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On Mar 5, 2016 10:47 AM, "veeresh.arakeri" <[email protected]> wrote:
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> हिंदी कक्षा 10 सरल और महत्वपूर्ण प्रशन साथ में उत्तर
> Contents
> दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए।
>
> 1} सभी का मनोरथ कैसे पूर्ण होता है ?
> उत्तर :- दया दयानिधि )भगवान) की प्रार्थना करने से सभी का मनोरथ पूर्ण होता है।
> 2} प्रभु की दया को कौन दर्शा रही है ?
> उत्तर:- प्रभु की दया को चाँद, चाँदनी, सूरज तथा सागर की तरंगमालाएँ दर्शा रही 
> है।
> 3} रवींद्रनाथ जी ने ‘सर’ की उपाधि क्यों त्याग दी ?
> उत्तर :- 1919 में जलियाँवाला बाग के अमानुषिक हत्याकाण्ड से दुखित होकर 
> रवींद्रनाथ जी ने ‘सर’ की उपाधि त्याग दी ।
> 4} शांतिनिकेतन का आशय क्या था ?
> उत्तर :- शांतिनिकेतन का आशय यह था कि युवक-युवतियों की औपचारिक शिक्षा के 
> साथ-साथ प्रतिभा तथा कौशल की अभिव्यक्ति के लिए आवश्यक मंच का निर्माण करना ।
> 5} रवींद्र जी ने किन-किन विषयों पर लेख लिखे हैं ?
> उत्तर :- रवींद्र जी ने राजनीति, शिक्षा, धर्म, कला आदि विषयों पर लेख लिखे हैं ।
> 6} करोड़पति के होशहवास क्यों उड़ गए ?
> उत्तर:- नौकर ने कहा- “मालिक ! बाज़ार में एकदम कीमतें गिर गयीं। बहुत बड़ा घाटा 
> हुआ है, मालिक।” यह समाचार सुनकर करोड़पति के होशहवास उड़ गए ।
> 7} लोग क्या कहकर चीख रहे थे ?
> उत्तर :- लोग इस प्रकार चीख रहे थे कि- “अरे, अरे, बूढ़ा मोटर के नीचे कुचला 
> जाएगा, मर गया, मर गया ।
> 8} बूढ़े को किसने बचाया ? कैसे ?
> उत्तर :- बूढ़े को भिखारी ने बचाया। भिखारी बेतहाश भागते हुए गया और बूढ़े का 
> हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचते हुए बचाया ।
> 9} इंटरनेट का मतलब क्या है ?
> उत्तर :- इंटरनेट अनगिनत कंप्यूटरों के कई अंतर्जालों का, एक दूसरे से संबध 
> स्थापित करने का जाल है ।
> 10} व्यापार और बैंकिंग में इंटरनेट से क्या मदद मिलती है ?
> उत्तर :- इंटरनेट द्वारा घर बैठे-बैठे खरीदारी तथा कोई भी बिल भर सकते हैं । 
> इंटरनेट बैंकिंग द्वारा दिनिया की किसी भी जगह पर चाहे जितनी भी रकम भेजी जा 
> सकती है ।
> 11} ई-गवर्नेंस क्या है ?
> उत्तर:- ई-गवर्नेंस के द्वारा सरकार के सभी कामकाज का विवरण, अभिलेख, सरकारी 
> आदेश आदि को यथावत्‌ लोगों को सूचित किया जाता है।
> 12} भारत माँ के प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन कीजिए ।
> उत्तर:- भारत माँ के यहाँ हरे-भरे खेत, फल-फूलों से युत वन-उपवन तथा खनिजों का 
> व्यापक धन है। इस प्रकार प्राकृतिक सौंदर्य ने सबको मोह लिया है ।
> 13} मातृभूमि का स्वरूप कैसे सुशोभित है ?
> उत्तर :- मातृभूमि अमरों की जननी है। उसके ह्रदय में गाँधी, बुध्द और राम समायित 
> हैं। माँ के एक हाथ में न्याय पताका तथा दूसरे हाथ में ज्ञान दीप है। इस प्रकार 
> मातृभूमि का स्वरूप सुशोभित है ।
> 14} लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था ?
> उत्तर:- लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू लेखिका के पैर तक आकर सर्र 
> से परदे पर चढ़ जाता और फिर उसी तेजी से उतरता । उसका यह क्रम तब तक चलता, जब तक 
> लेखिका उसे पकड़ने के लिए न उठती ।
> 15} लेखिका ने गिल्लू के प्राण कैसे बचाये ?
> उत्तर :- लेखिका ने गिलहरी को हौले से उठाकर कमरे में लाया, फिर रुई से रक्त 
> पोंछकर घावों पर पेंसिलिन का मरहम लगाया। कई घंटे के उपचार के बाद उसके मुँह में 
> एक बूँद पानी टपकाया जा सका।
> 16} गिल्लू ने लेखिका की गैरहाजरी में दिन कैसे बिताये ?
> उत्तर :- गिल्लू लेखिका की गैरहाजरी में उदास रहता था। अपना प्रिय खाद्य काजू कम 
> खाता था। लेखिका के घर आने तक गिल्लू अकेलापन महसूस कर रहा था ।
> 17} छलनी से क्या-क्या कर सकते हैं ?
> उत्तर:- छलनी से दूध छान सकते हैं । इसके अलावा चाय भी छान सकते हैं ।
> 18} बसंत राजकिशोर से दो पैसे लेने से क्यों इनकार करता है ?
> उत्तर:- बसंत एक स्वाभिमानी लड़का था । वह मुफ्त में पैसे लेने को भीख समझता था। 
> इसलिए बसंत राजकिशोर से दो पैसे लेने से इनकार करता है ।
> 19} प्रताप राजकिशोर के घर क्यों आया ?
> उत्तर:- बसंत राजकिशोर द्वारा दिये गए नोट को भुनाकर वापस आते समय मोटर के नीचे 
> आ गया । इससे उसके दोनो पैर कुचले गये । इसलिए वह नहीं लौटा । छुट्टे पैसे वापस 
> देने के लिए प्रताप राजकिशोर के घर आया ।
> 20} कर्नाटक की प्रमुख नदियाँ और जलप्रपात कौन-कौन-से हैं ?
> उत्तर :- कर्नाटक की प्रमुख नदियाँ है- कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा आदि । कर्नाटक 
> के प्रमुख जलप्रपात है- जोग, अब्बी, गोकाक, शिवनसमुद्र आदि ।
> 21} कर्नाटक के किन सहित्यकारों को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त है ?
