार्नाड तथा चंद्रशेखर कंबार। > 22} बेंगलूरु में कौन-कौन-सी बृहत् संस्थाएँ है ? > उत्तर :- बेंगलूरु में भारतीय विज्ञान संस्थान, एच.ए.एल., एच.एम.टी., आई.टी.आई., > बी.एच.ई.एल., बी.ई.एल., जैसी बृहत संस्थाएँ हैं । > 23} भीष्म साहनी जी अन्य बालकों से क्यों जलते थे ? > उत्तर :- भीष्म साहनी बचपन में बीमारी के कारण खाट पर लेटे रहते थे । ऐसे में > स्वस्थ, हँसते – खेलते लड़कों की तुलना में अपने को छोटा और असमर्थ समझकर उन > बालकों से जलते थे । > 24} अंग्रेजी अध्यापक से भीष्म साहनी को कैसी प्रेरणा मिली ? > उत्तर :- अंग्रेजी अध्यापक ने भीष्म साहनी जी को दकियानूसि, संकीर्ण, घुटन भरे > वातावरण में से बाहर निकाल लिया । उन्ही के प्रभाव से साहनी जी सहित्य-रचना में > कलम आजमाई करने लगे । > 25} साहनी जी ने किस उद्देश्य से खादी पहनना शुरू किया ? > उत्तर :- साहनी जी आंदोलन के दिनों में कुर्ता – पैजामा पहन कर सड़को पर घूमते > थे । मन ही मन में उम्मीद कर रहे थे कि पुलिसवाले उनके पहनावे को देखकर सरकार के > खिलाफ विद्रोह मानकर गिरफ्तार कर लेंगे । गिरफ्तार होना ही साहनी जी का उद्देश्य > था पर ऐसा नहीं हुआ । > 26} फूल मालाएँ मिलने पर लेखक क्या सोचने लगे ? > उत्तर :- लेखक को लगभग दस बड़ी फूल-मालाएँ पहनायी गयीं । उन्होंने सोचा, आस-पास > कोई माली होता तो फूल-मालाएँ भी बेच लेता । > 27} लेखक ने मंत्री को क्या समझाया ? > उत्तर :- लेखक ने मंत्री को समझाया की -“ऐसा हरगिज मत करिये । ईमानदारों के > सम्मेलन में पुलिस ईमानदारों की तलाशी ले, यह बड़ी अशोभनीय बात होगी। फिर इतने > बड़े सम्मेलन में थोड़ी गड़बड़ी होगी ही।” > 28} चप्पलों की चोरी होने पर ईमानदार डेलिगेट ने क्या सुझाव दिया ? > उत्तर :- डेलिगेट ने सुझाव दिया कि –“देखिए, चप्पलें एक जगह नहीं उतारना चिहिए । > एक चप्पल यहाँ उतारिये, तो दूसरी दस फीट दूर। तब चप्पलें चोरी नहीं होतीं। एक ही > जगह जोड़ी होगी, तो कोई भी पहन लेगा । मैंने ऐसा ही किया था।” > 29} मुख्य अतिथि की बेईमानी कहाँ दिखाई देती है ? > उत्तर :- मुख्य अतिथि ने ईमानदार डेलिगेट की फटी – पुरानी चप्पलें बिना बताए पहन > ली थी। इससे पहले वे सोचते थे कि दूसरे दर्जे में यात्रा कर के पहले दर्जे का > किराया वसूल कर लिया जाए और स्वागत में पहनायी गयी दस फूल-मालाओं को किसी माली > को बेच लेता । > 30} ‘प्रकृति पर सर्वत्र है विजयी पुरुष आसीन’ – इस पंक्ति का आशय समझाइए । > उत्तर :- इस पंक्ति का आशय है कि- आज के मानव ने प्रकृति के हर तत्व पर (आकाश, > पाताल, धरती) विजय प्राप्त कर ली है। अर्थात प्रकृति को अपने नियंत्रण में रखा > है । > 31} दिनकर जी के अनुसार मानव का सही परिचय क्या है ? > उत्तर :- दिनकर जी के अनुसार जो मानव आपस में भाई-चारा बढ़ाये तथा दूसरे मानव से > प्रेम का रिश्ता जोड़कर आपस की दूरी को मिटाए वही सच्चा ज्ञानी, विदवान एवं मानव > कहलाने का अधिकारी है । > 32} अभिनव मनुष्य कविता का दूसरा कौन-सा शीर्षक हो सकता है ? क्यों ? > उत्तर :- इस कविता का दूसरा शीर्षक हो सकता है – ‘प्रकृति पुरुष’। क्योंकि > मनुष्य ने लगभग प्रकृति के हर तत्व पर अपने प्रयासों से विजय प्राप्त कर ली है । > 33} तिम्मक्का दंपति किस प्रकार के धर्म-कार्य में लग गये ? > उत्तर :- तिम्मक्का दंपति के गाँव के पास श्रीरंगस्वामी का मंदिर था, जहाँ हर > साल मेला लगता था। वहाँ आनेवाले जानवरों के लिए उन्होंने पीने के पानी का > ईंतज़ाम करते हुए वे धर्म-कार्य में लग गये । > 34} तिम्मक्का के जीवन में कैसी मुसीबत आ गई ? > उत्तर :- तिम्मक्का के पति की तबीयत खराब हो गई। चिक्कय्या को भीख माँगने की > स्थिति आ गई। उन्हें कभी पैसे मिलते तो कभी गालियाँ सुननी पडती थी। ऐसी हालत में > चिक्कय्या चल बसे। तिम्मक्का अब अकेली पड गई। > 35} तिम्मक्का ने क्या संकल्प किया है ? > उत्तर :- तिम्मक्का ने अपने पति की याद में हुलिकल ग्राम में गरीबों की नि:शुल्क > चिकित्सा के लिए एक अस्पताल के निर्माण कराने का संक्ल्प किया है। > 36} मुखिया को मुख के समान होना चाहिए। कैसे? > उत्तर :- जिस प्रकार मुँह खाने-पीने का काम अकेला करता है और उससे ही शरीर के > सारे अंगों का पालन-पोषण होता है। उसी प्रकार मुखिया को विवेकवान होकर सबके हित > में काम करना चाहिए । > 37} मनुष्य के जीवन में प्रकाश कब फैलता है ? > उत्तर :- राम नाम को जपने से मानव की आंतरिक