> उत्तर :- कर्नाटक के निम्न साहित्यकरों को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त है- 
> कुवेंपु, द.रा. बेंद्रे, शिवराम कारंत, मास्ति वेंकटेश अय्यंगार, वि.कृ.गोकाक, 
> यू.आर.अनंतमूर्ति, गिरिश कार्नाड तथा चंद्रशेखर कंबार।
> 22} बेंगलूरु में कौन-कौन-सी बृहत् संस्थाएँ है ?
> उत्तर :- बेंगलूरु में भारतीय विज्ञान संस्थान, एच.ए.एल., एच.एम.टी., आई.टी.आई., 
> बी.एच.ई.एल., बी.ई.एल., जैसी बृहत संस्थाएँ हैं ।
> 23} भीष्म साहनी जी अन्य बालकों से क्यों जलते थे ?
> उत्तर :- भीष्म साहनी बचपन में बीमारी के कारण खाट पर लेटे रहते थे । ऐसे में 
> स्वस्थ, हँसते – खेलते लड़कों की तुलना में अपने को छोटा और असमर्थ समझकर उन 
> बालकों से जलते थे ।
> 24} अंग्रेजी अध्यापक से भीष्म साहनी को कैसी प्रेरणा मिली ?
> उत्तर :- अंग्रेजी अध्यापक ने भीष्म साहनी जी को दकियानूसि, संकीर्ण, घुटन भरे 
> वातावरण में से बाहर निकाल लिया । उन्ही के प्रभाव से साहनी जी सहित्य-रचना में 
> कलम आजमाई करने लगे ।
> 25} साहनी जी ने किस उद्देश्य से खादी पहनना शुरू किया ?
> उत्तर :- साहनी जी आंदोलन के दिनों में कुर्ता – पैजामा पहन कर सड़को पर घूमते 
> थे । मन ही मन में उम्मीद कर रहे थे कि पुलिसवाले उनके पहनावे को देखकर सरकार के 
> खिलाफ विद्रोह मानकर गिरफ्तार कर लेंगे । गिरफ्तार होना ही साहनी जी का उद्देश्य 
> था पर ऐसा नहीं हुआ ।
> 26} फूल मालाएँ मिलने पर लेखक क्या सोचने लगे ?
> उत्तर :- लेखक को लगभग दस बड़ी फूल-मालाएँ पहनायी गयीं । उन्होंने सोचा, आस-पास 
> कोई माली होता तो फूल-मालाएँ भी बेच लेता ।
> 27} लेखक ने मंत्री को क्या समझाया ?
> उत्तर :- लेखक ने मंत्री को समझाया की -“ऐसा हरगिज मत करिये । ईमानदारों के 
> सम्मेलन में पुलिस ईमानदारों की तलाशी ले, यह बड़ी अशोभनीय बात होगी। फिर इतने 
> बड़े सम्मेलन में थोड़ी गड़बड़ी होगी ही।”
> 28} चप्पलों की चोरी होने पर ईमानदार डेलिगेट ने क्या सुझाव दिया ?
> उत्तर :- डेलिगेट ने सुझाव दिया कि –“देखिए, चप्पलें एक जगह नहीं उतारना चिहिए । 
> एक चप्पल यहाँ उतारिये, तो दूसरी दस फीट दूर। तब चप्पलें चोरी नहीं होतीं। एक ही 
> जगह जोड़ी होगी, तो कोई भी पहन लेगा । मैंने ऐसा ही किया था।”
> 29} मुख्य अतिथि की बेईमानी कहाँ दिखाई देती है ?
> उत्तर :- मुख्य अतिथि ने ईमानदार डेलिगेट की फटी – पुरानी चप्पलें बिना बताए पहन 
> ली थी। इससे पहले वे सोचते थे कि दूसरे दर्जे में यात्रा कर के पहले दर्जे का 
> किराया वसूल कर लिया जाए और स्वागत में पहनायी गयी दस फूल-मालाओं को किसी माली 
> को बेच लेता ।
> 30} ‘प्रकृति पर सर्वत्र है विजयी पुरुष आसीन’ – इस पंक्ति का आशय समझाइए ।
> उत्तर :- इस पंक्ति का आशय है कि- आज के मानव ने प्रकृति के हर तत्व पर (आकाश, 
> पाताल, धरती) विजय प्राप्त कर ली है। अर्थात प्रकृति को अपने नियंत्रण में रखा 
> है ।
> 31} दिनकर जी के अनुसार मानव का सही परिचय क्या है ?
> उत्तर :- दिनकर जी के अनुसार जो मानव आपस में भाई-चारा बढ़ाये तथा दूसरे मानव से 
> प्रेम का रिश्ता जोड़कर आपस की दूरी को मिटाए वही सच्चा ज्ञानी, विदवान एवं मानव 
> कहलाने का अधिकारी है ।
> 32} अभिनव मनुष्य कविता का दूसरा कौन-सा शीर्षक हो सकता है ? क्यों ?
> उत्तर :- इस कविता का दूसरा शीर्षक हो सकता है – ‘प्रकृति पुरुष’। क्योंकि 
> मनुष्य ने लगभग प्रकृति के हर तत्व पर अपने प्रयासों से विजय प्राप्त कर ली है ।
> 33} तिम्मक्का दंपति किस प्रकार के धर्म-कार्य में लग गये ?
> उत्तर :- तिम्मक्का दंपति के गाँव के पास श्रीरंगस्वामी का मंदिर था, जहाँ हर 
> साल मेला लगता था। वहाँ आनेवाले जानवरों के लिए उन्होंने पीने के पानी का 
> ईंतज़ाम करते हुए वे धर्म-कार्य में लग गये ।
> 34} तिम्मक्का के जीवन में कैसी मुसीबत आ गई ?
> उत्तर :- तिम्मक्का के पति की तबीयत खराब हो गई। चिक्कय्या को भीख माँगने की 
> स्थिति आ गई। उन्हें कभी पैसे मिलते तो कभी गालियाँ सुननी पडती थी। ऐसी हालत में 
> चिक्कय्या चल बसे। तिम्मक्का अब अकेली पड गई।
> 35} तिम्मक्का ने क्या संकल्प किया है ?
> उत्तर :- तिम्मक्का ने अपने पति की याद में हुलिकल ग्राम में गरीबों की नि:शुल्क 
> चिकित्सा के लिए एक अस्पताल के निर्माण कराने का संक्ल्प किया है।
> 36} मुखिया को मुख के समान होना चाहिए। कैसे?
> उत्तर :- जिस प्रकार मुँह खाने-पीने का काम अकेला करता है और उससे ही शरीर के 
> सारे अंगों का पालन-पोषण होता है। उसी प्रकार मुखिया को विवेकवान होकर सबके हित 
> में काम करना चाहिए ।
> 37} मनुष्य के जीवन में प्रकाश कब फैलता है ?
> उत्तर :- राम नाम को जपने से मानव की आंतरिक और बाह्य शुध्दि होती है, ऐसे करने 
> से मनुष्य के जीवन में चारों ओर प्रकाश फैलता है ।
> 38} कृष्ण बलराम के साथ खेलने क्यों नहीं जाना चाहता?
> उत्तर :- बलराम कृष्ण को बहुत चिढ़ाता है। वह कहता है कि तुम्हें यशोदा माँ ने 
> जन्म नहीं दिया है बल्कि मोल लिया है। इसी गुस्से के कारण कृष्ण उसके साथ खेलने 
> नहीं जाना चाहता।
> 39} कृष्ण अपनी माता यशोदा के प्रति क्यों नाराज़ है?
> उत्तर :- कृष्ण अपनी माता यशोदा से इसलिए नाराज़ है कि वह केवल कृष्ण को ही 
> मारती है और बड़े भाई बलराम को गुस्सा तक नहीं करती।
> 40} डॉ. कंबार जी को प्राप्त किन्हीं चार पुरस्कारों के नाम लिखिए।?
> उत्तर :- पंप प्रशस्ति, मास्ति प्रशस्ति, कबीर सम्मन तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार।
> 41} डॉ. कंबार जी को लोक साहित्य में रूचि कैसे उत्पन्न हुई ?
> उत्तर :- जन्म से ही पौराणिक प्रसंगों को मन लगाकर सुनना तथा सामान्य जनता के 
> जीवन में भी अधिक दिलचस्पी लेने के कारण, डॉ. कंबार जी को लोक साहित्य में रूचि 
> उत्पन्न हुई ।
> 42} राष्ट्रभाषा हिंदी के बारे में डॉ. कंबार जी के क्या विचार हैं ?
> उत्तर :- राष्ट्रभाषा हिंदी के बारे में डॉ. कंबार जी के विचार इस प्रकार है कि- 
> हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। राष्ट्र में एकता लाने के लिए हिंदी भाषा अत्यंत 
> उपयोगी है । आजकल यह संपर्क भाषा के रूप में प्रचलित है। हमें आपसी व्यवहार के 
> लिए हिंदी सीखना जरूर है।
> 43} शनि का निर्माण किस प्रकार हुआ है ?
> उत्तर:- बृहस्पति की तरह शनि का वायुमंडल भी हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन तथा 
> एमोनिया गैसों से बना है। शनि के सतह के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। हम 
> केवल इसके चमकीले बाहरी वायुमंडल को ही देख सकते हैं।
> 44} सत्य क्या होता है ? उसका रूप कैसे होता है ?
> उत्तर:- सत्य ! बहुत भोला-भाला, बहुत ही सिधा-साधा ! जो कुछ भी अपनी आँखों से 
> देखा, बिना नमक-मिर्च लगाए बोल दिया – यही तो सत्य है। कितना सरल ! सत्य दृष्टि 
> का प्रतिबिंब है, ज्ञान की प्रतिलिपि है, आत्मा की वाणी है।
> 45} झूठ का सहारा लेते हैं तो क्या-क्या करना पड़ता है ?
> उत्तर :- झूठ का सहारा लेते हैं तो एक झूठ साबित करने के लिए हजारों झूठ बोलने 
> पड़ते हैं । और, कहीं पोल खुली, तो मुँह काला करना पड़ता है, अपमानित होना पड़ता 
> है।
> 46} माहात्मा गाँधी के सत्य की शक्ति के बारे में क्या कथन है ?
> उत्तर :- उनका कथन है कि- “सत्य एक विशाल वृक्ष है। उसका जितना आदर किया जाता 
> है, उतने ही फल उसमें लगते हैं। उनका अंत नहीं होता ।”
> 47} हर स्थिति में सत्य बोलने का अभ्यास क्यों करना चाहिए ?
> उत्तर :- सत्य वह चिनगारी है जिससे असत्य पल भर में भस्म हो जाता है । अत: हमें 
> हर स्थिति में सत्य बोलने और पालन करने का अभ्यास करना चाहिए ।
> 48} ‘समय’ को अमूल्य क्यों माना जाता है ?
> उत्तर :- समय को इसलिए अमूल्य माना जाता है कि- समय के नष्ट हो जाने से जीवन भी 
> विनष्ट हो जाता है। खोया हुआ समय बार-बार नहीं आता।
> 49} ‘समय का सदुपयोग’ से क्या तात्पर्य है ?
> उत्तर :- समय का सदुपयोग इसका अर्थ है- ‘सही समय पर सही काम करना।’ उपयुक्त समय 
> पर अपना काम निपटाना’ । समय कभी रुकता नहीं, अत: सबको उसके साथ-साथ चलकर उसका 
> सदुपयोग कर लेना चाहिए ।
> 50} हमें किसका आदर करना चाहिए ?
> उत्तर:- हम सब को समय की गंभीरता को समझते हुए उसका आदर करना चाहिए।
> भावार्थ
>
> १}जो तेरी होवे दया दयानिधि तो पूर्ण होते सबके मनोरथ
> सभी ये कहते पुकार करके
> यही तो आशा दिला रही है!
> भावार्थ:- 
> उपर्युक्त पंक्तियों को कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘प्रभो!’ नामक कविता भाग 
> से लिया गया है। भगवान की दया मानव के जीवन पर किस प्रकार पड रही है, इसके बारे 
> में प्रकाश डालते हुए कावि लिखते हैं कि - हे दयानिधि ! यदि आपकी दया हम पर रही 
> तो हमारी पूरी मनोकामनाएँ पूर्ण हो आती हैं। इसलिए प्रभो! सभी ये कहते हुए, आपके 
> प्रति आशा रखते हुए प्रार्थना कर रहे हैं।
>
> २} एक हाथ में न्याय-पताका, ज्ञान-दीप दूसरे हाथ में,
> जग का रुप बदल दे, हे माँ,
> कोटि-कोटि हम आज साथ में ।
> गूँज उठे जय-हिंद नाद से – 
> सकल नगर और ग्राम,
> मातृ-भू, शत-शतब बार प्रणाम ।
> भावार्थ:-
> उपर्युक्त पंक्तियों को कवि भगवतीचरण वर्मा द्वारा रचित ‘मातृभूमि’ नामक कविता 
> भाग से लिया गया है।कवि भारत माता की न्यायनिष्टा, ज्ञानशक्ति तथा महानता के 
> बारे में बताते हुए इस प्रकार लिखते हैं कि – हे भारत माता ! तेरे एक हाथ में 
> न्याय की पताका तो दुसरे हाथ में ज्ञान का दीपक है।अब तू संसार का रूप बदल दे 
> माँ! आज हम करोड़ों भारतवासी तुम्हारे साथ हैं। हे मा ! पूरे देश के गाँव-गाँव 
> तथा नगर-नगर में ‘जय-हिंद’ का नाद गूँज उठे यही हमारी आशा है। भारत माता तुम्हे 
> सौ-सौ बार प्रणाम।
>
> ३} मुखिया मुख सों चाहिए, खान पान को एक।
> पालै पोसै सकल अँग, तुलसी सहित विवेक।।
> भावार्थ:- 
> प्रस्तुत दोहे को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'तुलसी के दोहे' नामक कविता भाग 
> से लिया गया है। कवि ने मुख अर्थात् मुँह और मुखिया दोनों के स्वभाव की समानता 
> दर्शाते हुए लिखते हैं कि- जिस प्रकार मुँह खाने-पीने का काम अकेला करता है और 
> उससे ही शरीर के सारे अंगों का पालन-पोषण होता है। उसी प्रकार मुखिया को 
> विवेकवान होकर सबके हित में काम करना चाहिए ।
>
> ४}तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक।
> साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसो एक।।
> भावार्थ:- 
> प्रस्तुत दोहे को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'तुलसी के दोहे' नामक कविता भाग 
> से लिया गया है। कवि ने मनुष्य पर जब विपत्ति आती हैं तो हमें किस तरह इस 
> विपत्ति से बच सकते हैं? इसके बारे में बताते हुए लिखते हैं कि- जब मनुष्य पर 
> संकट आता है तो तब विद्या, विनय और विवेक ही उसका साथ निभाते हैं। जो व्यक्ति 
> राम पर भरोसा करता है, वह साहसी, सत्यव्रती और सुकृतवान बनता है।
> व्याकरण
>
> मुहावरे
>
> 1. होश-हवास उड़ना – घबरा जाना
> 2. बाल-बाल बचना – खतरे से बच जाना
> 3. सातवें आसमान पर पहुँचाना – अधिक क्रोधित होना
> 4. श्री गणेश करना – प्रारंभ करना
> 5. नौ दो ग्यारह होना – भाग जाना
> 6. आँखे लाल होना – गुस्सा बढ़ना
> 7. घोड़े बेचकर सोना – निश्चिंत होना
> 8. चूँ तक न करना – कुछ भी न बोलना
> 9. पसीना बहाना – परिश्रम करना
> 10. हिम्मत न हारना – धीरज रखना
> 11. बीड़ा उठाना – जिम्मेदारी लेना
> 12. चने के झाड़ पर चढ़ाना – झूठमूठ की प्रशंसा करना
> 13. घाट-घाट का पानी पीना – बहुत अनुभव पाना
> 14. शुक्रिया अदा करना – धन्यवाद देना
> 15. नाक में दम करना – अधिक तंग करना
> 16. आँखों में धूल झोंकना – धोखा देना
> 17. अंगारे उगलना – क्रोध में कठोर वचन बोलना
> 18. आग बबूला होना – अधिक क्रोधित होना
> 19. आसमान सिर पर उठाना – शोर करना
> 20. कमर कसना – तैयार होना
> 21. खून पसिना एक करना – बहुत मेहनत करना
> 22. छक्के छुड़ाना – बुरी तरह हराना
> 23. दाल न गलना – सफल न होना
> 24. फूला न समाना – अत्यंत प्रसन्न होना
> 25. उँगली पर नचाना – वश में रखना
> 26. आँखें खुलना – होश आना 
> विराम चिह्‍न
>
> 1. अल्प विराम.........................(,)
> 2. अर्ध विराम...........................(;)
> 3. पूर्ण विराम...........................(।)
> 4. प्रश्न चिह्‍न..........................(?)
> 5. विस्मयादिबोधक चिह्‍न..........(!)
> 6. योजक चिह्‍न........................(-)
> 7. उध्दरण चिह्‍न.......................(“ ”) (‘ ’)
> 8. कोष्ठक चिह्‍न.......................( )
> 9. विवरण चिह्‍न.......................( :- ) ( : )
> कारक
>
> 1. कर्ता कारक – (ने) क्रिया करनेवाले का बोध।
> 2. कर्म कारक – (को) क्रिया का फल भोगनेवाले का बोध।
> 3. करण कारक – (से) सहायता देनेवाले साधन का बोध।
> 4. संप्रदान कारक – (के लिए, के द्वारा, के वास्ते) क्रिया का उद्देश्य या 
> प्रयोजन का बोध।
> 5. अपादान कारक – (से) अलगाव का बोध।
> 6. संबंध कारक – (का, के, की) संबंध का बोध।
> 7. अधिकरण कारक – (में, पर) क्रिया के होने का स्थान या समय का बोध।
> 8. संबोधन कारक – (अरे, हे, ओ, वाह) संज्ञा को पुकारने का भाव।
> विलोम शब्द
>
> बड़ा X छोटा
> प्रसिध्द X अप्रसिध्द
> औपचारिक X अनौपचारिक
> आरंभ X अंत 
> पूर्व X पश्चिम 
> निकट X दूर
> पाप X पुण्य 
> निराशा X आशा 
> स्वीकार X अस्विकार
> होश X बेहोश 
> दुरुपयोग X सदुपयोग 
> स्थिर X अस्थिर
> बढ़ना X घटना 
> वरदान X अभिशाप 
> मुमकिन X नामुमकिन
> दिन X रात 