और बाह्य शुध्दि होती है, ऐसे करने > से मनुष्य के जीवन में चारों ओर प्रकाश फैलता है । > 38} कृष्ण बलराम के साथ खेलने क्यों नहीं जाना चाहता? > उत्तर :- बलराम कृष्ण को बहुत चिढ़ाता है। वह कहता है कि तुम्हें यशोदा माँ ने > जन्म नहीं दिया है बल्कि मोल लिया है। इसी गुस्से के कारण कृष्ण उसके साथ खेलने > नहीं जाना चाहता। > 39} कृष्ण अपनी माता यशोदा के प्रति क्यों नाराज़ है? > उत्तर :- कृष्ण अपनी माता यशोदा से इसलिए नाराज़ है कि वह केवल कृष्ण को ही > मारती है और बड़े भाई बलराम को गुस्सा तक नहीं करती। > 40} डॉ. कंबार जी को प्राप्त किन्हीं चार पुरस्कारों के नाम लिखिए।? > उत्तर :- पंप प्रशस्ति, मास्ति प्रशस्ति, कबीर सम्मन तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार। > 41} डॉ. कंबार जी को लोक साहित्य में रूचि कैसे उत्पन्न हुई ? > उत्तर :- जन्म से ही पौराणिक प्रसंगों को मन लगाकर सुनना तथा सामान्य जनता के > जीवन में भी अधिक दिलचस्पी लेने के कारण, डॉ. कंबार जी को लोक साहित्य में रूचि > उत्पन्न हुई । > 42} राष्ट्रभाषा हिंदी के बारे में डॉ. कंबार जी के क्या विचार हैं ? > उत्तर :- राष्ट्रभाषा हिंदी के बारे में डॉ. कंबार जी के विचार इस प्रकार है कि- > हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। राष्ट्र में एकता लाने के लिए हिंदी भाषा अत्यंत > उपयोगी है । आजकल यह संपर्क भाषा के रूप में प्रचलित है। हमें आपसी व्यवहार के > लिए हिंदी सीखना जरूर है। > 43} शनि का निर्माण किस प्रकार हुआ है ? > उत्तर:- बृहस्पति की तरह शनि का वायुमंडल भी हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन तथा > एमोनिया गैसों से बना है। शनि के सतह के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। हम > केवल इसके चमकीले बाहरी वायुमंडल को ही देख सकते हैं। > 44} सत्य क्या होता है ? उसका रूप कैसे होता है ? > उत्तर:- सत्य ! बहुत भोला-भाला, बहुत ही सिधा-साधा ! जो कुछ भी अपनी आँखों से > देखा, बिना नमक-मिर्च लगाए बोल दिया – यही तो सत्य है। कितना सरल ! सत्य दृष्टि > का प्रतिबिंब है, ज्ञान की प्रतिलिपि है, आत्मा की वाणी है। > 45} झूठ का सहारा लेते हैं तो क्या-क्या करना पड़ता है ? > उत्तर :- झूठ का सहारा लेते हैं तो एक झूठ साबित करने के लिए हजारों झूठ बोलने > पड़ते हैं । और, कहीं पोल खुली, तो मुँह काला करना पड़ता है, अपमानित होना पड़ता > है। > 46} माहात्मा गाँधी के सत्य की शक्ति के बारे में क्या कथन है ? > उत्तर :- उनका कथन है कि- “सत्य एक विशाल वृक्ष है। उसका जितना आदर किया जाता > है, उतने ही फल उसमें लगते हैं। उनका अंत नहीं होता ।” > 47} हर स्थिति में सत्य बोलने का अभ्यास क्यों करना चाहिए ? > उत्तर :- सत्य वह चिनगारी है जिससे असत्य पल भर में भस्म हो जाता है । अत: हमें > हर स्थिति में सत्य बोलने और पालन करने का अभ्यास करना चाहिए । > 48} ‘समय’ को अमूल्य क्यों माना जाता है ? > उत्तर :- समय को इसलिए अमूल्य माना जाता है कि- समय के नष्ट हो जाने से जीवन भी > विनष्ट हो जाता है। खोया हुआ समय बार-बार नहीं आता। > 49} ‘समय का सदुपयोग’ से क्या तात्पर्य है ? > उत्तर :- समय का सदुपयोग इसका अर्थ है- ‘सही समय पर सही काम करना।’ उपयुक्त समय > पर अपना काम निपटाना’ । समय कभी रुकता नहीं, अत: सबको उसके साथ-साथ चलकर उसका > सदुपयोग कर लेना चाहिए । > 50} हमें किसका आदर करना चाहिए ? > उत्तर:- हम सब को समय की गंभीरता को समझते हुए उसका आदर करना चाहिए। > भावार्थ > > १}जो तेरी होवे दया दयानिधि तो पूर्ण होते सबके मनोरथ > सभी ये कहते पुकार करके > यही तो आशा दिला रही है! > भावार्थ:- > उपर्युक्त पंक्तियों को कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘प्रभो!’ नामक कविता भाग > से लिया गया है। भगवान की दया मानव के जीवन पर किस प्रकार पड रही है, इसके बारे > में प्रकाश डालते हुए कावि लिखते हैं कि - हे दयानिधि ! यदि आपकी दया हम पर रही > तो हमारी पूरी मनोकामनाएँ पूर्ण हो आती हैं। इसलिए प्रभो! सभी ये कहते हुए, आपके > प्रति आशा रखते हुए प्रार्थना कर रहे हैं। > > २} एक हाथ में न्याय-पताका, ज्ञान-दीप दूसरे हाथ में, > जग का रुप बदल दे, हे माँ, > कोटि-कोटि हम आज साथ में । > गूँज उठे जय-हिंद नाद से – > सकल नगर और ग्राम, > मातृ-भू, शत-शतब बार प्रणाम । > भावार्थ:- > उपर्युक्त पंक्तियों को कवि भगवतीचरण वर्मा द्वारा रचित ‘मातृभूमि’ नामक कविता > भाग से लिया गया है।