> भीतर X बाहर 
> अनुपयुक्त X उपयुक्त
> चढ़ना X उतरना 
> प्रिय X अप्रिय 
> उपयोगी X अनुपयोगी
> खबर X बेखबर 
> संतोष X असंतोष 
> स्वस्थता X अस्वस्थता 
> ईमान X बेईमान 
> उचित X अनुचित 
> उपस्थिति X अनुपस्थिति
> उत्तीर्ण X अनुत्तीर्ण 
> विश्वास X अविश्वास 
> रोज़गार X बेरोजगार
> पीछे X आगे 
> खरीदना X बेचना 
> शांति X अशांति
> लेना X देना 
> आना X जाना 
> गरीब X अमीर
> सुंदर X कुरुप 
> विदेश X स्वदेश 
> आदि X अंत, अनादि
> सजीव X निर्जीव 
> आयात X निर्यात 
> सदाचार X दुराचार
> जवाब X सवाल 
> सज्जन X दुर्जन 
> आगमन X निर्गमन
> जन्म X मरण 
> आसान X कठिन 
> अपना X पराया
> छोटे X बड़े 
> माता X पिता 
> बैल X गाय
> हाथी X हाथिनि 
> बाप X माँ 
> अँधकार X प्रकाश
> आय X व्यय 
> आगे X पीछे 
> अमृत X विष
> जय X पराजय 
> आधार X निराधार 
> परतंत्र X स्वतंत्र
> सफल X विफल 
> चल X अचल 
> आदर X अनादर
> सुख X दुख 
> लिखित X अलिखित 
> आवश्यक X अनावश्यक
> अन्य वचन
>
> परिवार - परिवार
> घर - घर 
> लोग - लोग 
> कहानी - कहानियाँ 
> कला – कलाएँ 
> कविता – कविताएँ योजना - योजनाएँ 
> उपाधि - उपाधियाँ 
> पत्र – पत्र
> उड़ान - उड़ानें 
> आँखें - आँख 
> रुपया – रुपये
> पैसे - पैसा 
> हाथ - हाथ 
> रोटी - रोटियाँ
> परदा – परदे 
> कमरा – कमरे 
> दायरा – दायरे
> जगह – जगहें 
> किताब – किताबें 
> कोशिश – कोशिशें
> दोस्त - दोस्त 
> कंप्यूटर – कंप्यूटर 
> रिश्तेदार – रिश्तेदार
> जानकारी – जानकारियाँ 
> चिट्‍ठी - चिट्‍टियाँ 
> जीवनशैली – जीवनशैलियाँ
> उँगली – उँगलियाँ 
> पूँछ – पूँछें 
> खिड़की - खिड़कियाँ
> फूल - फूल 
> पंजा - पंजे 
> लिफाफा - लिफाफे
> कौआ – कौए
> गमला – गमले
> घोंसला - घोंसले
> मूर्ति - मूर्तियाँ
> उपलब्दि – उपलब्दियाँ 
> कृति - कृतियाँ
> नीति – नीतियाँ 
> संस्कृति – संस्कृतियाँ 
> पद्‍धति – पद्‍धतियाँ
> कपड़ा – कपड़े 
> चादर - चादरें 
> बात – बातें
> डिब्बा – डिब्बे 
> चीज़ - चीज़ें 
> व्यवस्था – व्यवस्थाएँ
> सेवा - सेवाएँ 
> पक्षी - पक्षी 
> बच्चा - बच्चे 
> अन्य लिंग रुप
>
> कवि – कवयित्री
> लेखक – लेखिका 
> युवक – युवती 
> मोर – मोरनी 
> मालिक – मालकिन 
> भिखारी – भिखारिन
> बच्चा – बच्ची 
> बालक – बालिका 
> बूढ़ा – बुढ़िया 
> श्रीमान – श्रीमती
> मयूर – मयूरी 
> नौकर – नौकरानी 
> कुत्ता – कुतिया 
> पति – पत्नी 
> पिता – माता 
> माँ – बाप 
> महिला – पुरुष
> छात्र – छात्रा 
> आचार्य – आचार्या 
> देव – देवी
> नाना – नानी 
> बेटा – बिटिया 
> सुनार – सुनारिन 
> आदमी – औरत
> नाई – नाइन 
> ठाकुर – ठकुराईन 
> हलवाई – हलवाईन 
> शेर – शेरनी 
> महान – महती 
> भाग्यवान – भाग्यवती 
> स्वामी – स्वामिनी 
> सेठ – सेठानी 
> दाता – दात्री 
> विधाता – विधात्री 
> नर – मादा 
> सेवक – सेविका 
> पर्यायवाची शब्द
>
> सागर – समुद्र – जलधि – अंबुधि
> आगार – मकान – घर – गृह
> जल – पानी – अंबु – नीर
> आकाश – आसमान – गगन – नभ
> गात – शरीर – देह
> आहार – खाना – भोजन
> विस्मय – अचरज – आश्चर्य
> हिम्मत – धैर्य – साहस
> खोज – तलाश – ढूँढ़ 
> शाम – संध्या – संध्याकाल
> माल – समान – चीज़ 
> दुनिया – संसार – जगत
> बोझ – वजन – भार
> उम्मीद – आशा – भरोसा 
> पेड़ – वृक्ष – तरु
> पक्षी – चिड़िया – पंखेरु
> महिला – स्त्री – नारी 
> तबीयत – स्वास्थ्य – सेहत
> आदमी – पुरुष – नर
> आयु – उम्र
> विपुल – बहुत 
> स्फूर्ति – उत्साह
> संपदा – संपत्ति
> हलचल – गतिविधि
> तालीम – शिक्षा 
> विद्रोह – क्रांति
> दफ्तर – कार्यालय
> प्रेरणार्थक क्रिया रुप
>
> पढ़ना – पढ़ाना – पढ़वाना
> सुनना – सुनाना – सुनवाना
> लिखना – लिखाना – लिखवाना
> समझना – समझाना – समझवाना
> करना – कराना – करवाना
> देना – दिलाना – दिलवाना
> उठना उठाना – उठवाना
> पकड़ना – पकड़ाना – पकड़वाना
> चलना – चलाना –चलवाना
> बैठना – बिठाना – बिठवाना
> मिलना – मिलाना – मिलवाना
> ठहरना – ठहराना – ठहरवाना
> छेड़ना – छिड़ाना – छिड़वाना
> धोना – धुलाना – धुलवाना
> भेजना – भिजाना – भिजवाना 
> देखना – दिखाना – दिखवाना
> रोना – रुलाना – रुलवाना 
> लौटना – लौटाना – लौटवाना
> धोना – धुलाना – धुलवाना 
> उतरना – उतारना – उतारवाना
> सीना – सिलाना – सिलवाना
> पहनना – पहनाना – पहनवाना
> बनना – बनाना – बनवाना 
> जागना – जगाना – जगवाना
> हँसना – हँसाना – हँसवाना 
> जीतना – जिताना – जितवाना
> उड़ना – उड़ाना – उड़वाना
> खेलना – खिलाना – खिलवाना
> दौड़ना – दौड़ाना – दौड़वाना 
> ओढ़ना – ओढ़ाना – ओढ़वाना
>
> कन्नड में अनुवाद
>
> 1. उनका परिवार सांस्कृतिक नेतृत्व के लिए समस्त बंगाल में प्रसिध्द था।
> ಅವರ ಕುಟುಂಬ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕ ನೇತೃತ್ವಕ್ಕಾಗಿ ಸಂಪೂರ್ಣ ಬಂಗಾಳದಲ್ಲಿ ಪ್ರಸಿದ್ದವಿತ್ತು.
> 2. छोटी आयु में उन्होंने अपने पिता की संपदा का भार संभाला।
> ಚಿಕ್ಕ ವಯಸ್ಸಿನಲ್ಲಿಯೇ ಅವರು ತನ್ನ ತಂದೆಯ ಆಸ್ತಿಯ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯನ್ನು ವಹಿಸಿಕೊಂಡರು.
> 3. महात्माजी उनसे अत्यंत प्रभावित थे।
> ಮಹಾತ್ಮರು ಅವರಿಂದ ತುಂಬಾ ಪ್ರಭಾವಿತರಾಗಿದ್ದರು.
> 4. हम यह कह सकते हैं कि रवींद्र जी का अंग्रेजी साहित्य में उच्च स्थान है।
> ಆಂಗ್ಲ ಸಾಹಿತ್ಯದಲ್ಲಿ ರವೀಂದ್ರರವರಿಗೆ ಉನ್ನತ ಸ್ಥಾನವಿದೆ ಎಂದು ನಾವು ಹೇಳಬಹುದು.
> 5. ‘गीतांजलि’ का एक-एक गीत भावों से परिपूर्ण है।
> ‘ಗೀತಾಂಜಲಿಯ’ ಒಂದೊಂದು ಹಾಡುಗಳು ಭಾವಗಳಿಂದ ಪರಿಪೂರ್ಣವಾಗಿವೆ.
> 6. साहूकार की एक आलीशान कोठी थी।
> ಸಾಹುಕಾರನು ಒಂದು ಭವ್ಯ ಬಂಗಲೆಯನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದನು.
> 7. करोड़पति के कार्यक्रम में कभी कोई अंतर नहीं आता था।
> ಕೋಟ್ಯಾಧೀಶನ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ಎಂದೂ ಯಾವ ವ್ಯತ್ಯಾಸವು ಆಗುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ.
> 8. भगवान से उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
> ದೇವರಿಂದ ಅವನಿಗೆ ಯಾವ ಪ್ರತಿಕ್ರಿಯೆಯೂ ಸಿಗಲಿಲ್ಲ.
> 9. रास्ते में भिखारी को एक छोटा लड़का मिला।
> ದಾರಿಯಲ್ಲಿ ಭಿಕ್ಷುಕನಿಗೆ ಒಬ್ಬ ಚಿಕ್ಕ ಬಾಲಕ ಭೇಟಿಯಾದ.
> १०. भिखारी के रुप में आकर तुम ही ने मेरी रक्षा की।
> ಭಿಕ್ಷುಕನ ರೂಪದಲ್ಲಿ ಬಂದು ನೀನೇ ನನ್ನನ್ನು ರಕ್ಷಿಸಿದೆ.
> ११. इंटरनेट आधुनिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण अंग बन गया है। 
> ಅಂತರ್ಜಾಲ ಆಧುನಿಕ ಜೀವನಶೈಲಿಯ ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ಅಂಗವಾಗಿಬಿಟ್ಟಿದೆ.
> १२. इंटरनेट द्वारा घर बैठे-बैठे खरीदारी कर सकते हैं।
> ಅಂತರ್ಜಾಲದ ಮುಲಕ ಮನೆಯಲ್ಲಿಯೇ ಕುಳಿತುಕೊಂಡು ಖರೀದಿ ಮಾಡಬಹುದು.
> १३. इंटरनेट की सहायता से बेरोज़गारी को मिटा सकते हैं।
> ಅಂತರ್ಜಾಲದ ಸಹಾಯದಿಂದ ನಿರುದ್ಯೋಗ ನಿರ್ಮೂಲನೆ ಮಾಡಬಹುದು.
> १४. कई घंटे के उपचार के उपरांत मुँह में एक बूँद पानी टपकाया।
> ಹಲವು ಗಂಟೆಗಳ ಆರೈಕೆಯ ನಂತರ ಬಾಯಿಯಲ್ಲಿ ಒಂದು ಹನಿ ನೀರನ್ನು ಹಾಕಲಾಯಿತು.
> १५. इतने छोटे जीव को घर में पले कुत्ते-बिल्लियों से बचाना भी एक समस्या ही थी।
> ಇಷ್ಟೊಂದು ಚಿಕ್ಕ ಜೀವಿಯನ್ನು ಮನೆಯಲ್ಲಿಯೇ ಸಾಕಿದ ನಾಯಿ-ಬೆಕ್ಕುಗಳಿಂದ ಕಾಪಾಡುವುದು ಒಂದು 
> ಸಮಸ್ಯ ಆಗುತ್ತು.
> १६. दिन भर गिल्लू ने न कुछ खाया, न बाहर गया।
> ದಿನವಿಡೀ ಗಿಲ್ಲು ಏನೂ ತಿನ್ನಲಿಲ್ಲ ಹಾಗೂ ಹೊರಗು ಹೋಗಲಿಲ್ಲ.
> १७. गिल्लू मेरे पास रखी सुराही पर लेट जाता था।
> ಗಿಲ್ಲು ನನ್ನ ಬಳಿ ಇಟ್ಟಿದ್ದ ನೀರಿನ ಹೂಜಿ ಮೇಲೆ ಮಲಗಿ ಬಿಡುತ್ತಿತ್ತು.
> १८. हम आपको आने-जाने के पहले दर्जे का किराया देंगे।
> ನಾವು ತಮಗೆ ಹೋಗಿ ಬರುವುದಕ್ಕಾಗಿ ಮೊದಲ ದರ್ಜೆಯ ಬತ್ತೆಯನ್ನು ಕೊಡುತ್ತೇವೆ.
> १९. स्टेशन पर मेरा खूब स्वागत हुआ।
> ಸ್ಟೇಷನ್ ನಲ್ಲಿ ನನಗೆ ಬಹಳನೇ ಸ್ವಾಗತ ಮಾಡಲಾಯಿತು.
> २०. देखिए, चप्पले एक जगह नहीं उतारना चाहिए।
> ನೋಡಿ ಚಪ್ಪಲಿಗಳನ್ನು ಒಂದೇ ಜಾಗದಲ್ಲಿ ಬಿಡಬಾರದು.
> २१. अब मैं बचा हूँ। अगर रुका तो मैं ही चुरा लिया जाऊँगा।
> ಈಗ ನಾನು ಉಳಿದುಕೊಂಡಿದ್ಡೇನೆ. ಒಂದು ವೇಳೆ ಇಲ್ಲೇ ಉಳಿದುಕೊಂಡರೆ ನನ್ನನ್ನು ಸಹ ಕಳವು 
> ಮಾಡಲಾಗುತ್ತದೆ.
> २२. अपना दत्तक पुत्र खोकर तिम्मक्का बहुत दु:खी हुई।
> ತನ್ನ ದತ್ತು ಮಗನನ್ನು ಕಳೆದುಕೊಂಡು ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಬಹಳ ದು:ಖಿತಳಾದಳು.
> २३. उन्हें अपने बच्चों की तरह प्रेम से पाला-पोसा।
> ಅವುಗಳನ್ನು ತನ್ನ ಮಕ್ಕಳಂತೆ ಪ್ರೀತಿಯಿಂದ ಸಾಕಿ ಬೆಳೆಸಿದಳು.
> २४. तिम्मक्का के जीवन में मुसीबत की घड़ियाँ शुरू हुईं।
> ತಿಮ್ಮಕ್ಕನ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ತೊಂದರೆಗಳ ಕಾಲ ಪ್ರಾರಂಭವಾಯಿತು.