कवि भारत माता की न्यायनिष्टा, ज्ञानशक्ति तथा महानता के > बारे में बताते हुए इस प्रकार लिखते हैं कि – हे भारत माता ! तेरे एक हाथ में > न्याय की पताका तो दुसरे हाथ में ज्ञान का दीपक है।अब तू संसार का रूप बदल दे > माँ! आज हम करोड़ों भारतवासी तुम्हारे साथ हैं। हे मा ! पूरे देश के गाँव-गाँव > तथा नगर-नगर में ‘जय-हिंद’ का नाद गूँज उठे यही हमारी आशा है। भारत माता तुम्हे > सौ-सौ बार प्रणाम। > > ३} मुखिया मुख सों चाहिए, खान पान को एक। > पालै पोसै सकल अँग, तुलसी सहित विवेक।। > भावार्थ:- > प्रस्तुत दोहे को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'तुलसी के दोहे' नामक कविता भाग > से लिया गया है। कवि ने मुख अर्थात् मुँह और मुखिया दोनों के स्वभाव की समानता > दर्शाते हुए लिखते हैं कि- जिस प्रकार मुँह खाने-पीने का काम अकेला करता है और > उससे ही शरीर के सारे अंगों का पालन-पोषण होता है। उसी प्रकार मुखिया को > विवेकवान होकर सबके हित में काम करना चाहिए । > > ४}तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक। > साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसो एक।। > भावार्थ:- > प्रस्तुत दोहे को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'तुलसी के दोहे' नामक कविता भाग > से लिया गया है। कवि ने मनुष्य पर जब विपत्ति आती हैं तो हमें किस तरह इस > विपत्ति से बच सकते हैं? इसके बारे में बताते हुए लिखते हैं कि- जब मनुष्य पर > संकट आता है तो तब विद्या, विनय और विवेक ही उसका साथ निभाते हैं। जो व्यक्ति > राम पर भरोसा करता है, वह साहसी, सत्यव्रती और सुकृतवान बनता है। > व्याकरण > > मुहावरे > > 1. होश-हवास उड़ना – घबरा जाना > 2. बाल-बाल बचना – खतरे से बच जाना > 3. सातवें आसमान पर पहुँचाना – अधिक क्रोधित होना > 4. श्री गणेश करना – प्रारंभ करना > 5. नौ दो ग्यारह होना – भाग जाना > 6. आँखे लाल होना – गुस्सा बढ़ना > 7. घोड़े बेचकर सोना – निश्चिंत होना > 8. चूँ तक न करना – कुछ भी न बोलना > 9. पसीना बहाना – परिश्रम करना > 10. हिम्मत न हारना – धीरज रखना > 11. बीड़ा उठाना – जिम्मेदारी लेना > 12. चने के झाड़ पर चढ़ाना – झूठमूठ की प्रशंसा करना > 13. घाट-घाट का पानी पीना – बहुत अनुभव पाना > 14. शुक्रिया अदा करना – धन्यवाद देना > 15. नाक में दम करना – अधिक तंग करना > 16. आँखों में धूल झोंकना – धोखा देना > 17. अंगारे उगलना – क्रोध में कठोर वचन बोलना > 18. आग बबूला होना – अधिक क्रोधित होना > 19. आसमान सिर पर उठाना – शोर करना > 20. कमर कसना – तैयार होना > 21. खून पसिना एक करना – बहुत मेहनत करना > 22. छक्के छुड़ाना – बुरी तरह हराना > 23. दाल न गलना – सफल न होना > 24. फूला न समाना – अत्यंत प्रसन्न होना > 25. उँगली पर नचाना – वश में रखना > 26. आँखें खुलना – होश आना > विराम चिह्न > > 1. अल्प विराम.........................(,) > 2. अर्ध विराम...........................(;) > 3. पूर्ण विराम...........................(।) > 4. प्रश्न चिह्न..........................(?) > 5. विस्मयादिबोधक चिह्न..........(!) > 6. योजक चिह्न........................(-) > 7. उध्दरण चिह्न.......................(“ ”) (‘ ’) > 8. कोष्ठक चिह्न.......................( ) > 9. विवरण चिह्न.......................( :- ) ( : ) > कारक > > 1. कर्ता कारक – (ने) क्रिया करनेवाले का बोध। > 2. कर्म कारक – (को) क्रिया का फल भोगनेवाले का बोध। > 3. करण कारक – (से) सहायता देनेवाले साधन का बोध। > 4. संप्रदान कारक – (के लिए, के द्वारा, के वास्ते) क्रिया का उद्देश्य या > प्रयोजन का बोध। > 5. अपादान कारक – (से) अलगाव का बोध। > 6. संबंध कारक – (का, के, की) संबंध का बोध। > 7. अधिकरण कारक – (में, पर) क्रिया के होने का स्थान या समय का बोध। > 8. संबोधन कारक – (अरे, हे, ओ, वाह) संज्ञा को पुकारने का भाव। > विलोम शब्द > > बड़ा X छोटा > प्रसिध्द X अप्रसिध्द > औपचारिक X अनौपचारिक > आरंभ X अंत > पूर्व X पश्चिम > निकट X दूर > पाप X पुण्य > निराशा X आशा > स्वीकार X अस्विकार > होश X बेहोश > दुरुपयोग X सदुपयोग > स्थिर X अस्थिर > बढ़ना X घटना > वरदान X अभिशाप > मुमकिन X नामुमकिन > दिन X रात > भीतर X बाहर > अनुपयुक्त X उपयुक्त > चढ़ना X उतरना > प्रिय X अप्रिय > उपयोगी X अनुपयोगी > खबर X बेखबर > संतोष X असंतोष > स्वस्थता X अस्वस्थता > ईमान X बेईमान > उचित X अनुचित > उपस्थिति X अनुपस्थिति > उत्तीर्ण X अनुत्तीर्ण > विश्वास X अविश्वास > रोज़गार X बेरोजगार > पीछे X आगे > खरीदना X बेचना > शांति X अशांति > लेना X देना > आना X जाना > गरीब X अमीर > सुंदर X कुरुप > विदेश X स्वदेश > आदि X अंत, अनादि > सजीव X निर्जीव > आयात X निर्यात > सदाचार X दुराचार > जवाब X सवाल > सज्जन X दुर्जन > आगमन X निर्गमन > जन्म X मरण > आसान X कठिन > अपना X पराया > छोटे X बड़े > माता X पिता > बैल X गाय > हाथी X हाथिनि > बाप X माँ > अँधकार X प्रकाश > आय X व्यय > आगे X पीछे > अमृत X विष > जय X पराजय > आधार X निराधार > परतंत्र X स्वतंत्र > सफल X विफल > चल X अचल > आदर X अनादर > सुख X दुख > लिखित X अलिखित > आवश्यक X अनावश्यक > अन्य वचन > > परिवार - परिवार > घर - घर > लोग - लोग > कहानी - कहानियाँ > कला – कलाएँ > कविता – कविताएँ योजना - योजनाएँ > उपाधि - उपाधियाँ > पत्र – पत्र > उड़ान - उड़ानें > आँखें - आँख > रुपया – रुपये > पैसे - पैसा > हाथ - हाथ > रोटी - रोटियाँ > परदा – परदे > कमरा – कमरे > दायरा – दायरे > जगह – जगहें > 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> ठाकुर – ठकुराईन > हलवाई – हलवाईन > शेर – शेरनी > महान – महती > भाग्यवान – भाग्यवती > स्वामी – स्वामिनी > सेठ – सेठानी > दाता – दात्री > विधाता – विधात्री > नर – मादा > सेवक – सेविका > पर्यायवाची शब्द > > सागर – समुद्र – जलधि – अंबुधि > आगार – मकान – घर – गृह > जल – पानी – अंबु – नीर > आकाश – आसमान – गगन – नभ > गात – शरीर – देह > आहार – खाना – भोजन > विस्मय – अचरज – आश्चर्य > हिम्मत – धैर्य – साहस > खोज – तलाश – ढूँढ़ > शाम – संध्या – संध्याकाल > माल – समान – चीज़ > दुनिया – संसार – जगत > बोझ – वजन – भार > उम्मीद – आशा – भरोसा > पेड़ – वृक्ष – तरु > पक्षी – चिड़िया – पंखेरु > महिला – स्त्री – नारी > तबीयत – स्वास्थ्य – सेहत > आदमी – पुरुष – नर > आयु – उम्र > विपुल – बहुत > स्फूर्ति – उत्साह > संपदा – संपत्ति > हलचल – गतिविधि > तालीम – शिक्षा > विद्रोह – क्रांति > दफ्तर – कार्यालय > प्रेरणार्थक क्रिया रुप > > पढ़ना – पढ़ाना – पढ़वाना > सुनना – सुनाना – सुनवाना > लिखना – लिखाना – लिखवाना > समझना – समझाना – समझवाना > करना – कराना – करवाना > देना – दिलाना – दिलवाना > उठना उठाना – उठवाना > पकड़ना – पकड़ाना – पकड़वाना > चलना – चलाना –चलवाना > बैठना – बिठाना – बिठवाना > मिलना – मिलाना – मिलवाना > ठहरना – ठहराना – ठहरवाना > छेड़ना – छिड़ाना – छिड़वाना > धोना – धुलाना – धुलवाना > भेजना – भिजाना – भिजवाना > देखना – दिखाना – दिखवाना > रोना – रुलाना – रुलवाना > लौटना – लौटाना – लौटवाना > धोना – धुलाना – धुलवाना > उतरना – उतारना – उतारवाना > सीना – सिलाना – सिलवाना > पहनना – पहनाना – पहनवाना > बनना – बनाना – बनवाना > जागना – जगाना – जगवाना > हँसना – हँसाना – हँसवाना > जीतना – जिताना – जितवाना > उड़ना – उड़ाना – उड़वाना > खेलना – खिलाना – खिलवाना > दौड़ना – दौड़ाना – दौड़वाना > ओढ़ना – ओढ़ाना – ओढ़वाना > > कन्नड में अनुवाद > > 1. उनका परिवार सांस्कृतिक नेतृत्व के लिए समस्त बंगाल में प्रसिध्द था। > ಅವರ ಕುಟುಂಬ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕ ನೇತೃತ್ವಕ್ಕಾಗಿ ಸಂಪೂರ್ಣ ಬಂಗಾಳದಲ್ಲಿ ಪ್ರಸಿದ್ದವಿತ್ತು. > 2. छोटी आयु में उन्होंने अपने पिता की संपदा का भार संभाला। > ಚಿಕ್ಕ ವಯಸ್ಸಿನಲ್ಲಿಯೇ ಅವರು ತನ್ನ ತಂದೆಯ ಆಸ್ತಿಯ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯನ್ನು ವಹಿಸಿಕೊಂಡರು. > 3. महात्माजी उनसे अत्यंत प्रभावित थे। > ಮಹಾತ್ಮರು ಅವರಿಂದ ತುಂಬಾ ಪ್ರಭಾವಿತರಾಗಿದ್ದರು. > 4. हम यह कह सकते हैं कि रवींद्र जी का अंग्रेजी साहित्य में उच्च स्थान है। > ಆಂಗ್ಲ ಸಾಹಿತ್ಯದಲ್ಲಿ ರವೀಂದ್ರರವರಿಗೆ ಉನ್ನತ ಸ್ಥಾನವಿದೆ ಎಂದು ನಾವು ಹೇಳಬಹುದು. > 5. ‘गीतांजलि’ का एक-एक गीत भावों से परिपूर्ण है। > ‘ಗೀತಾಂಜಲಿಯ’ ಒಂದೊಂದು ಹಾಡುಗಳು ಭಾವಗಳಿಂದ ಪರಿಪೂರ್ಣವಾಗಿವೆ. > 6. साहूकार की एक आलीशान कोठी थी। > ಸಾಹುಕಾರನು ಒಂದು ಭವ್ಯ ಬಂಗಲೆಯನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದನು. > 7. करोड़पति के कार्यक्रम में कभी कोई अंतर नहीं आता था। > ಕೋಟ್ಯಾಧೀಶನ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ಎಂದೂ ಯಾವ ವ್ಯತ್ಯಾಸವು ಆಗುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. > 8. भगवान से उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। > ದೇವರಿಂದ ಅವನಿಗೆ ಯಾವ ಪ್ರತಿಕ್ರಿಯೆಯೂ ಸಿಗಲಿಲ್ಲ. > 9. रास्ते में भिखारी को एक छोटा लड़का मिला। > ದಾರಿಯಲ್ಲಿ ಭಿಕ್ಷುಕನಿಗೆ ಒಬ್ಬ ಚಿಕ್ಕ ಬಾಲಕ ಭೇಟಿಯಾದ. > १०. भिखारी के रुप में आकर तुम ही ने मेरी रक्षा की। > ಭಿಕ್ಷುಕನ ರೂಪದಲ್ಲಿ ಬಂದು ನೀನೇ ನನ್ನನ್ನು ರಕ್ಷಿಸಿದೆ. > ११. इंटरनेट आधुनिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण अंग बन गया है। > ಅಂತರ್ಜಾಲ ಆಧುನಿಕ ಜೀವನಶೈಲಿಯ ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ಅಂಗವಾಗಿಬಿಟ್ಟಿದೆ. > १२. इंटरनेट द्वारा घर बैठे-बैठे खरीदारी कर सकते हैं। > ಅಂತರ್ಜಾಲದ ಮುಲಕ ಮನೆಯಲ್ಲಿಯೇ ಕುಳಿತುಕೊಂಡು ಖರೀದಿ ಮಾಡಬಹುದು. > १३. इंटरनेट की सहायता से बेरोज़गारी को मिटा सकते हैं। > ಅಂತರ್ಜಾಲದ ಸಹಾಯದಿಂದ ನಿರುದ್ಯೋಗ ನಿರ್ಮೂಲನೆ ಮಾಡಬಹುದು. > १४. कई घंटे के उपचार के उपरांत मुँह में एक बूँद पानी टपकाया। > ಹಲವು ಗಂಟೆಗಳ ಆರೈಕೆಯ ನಂತರ ಬಾಯಿಯಲ್ಲಿ ಒಂದು ಹನಿ ನೀರನ್ನು ಹಾಕಲಾಯಿತು. > १५. इतने छोटे जीव को घर में पले कुत्ते-बिल्लियों से बचाना भी एक समस्या ही थी। > ಇಷ್ಟೊಂದು ಚಿಕ್ಕ ಜೀವಿಯನ್ನು ಮನೆಯಲ್ಲಿಯೇ ಸಾಕಿದ ನಾಯಿ-ಬೆಕ್ಕುಗಳಿಂದ ಕಾಪಾಡುವುದು ಒಂದು > ಸಮಸ್ಯ ಆಗುತ್ತು. > १६. दिन भर गिल्लू ने न कुछ खाया, न बाहर गया। > ದಿನವಿಡೀ ಗಿಲ್ಲು ಏನೂ ತಿನ್ನಲಿಲ್ಲ ಹಾಗೂ ಹೊರಗು ಹೋಗಲಿಲ್ಲ. > १७. गिल्लू मेरे पास रखी सुराही पर लेट जाता था। > ಗಿಲ್ಲು ನನ್ನ ಬಳಿ ಇಟ್ಟಿದ್ದ ನೀರಿನ ಹೂಜಿ ಮೇಲೆ ಮಲಗಿ ಬಿಡುತ್ತಿತ್ತು. > १८. हम आपको आने-जाने के पहले दर्जे का किराया देंगे। > ನಾವು ತಮಗೆ ಹೋಗಿ ಬರುವುದಕ್ಕಾಗಿ ಮೊದಲ ದರ್ಜೆಯ ಬತ್ತೆಯನ್ನು ಕೊಡುತ್ತೇವೆ. > १९. स्टेशन पर मेरा खूब स्वागत हुआ। > ಸ್ಟೇಷನ್ ನಲ್ಲಿ ನನಗೆ ಬಹಳನೇ ಸ್ವಾಗತ ಮಾಡಲಾಯಿತು. > २०. देखिए, चप्पले एक जगह नहीं उतारना चाहिए। > ನೋಡಿ ಚಪ್ಪಲಿಗಳನ್ನು ಒಂದೇ ಜಾಗದಲ್ಲಿ ಬಿಡಬಾರದು. > २१. अब मैं बचा हूँ। अगर रुका तो मैं ही चुरा लिया जाऊँगा। > ಈಗ ನಾನು ಉಳಿದುಕೊಂಡಿದ್ಡೇನೆ. ಒಂದು ವೇಳೆ ಇಲ್ಲೇ ಉಳಿದುಕೊಂಡರೆ ನನ್ನನ್ನು ಸಹ ಕಳವು > ಮಾಡಲಾಗುತ್ತದೆ. > २२. अपना दत्तक पुत्र खोकर तिम्मक्का बहुत दु:खी हुई। > ತನ್ನ ದತ್ತು ಮಗನನ್ನು ಕಳೆದುಕೊಂಡು ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಬಹಳ ದು:ಖಿತಳಾದಳು. > २३. उन्हें अपने बच्चों की तरह प्रेम से पाला-पोसा। > ಅವುಗಳನ್ನು ತನ್ನ ಮಕ್ಕಳಂತೆ ಪ್ರೀತಿಯಿಂದ ಸಾಕಿ ಬೆಳೆಸಿದಳು. > २४. तिम्मक्का के जीवन में मुसीबत की घड़ियाँ शुरू हुईं। > ತಿಮ್ಮಕ್ಕನ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ತೊಂದರೆಗಳ ಕಾಲ ಪ್ರಾರಂಭವಾಯಿತು. > २५. तिम्मक्का ने अब तक सैकड़ों पेड़ लगाये हैं। > ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಇಲ್ಲಿಯವರೆಗೆ ಸೂಮಾರು ಮರಗಳನ್ನು ನೆಟ್ಟಿದ್ದಾಳೆ. > २६. पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ तिम्मक्का सामाजिक कार्य भी कर रही हैं। > ಪರಿಸರ ಸಂರಕ್ಷಣೆಯೊಂದಿಗೆ ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಸಮಾಜಿಕ ಕಾರ್ಯಗಳು ಕೆಲಸಗಳನ್ನು ಸಹ ಮಾಡುತಿದ್ದಾರೆ. > २७. डॉ. कंबार जी कन्नड नाटक तथा काव्य क्षेत्र के शिखरपुरुष हैं। > ಡಾ. ಕಂಬಾರರವರು ಕನ್ನಡ ನಾಟಕ ಹಾಗೂ ಕಾವ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಶಿಖರಪುರುಷರಾಗಿದ್ದಾರೆ. > २८. मुझमें पढ़ाई की इच्छा तीव्र होने के कारण मैं गोकाक में पढ़ाई करने में > कामयाब हुआ। > ನನಗೆ ಓದಬೇಕೆಂಬ ಆಸಕ್ತಿ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದ್ದ ಕಾರಣ ನಾನು ಗೋಕಾಕ್ನಲ್ಲಿ ವಿದ್ಯಾಭ್ಯಾಸ > ಮಾಡುವದರಲ್ಲಿ ಯಶಸ್ವಿನಾದೆ. > २९. मैं शुरू से ही पौराणिक प्रसंगों को मन लगाकर सुनता था। > ನಾನು ಪ್ರಾರಂಬದಿಂದಲೇ ಪೌರಾಣಿಕ ಪ್ರಸಂಗಗಳನ್ನು ಗಮನವಿಟ್ಟು ಕೇಳುತ್ತಿದ್ದೆ. > ३०. हमें आपसी व्यवहार के लिए हिंदी सीखना ज़रूरी है। > ನಮಗೆ ಪರಸ್ಪರ ವ್ಯವಹಾರಕ್ಕಾಗಿ ಹಿಂದಿ ಕಲಿಯುವ ಅಗತ್ಯವಿದೆ. > ३१. मैं आपके प्रति अत्यंत आभारी हूँ। > ನಾನು ತಮಗೆ ತುಂಬಾ ಆಭಾರಿಯಾಗಿದ್ದೇನೆ. > व्यावहारिक पत्र > > तीन दिन की छुट्टी के लिए पत्र > > दिनांक13-04-2016 > प्रेषक, > अश्वथनारायण, > 10वी कक्षा, ‘अ’ विभाग, > सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता, > चिक्कबल्लापुर जिला। > सेवा में, > प्रधानाचार्य, > सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता, > चिक्कबल्लापुर जिला। > महोदय, > विषय :- तीन दिन की छुट्टी के लिए पत्र। > सविनय निवेदन है कि मै अश्वथनारायण 10वी कक्षा, ‘अ’ विभाग, का छात्र हूँ । मैं > अपने बड़े भाई की