> २५. तिम्मक्का ने अब तक सैकड़ों पेड़ लगाये हैं।
> ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಇಲ್ಲಿಯವರೆಗೆ ಸೂಮಾರು ಮರಗಳನ್ನು ನೆಟ್ಟಿದ್ದಾಳೆ.
> २६. पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ तिम्मक्का सामाजिक कार्य भी कर रही हैं।
> ಪರಿಸರ ಸಂರಕ್ಷಣೆಯೊಂದಿಗೆ ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಸಮಾಜಿಕ ಕಾರ್ಯಗಳು ಕೆಲಸಗಳನ್ನು ಸಹ ಮಾಡುತಿದ್ದಾರೆ.
> २७. डॉ. कंबार जी कन्नड नाटक तथा काव्य क्षेत्र के शिखरपुरुष हैं।
> ಡಾ. ಕಂಬಾರರವರು ಕನ್ನಡ ನಾಟಕ ಹಾಗೂ ಕಾವ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಶಿಖರಪುರುಷರಾಗಿದ್ದಾರೆ.
> २८. मुझमें पढ़ाई की इच्छा तीव्र होने के कारण मैं गोकाक में पढ़ाई करने में 
> कामयाब हुआ।
> ನನಗೆ ಓದಬೇಕೆಂಬ ಆಸಕ್ತಿ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದ್ದ ಕಾರಣ ನಾನು ಗೋಕಾಕ್‍ನಲ್ಲಿ ವಿದ್ಯಾಭ್ಯಾಸ 
> ಮಾಡುವದರಲ್ಲಿ ಯಶಸ್ವಿನಾದೆ.
> २९. मैं शुरू से ही पौराणिक प्रसंगों को मन लगाकर सुनता था।
> ನಾನು ಪ್ರಾರಂಬದಿಂದಲೇ ಪೌರಾಣಿಕ ಪ್ರಸಂಗಗಳನ್ನು ಗಮನವಿಟ್ಟು ಕೇಳುತ್ತಿದ್ದೆ.
> ३०. हमें आपसी व्यवहार के लिए हिंदी सीखना ज़रूरी है।
> ನಮಗೆ ಪರಸ್ಪರ ವ್ಯವಹಾರಕ್ಕಾಗಿ ಹಿಂದಿ ಕಲಿಯುವ ಅಗತ್ಯವಿದೆ.
> ३१. मैं आपके प्रति अत्यंत आभारी हूँ।
> ನಾನು ತಮಗೆ ತುಂಬಾ ಆಭಾರಿಯಾಗಿದ್ದೇನೆ.
> व्यावहारिक पत्र
>
> तीन दिन की छुट्टी के लिए पत्र
>
> दिनांक13-04-2016
> प्रेषक,
> अश्वथनारायण‍,
> 10वी कक्षा, ‘अ’ विभाग,
> सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता,
> चिक्कबल्लापुर जिला।
> सेवा में,
> प्रधानाचार्य,
> सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता,
> चिक्कबल्लापुर जिला।
> महोदय,
> विषय :- तीन दिन की छुट्टी के लिए पत्र।
> सविनय निवेदन है कि मै अश्वथनारायण‍ 10वी कक्षा, ‘अ’ विभाग, का छात्र हूँ । मैं 
> अपने बड़े भाई की शादी में भाग लेने के लिए बेंगलूरु जा रहा हूँ। दिनांक 
> 24-02-2016 से दिनांक 26-02-16 तक विद्यालय को नहीं आ सकता। कृपया आपसे अनुरोद 
> है कि आप इन तीन दिनों की छुट्टी मंजूर करने का कष्ट करें। कष्ट के लिए क्षमा 
> चाहता हूँ।
>
> आपका आज्ञाकारी छात्र,
> अश्वथनारायण‍
> व्यावहारिक पत्र
>
> प्रमाण पत्र के लिए पत्र
> दिनांक 13-04-2016
> प्रेषक,
> गणेश नायक‌,
> 9वी कक्षा, ‘अ’ विभाग,
> सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता,
> चिक्कबल्लापुर जिला।
> सेवा में,
> प्रधानाचार्य,
> सरकारी प्रौढ़शाला एल्लोडु गुडिबंडे ता,
> चिक्कबल्लापुर जिला।
> विषय :- प्रमाण पत्र हेतु।
> महोदया,
> आपसे निवेदन है कि मेरे पिताजी का तबादला बीदर में हो गया है। उनके साथ मुझे भी 
> जाना होगा। 
> अत: अनुरोध करता हूँ कि मुझे नौवीं कक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र, स्कूल 
> छोड़ने का प्रमाण पत्र तथा चरित्र प्रमाण पत्र देने की कृपा करें।
> धन्यवाद,
> आपका आज्ञाकारी छात्र, 
> गणेश नायक‌
> व्यक्तिगत पत्र
>
> पिता को पत्र
> दिनांक : 13-04-2016
> पूज्य पिताजी,
> सादर प्रणाम।
> मैं यहाँ आपके आशीर्वाद से कुशल हूँ। आपका पत्र मिला, पढ़कर बहुत खुशी हुई। मेरि 
> पढ़ाई ठीक चल रही है। आपकी आज्ञानुसार मन लगाकर दिन-रात पढ़ाई में व्यस्त रहती 
> हूँ।
> खेल-कूद या गपशप में ज्यादा समय नहीं गँवा रही हूँ।
> हमारे स्कूल की ओर से अगले महीने 10 या 13 तारीख तक शैक्षिक-यात्रा का आयोजन हुआ 
> है। उसमें मेरी सारी सहेलियाँ जा रही हैं। उनके साथ मैं भी जाना चाहती हूँ। 
> इसलिए मनीआर्डर द्वारा मुझे तुरंत एक हजार रुपये भेजने की कृपा करें।
> माताजी को मेरा प्रमाण, छोटे भाई राहुल को ढेर सारा प्यार।
> आपकी लाडली पुत्री,
> गौतमी एन.ए.
> सेवा में,
> श्री प्रभाकर एन.ए.