शादी में भाग लेने के लिए बेंगलूरु जा रहा हूँ। दिनांक > 24-02-2016 से दिनांक 26-02-16 तक विद्यालय को नहीं आ सकता। कृपया आपसे अनुरोद > है कि आप इन तीन दिनों की छुट्टी मंजूर करने का कष्ट करें। कष्ट के लिए क्षमा > चाहता हूँ। > > आपका आज्ञाकारी छात्र, > अश्वथनारायण > व्यावहारिक पत्र > > प्रमाण पत्र के लिए पत्र > दिनांक 13-04-2016 > प्रेषक, > गणेश नायक, > 9वी कक्षा, ‘अ’ विभाग, > सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता, > चिक्कबल्लापुर जिला। > सेवा में, > प्रधानाचार्य, > सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता, > चिक्कबल्लापुर जिला। > विषय :- प्रमाण पत्र हेतु। > महोदया, > आपसे निवेदन है कि मेरे पिताजी का तबादला बीदर में हो गया है। उनके साथ मुझे भी > जाना होगा। > अत: अनुरोध करता हूँ कि मुझे नौवीं कक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र, स्कूल > छोड़ने का प्रमाण पत्र तथा चरित्र प्रमाण पत्र देने की कृपा करें। > धन्यवाद, > आपका आज्ञाकारी छात्र, > गणेश नायक > व्यक्तिगत पत्र > > पिता को पत्र > दिनांक : 13-04-2016 > पूज्य पिताजी, > सादर प्रणाम। > मैं यहाँ आपके आशीर्वाद से कुशल हूँ। आपका पत्र मिला, पढ़कर बहुत खुशी हुई। मेरि > पढ़ाई ठीक चल रही है। आपकी आज्ञानुसार मन लगाकर दिन-रात पढ़ाई में व्यस्त रहती > हूँ। > खेल-कूद या गपशप में ज्यादा समय नहीं गँवा रही हूँ। > हमारे स्कूल की ओर से अगले महीने 10 या 13 तारीख तक शैक्षिक-यात्रा का आयोजन हुआ > है। उसमें मेरी सारी सहेलियाँ जा रही हैं। उनके साथ मैं भी जाना चाहती हूँ। > इसलिए मनीआर्डर द्वारा मुझे तुरंत एक हजार रुपये भेजने की कृपा करें। > माताजी को मेरा प्रमाण, छोटे भाई राहुल को ढेर सारा प्यार। > आपकी लाडली पुत्री, > गौतमी एन.ए. > सेवा में, > श्री प्रभाकर एन.ए. > घर नं. 100 गौतमी निवास > सरस्वती स्कूल के समीप > एल्लोडु, गुडिबंडे ता. ५६१२०९ > निबंध लेखन > > प्रस्तावना > हमारे आस-पास के वातावरण को हम पर्यावरण कहते है। इसके तहत हवा, पानी, मिट्टी, > पेड़, पर्वत आदि आते हैं। पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण > प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। > पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार > I) जल प्रदुषण > II) थल प्रदुषण > III)वायु प्रदुषण > IV) ध्वनि प्रदुषण > I) जल प्रदुषण > 'जल प्रदुषण के प्रमुख कारण' > 1) गाँव , कस्बो का नगरो व महा-नगरो में रुपान्तरण > 2) कारखानों के द्वारा > 3) अनुचित रूप से कृषि कर अपशिष्ट प्रवाह करना > 4) धार्मिक और सामाजिक रूप से दुरुपयोग आदि । > II) थल प्रदुषण > थल प्रदुषण के प्रमुख कारण > 1)वनों की कटाई और मिट्टी का कटाव > 2)प्लास्टिक के पदार्थों का उपयोग > 3)खनीज पदार्थो का अत्यधिक उपयोग > 4)बिजली का अधिक मात्रा मे उपयोग आदि । > III) वायु प्रदुषण > वायु प्रदुषण के मुख्य कारण > 1) वाहनों का तेजी से उपयोग > 2 )रोजमर्रा की जिंदगी की होने वाले प्रदुषण > 3) कारखानों के धुए से प्रदुषण आदि । > IV) ध्वनि प्रदुषण > ध्वनि प्रदुषण के मुख्य कारण > 1) स्पीकर के उपयोग से > 2) आधुनिक साधनों के उपयोग से > 3) परिवहन के साधनों के उपयोग से आदि । > 'उपसंहार' > हम सब का जीवन पर्यावरण पर आश्रित है। आज पृथ्वी के वायुमंडल में प्राण वायु > पीने का पानी आदि तत्व कम होते जा रहे हैं और दूसरे हानिकारक तत्व बढ़ते जा रहे > हैं। अतएव हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, पानी को साफ रखने, ध्वनी प्रदूषण आदि > को रोकने के प्रयत्न करना चाहिए। > २} समय का सदुपयोग > 'प्रस्तावना' > सचमुच, समय एक अनमोल वस्तु है। संसार में कोई भी वस्तु मिल सकती हैं, किन्तु > खोया हुआ समय फिर हाथ नहीं आता। दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो गुजरे हुए घण्टों > को फिर से बजा दे। समय के सदुपयोग पर ही हमारे जीवन की सफलता प्राय: निर्भर रहती > है। वास्तव में अपने बहुमूल्य जीवन की कीमत वह मनुष्य समझता है, जो एक पल की > कीमत समझता है। समय का जिसने सदुपयोग कर लिया, उसने अपने जीवन का सदुपयोग कर > लिया। > दुरुपयोग > यह दुख की बात है कि कई लोग समय का दुरुपयोग करते हैं। सबेरे आठ बजे तक तो उनकी > आँखें नींद में ही डूबी रहती हैं। फिर उठते हैं, तो आधा घंटा आलस्य उतारने में > ही बीत जाता हैं| दिनभर में जीतने घंटे हम काम करते हैं, तो उसे कई गुना अधिक > समय फिजूल की बातों में और निरर्थक कामों में बिताते हैं। कई लोग तो दिन भर ताश > और शतरंज की बाजी में उलझे रहते हैं। यद्यपि हमारे जीवन में मनोरंजन समय का > सदुपयोग करने के लिए हमें प्रत्येक कार्य निश्चित समय में ही पूरा करने का > प्रयत्न करना चाहिए|। कुछ दिनों के निरन्तर अभ्यास से हमें समय का उचित उपयोग > करने की आदत पड़ जाएगी और हमें जीवन को सफल बनाने की कुंजी मिल जाएगी। > सदुपयोग > समय का विभाजन कर हम अध्ययन, व्यायाम, सत्संग, समाज-सेवा, मनोरंजन आदि अनेक > कार्य सरलतापूर्वक कर सकते हैं। इससे न तो हमें काम बोझ मालूम होगा और न ही "अब > कौन-सा काम करें ?" यह सोचने में समय नष्ट होगा। > अपने समय का सदुपयोग किये बिना कोई भी व्यक्ति महान् नहीं बन सकता। दुनियाँ के > महापरुष समय की कीमत जानते थे, इसलिए वे महान बन सके| समय का सदुपयोग करके ही वे > संसार में अमर कीर्ति प्राप्त कर सके थे। वाटरलू युद्ध में यदि एक सरदार चन्द > घड़ियों की देरी न कर देता, तो नेपोलियन अपनी घोर पराजय से बच जाता। > 'उपसंहार' > यदि हमें अपने जीवन से प्रेम हैं, तो हमें अपने बहुमूल्य समय को कभी भी नष्ट कर > देता है। हमें कबीर का यह दोहा ध्यान में रखना चाहिए - "कल करे सो आज कर , आज > करे सो अब। > पल में परलै होयगी, बहुरि करैगा का।" > स्कूल की पुस्तकालय > प्रस्थावना > ज्ञान-विज्ञान की असीम प्रगति के साथ पुस्तकालयों की सामाजिक उपयोगिता और अधिक > बढ़ गयी हैI युग-युग कि साधना से मनुष्य ने जो ज्ञान अर्जित किया है वह पुस्तकों > में संकलित होकर पुस्तकालयों में सुरक्षित है| > वे जनसाधारण के लिए सुलभ होती हैंI पुस्तकालयों में अच्छे स्तर कि पुस्तकें रखी > जाती हैं; उनमें कुछेक पुस्तकें अथवा ग्रन्थमालाएं इतनी महँगी होती हैं कि > सर्वसाधारण के लिए उन्हें स्वयं खरीदकर पढ़ना संभव नहीं होताI यह बात संदर्भ > ग्रंथों पर विशेष रूप से लागु होती हैI बड़ी-बड़ी जिल्दों के शब्दकोशों और > विश्वकोशों तथा इतिहास-पुरातत्व कि बहुमूल्य पुस्तकों को एक साथ पढ़ने का सुअवसर > पुस्तकालयों में ही संभव हो पाता है| इतना ही नहीं, असंख्य दुर्लभ और अलभ्य > पांडुलिपियां भी हमें पुस्तकालयों में संरक्षित मिलती हैं| > 'उपसंहार' > आज आवश्यकता है कि नगर-नगर में अच्छे और संपन्न पुस्तकालय खुलें जिससे बच्चों की > पुस्तकें पढ़ने में रूचि बढ़े और देश कि युवा प्रतिभाओं के विकास के सुअवसर सहज > सुलभ हों| > ४} समाचार पत्र > 'प्रस्तावना' > आज के युग में समाचार पत्र मनुष्यन की दिनचर्या का आवश्यतक अंग बन गया है। > प्रात:काल से ही मनुष्यय को इसका इंतजार रहता है। समाज की उन्नुति में इसका अहम > योगदान रहा है। > लाभ > हमारे आसपास व देश-विदेश की घटनाओं की जानकारी समाचार पत्र से ही प्राप्तद होती > है। समाचार पत्र का प्रकाशन कलकत्ता से प्रारंभ हुआ। पूर्व में समाचार पत्र का > उपयोग सैनिकों द्वारा सूचना देने के लिए किया जाता था। हमें हर तरह की जानकारी > इससे ही मिलती है। शिक्षा, खेल, मनोरंजन, साहित्यर आदि की प्रमुख खबरें दैनिक > समाचार में प्रकाशित होती हैं। हर देश में भिन्नल-भिन्नज भाषाओं में इसका > प्रकाशन होता है। दैनिक समाचार पत्र के अलावा मासिक, पाक्षिक व साप्तानहिक > पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है। हमें समाचार पत्र से घर बैठे देश-विदेश की > गतिविधि का पता चल जाता है। समाचार के लेख, खबरें समाज की उन्नेति में इनका > विशिष्टव योगदान रहा है। > 'उपसंहार' > समाचार पत्र के अलावा हमें टीवी, इंटरनेट पर भी खबरों की सुविधा मिल जाती है। यह > न्याय के खिलाफ हमेशा तत्पर रहता है। पहले इतने साधन नहीं थे, लेकिन अब समाचार > पत्र के कारण हमें नई-नई ज्ञान की बातें भी मिलती है। > ५} बेरोजगारी की समस्या > प्रस्तावना प्राचीन काल में भारत आर्थिक दृष्टि से पूर्णत: सम्पन्न था । तभी तो > यह ‘ सोने की चिड़िया ‘ के नाम से विख्यात था । किन्तु, आज भारत आर्थिक दृष्टि > से विकासशील देशों की श्रेणी में है । आज यहाँ कुपोषण और बेरोजगारी है । > बेरोजगारी का अर्थ > काम करने योग्य इच्छुक व्यक्ति को कोई काम न मिलना । > बेरोजगारी का रूप > बेरोजगारी में एक वर्ग तो उन लोगों का है, जो अशिक्षित या अर्द्धशिक्षित हैं और > रोजी-रोटी की तलाश में भटक रहे हैं । दूसरा वर्ग उन बेरोजगारों का है जो शिक्षित > हैं, जिसके पास काम तो है, पर उस काम से उसे जो कुछ प्राप्त होता है, वह उसकी > आजीविका के लिए पर्याप्त नहीं है । बेरोजगारी की इस समस्या से शहर और गाँव दोनों > आक्रांत हैं । > बेरोजगारी का कारण > हमारे देश में बेरोजगारी की इस भीषण समस्या के अनेक कारण हैं । उन कारणों में > लॉर्ड मैकॉले की दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति, जनसंख्या की अतिशय वृद्धि, बड़े-बड़े > उद्योगों की स्थापना के कारण कुटीर उद्योगों का ह्रास आदि प्रमुख हैं । आधुनिक > शिक्षा प्रणाली में रोजगारोन्मुख शिक्षा व्यवस्था का सर्वथा अभाव है । इस कारण > आधुनिक शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों के सम्मुख भटकाव के अतिरिक्त और कोई चारा नहीं > रह गया है । बेरोजगारी की विकराल समस्या के समाधान के लिए कुछ राहें तो खोजनी ही > पड़ेगी । इस समस्या के समाधान के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए । > 'उपसंहार' > भारत में बेरोजगारी की समस्या का हल आसान नहीं है, फिर भी प्रत्येक समस्या का > समाधान तो है ही । इस समस्या के समाधान के लिए मनोभावना में परिवर्तन लाना > आवश्यक है । मनोभावना में परिवर्तन का तात्पर्य है – किसी कार्य को छोटा नहीं > समझना । > समास के उदा > > अव्ययीभाव कर्मधारय तत्पुरुष द्विगु द्वंद्व बहुव्रीहि > प्रतिदिन नीलकमल जलप्रपात चौमासा श्रद्धा-भक्ति वीणापाणी > भरपेट पीतांबर राजवंश नौरात्री होश-हवास धनश्याम > आजन्म नीलकंठ राजमहल सतसई देश-विदेश श्वेतांबर > बेखटके कनकलता सत्याग्रह त्रिधारा राम-लक्षण लंबोदर > यथासंभव चंद्रमुख ग्रंथकार पंचवटी सीता-राम चक्रपाणि > अनजाने मुखचंद्र गगनचुंबी त्रिवेणी पाप-पुण्य त्रिनेत्र > प्रत्येक करामल परलोकगमन शताब्दी सुबह-श्याम दशानन > प्रतिमाह सद्धर्म देशप्रेम चौराह सुख-दुख नीलकंठ > आमरण धरणीधर रेखांकित बारहमासा दाल-रोटी चतुरानन > संधि के उदा > > दीर्घ संधि शब्द गुण संधि शब्द वृधि संधि शब्द यण संधि शब्द अयादि संधि शब्द > पर्वतावली गजेंद्र एकैक अत्यधिक चयन > सहानुभूति परमेश्वर मतैक्य इत्यादि नयन > संग्रहालय महेंद्र सदैव प्रत्युपकार गायक > जलाशय रमेश महैश्वर्य मन्वंतर नायिका > समानाधिकार वार्षिकोत्सव परमौज स्वागत भवन > धर्मात्मा जलोर्मि वनौषध पित्रानुमति पावन > विद्यार्थी महोत्सव महौजस्वी पित्राज्ञा नाविक्क > विद्यालय महोर्मि महौषधि पित्रुपदेश नायक > कवींद्र सप्तर्षि हरेक अत्यंत सावन > गिरीश महर्षि तथैव अत्यानंद भावुक > महींद्र परोपकार महौज प्रत्येक पवित्र > रजनीश नरेंद्र नरैश्वर्य प्रत्युत्तर > लघूत्तर राकेश परमौषध अन्वय > सिंधूजा नरोत्तम मात्रादेश > वधूत्सव गंगोर्मि > भूर्जा महोदर > व्यंजन संधि शब्द विसर्ग संधि शब्द > दिग्गज तद्रूप निश्चय पुरोहित > सदवाणी सज्जन निष्कपट निश्चिंत > अजन्त सदाचार नीरस विस्तार > षड्दर्शन संशय दुर्गंध निस्संदेह > वाग्जाल संसार मनोरथ निर्मल > Contributed by : > RAJ KUMAR > GOVERNMENT HIGH SCHOOL > YELLODU GUDI BANDE (T) > CHIKKABALLAPURA > MOBILE NO:9449321475. > > -- > 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/forum/hindistf > Hindi KOER web portal is available on > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi > > 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has > Hindi interface also) > > 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions > > 4. If a teacher wants to join STF, visit > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member > > 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software > सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर > --- > You received this message because you are subscribed to the Google Groups > "HindiSTF" group. > To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an > email to [email protected]. > To post to this group, send an email to [email protected]. > Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf. > To view this discussion on the web, visit > https://groups.google.com/d/msgid/hindistf/8c560255-272b-4871-89a0-17998f0b7941%40googlegroups.com. > For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.
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