> घर नं. 100 गौतमी निवास
> सरस्वती स्कूल के समीप
> एल्लोडु, गुडिबंडे ता. ५६१२०९
> निबंध लेखन
>
> प्रस्तावना
> हमारे आस-पास के वातावरण को हम पर्यावरण कहते है। इसके तहत हवा, पानी, मिट्टी, 
> पेड़, पर्वत आदि आते हैं। पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण 
> प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।
> पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार
> I) जल प्रदुषण
> II) थल प्रदुषण
> III)वायु प्रदुषण
> IV) ध्वनि प्रदुषण
> I) जल प्रदुषण
> 'जल प्रदुषण के प्रमुख कारण'
> 1) गाँव , कस्बो का नगरो व महा-नगरो में रुपान्तरण
> 2) कारखानों के द्वारा
> 3) अनुचित रूप से कृषि कर अपशिष्ट प्रवाह करना
> 4) धार्मिक और सामाजिक रूप से दुरुपयोग आदि ।
> II) थल प्रदुषण
> थल प्रदुषण के प्रमुख कारण 
> 1)वनों की कटाई और मिट्टी का कटाव
> 2)प्लास्टिक के पदार्थों का उपयोग
> 3)खनीज पदार्थो का अत्यधिक उपयोग
> 4)बिजली का अधिक मात्रा मे उपयोग आदि ।
> III) वायु प्रदुषण 
> वायु प्रदुषण के मुख्य कारण 
> 1) वाहनों का तेजी से उपयोग
> 2 )रोजमर्रा की जिंदगी की होने वाले प्रदुषण
> 3) कारखानों के धुए से प्रदुषण आदि ।
> IV) ध्वनि प्रदुषण
> ध्वनि प्रदुषण के मुख्य कारण
> 1) स्पीकर के उपयोग से
> 2) आधुनिक साधनों के उपयोग से
> 3) परिवहन के साधनों के उपयोग से आदि ।
> 'उपसंहार' 
> हम सब का जीवन पर्यावरण पर आश्रित है। आज पृथ्वी के वायुमंडल में प्राण वायु 
> पीने का पानी आदि तत्व कम होते जा रहे हैं और दूसरे हानिकारक तत्व बढ़ते जा रहे 
> हैं। अतएव हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, पानी को साफ रखने, ध्वनी प्रदूषण आदि 
> को रोकने के प्रयत्न करना चाहिए। 
> २} समय का सदुपयोग
> 'प्रस्तावना'
> सचमुच, समय एक अनमोल वस्तु है। संसार में कोई भी वस्तु मिल सकती हैं, किन्तु 
> खोया हुआ समय फिर हाथ नहीं आता। दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो गुजरे हुए घण्टों 
> को फिर से बजा दे। समय के सदुपयोग पर ही हमारे जीवन की सफलता प्राय: निर्भर रहती 
> है। वास्तव में अपने बहुमूल्य जीवन की कीमत वह मनुष्य समझता है, जो एक पल की 
> कीमत समझता है। समय का जिसने सदुपयोग कर लिया, उसने अपने जीवन का सदुपयोग कर 
> लिया।
> दुरुपयोग
> यह दुख की बात है कि कई लोग समय का दुरुपयोग करते हैं। सबेरे आठ बजे तक तो उनकी 
> आँखें नींद में ही डूबी रहती हैं। फिर उठते हैं, तो आधा घंटा आलस्य उतारने में 
> ही बीत जाता हैं| दिनभर में जीतने घंटे हम काम करते हैं, तो उसे कई गुना अधिक 
> समय फिजूल की बातों में और निरर्थक कामों में बिताते हैं। कई लोग तो दिन भर ताश 
> और शतरंज की बाजी में उलझे रहते हैं। यद्यपि हमारे जीवन में मनोरंजन समय का 
> सदुपयोग करने के लिए हमें प्रत्येक कार्य निश्चित समय में ही पूरा करने का 
> प्रयत्न करना चाहिए|। कुछ दिनों के निरन्तर अभ्यास से हमें समय का उचित उपयोग 
> करने की आदत पड़ जाएगी और हमें जीवन को सफल बनाने की कुंजी मिल जाएगी।
> सदुपयोग
> समय का विभाजन कर हम अध्ययन, व्यायाम, सत्संग, समाज-सेवा, मनोरंजन आदि अनेक 
> कार्य सरलतापूर्वक कर सकते हैं। इससे न तो हमें काम बोझ मालूम होगा और न ही "अब 
> कौन-सा काम करें ?" यह सोचने में समय नष्ट होगा।
> अपने समय का सदुपयोग किये बिना कोई भी व्यक्ति महान् नहीं बन सकता। दुनियाँ के 
> महापरुष समय की कीमत जानते थे, इसलिए वे महान बन सके| समय का सदुपयोग करके ही वे 
> संसार में अमर कीर्ति प्राप्त कर सके थे। वाटरलू युद्ध में यदि एक सरदार चन्द 
> घड़ियों की देरी न कर देता, तो नेपोलियन अपनी घोर पराजय से बच जाता।
> 'उपसंहार'
> यदि हमें अपने जीवन से प्रेम हैं, तो हमें अपने बहुमूल्य समय को कभी भी नष्ट कर 
> देता है। हमें कबीर का यह दोहा ध्यान में रखना चाहिए - "कल करे सो आज कर , आज 
> करे सो अब।
> पल में परलै होयगी, बहुरि करैगा का।"
> स्कूल की पुस्तकालय
> प्रस्थावना
> ज्ञान-विज्ञान की असीम प्रगति के साथ पुस्तकालयों की सामाजिक उपयोगिता और अधिक 
> बढ़ गयी हैI युग-युग कि साधना से मनुष्य ने जो ज्ञान अर्जित किया है वह पुस्तकों 
> में संकलित होकर पुस्तकालयों में सुरक्षित है|
> वे जनसाधारण के लिए सुलभ होती हैंI पुस्तकालयों में अच्छे स्तर कि पुस्तकें रखी 
> जाती हैं; उनमें कुछेक पुस्तकें अथवा ग्रन्थमालाएं इतनी महँगी होती हैं कि 
> सर्वसाधारण के लिए उन्हें स्वयं खरीदकर पढ़ना संभव नहीं होताI यह बात संदर्भ 
> ग्रंथों पर विशेष रूप से लागु होती हैI बड़ी-बड़ी जिल्दों के शब्दकोशों और 
> विश्वकोशों तथा इतिहास-पुरातत्व कि बहुमूल्य पुस्तकों को एक साथ पढ़ने का सुअवसर 
> पुस्तकालयों में ही संभव हो पाता है| इतना ही नहीं, असंख्य दुर्लभ और अलभ्य 
> पांडुलिपियां भी हमें पुस्तकालयों में संरक्षित मिलती हैं| 
> 'उपसंहार' 
> आज आवश्यकता है कि नगर-नगर में अच्छे और संपन्न पुस्तकालय खुलें जिससे बच्चों की 
> पुस्तकें पढ़ने में रूचि बढ़े और देश कि युवा प्रतिभाओं के विकास के सुअवसर सहज 
> सुलभ हों|
> ४} समाचार पत्र 
> 'प्रस्तावना' 
> आज के युग में समाचार पत्र मनुष्यन की दिनचर्या का आवश्यतक अंग बन गया है। 
> प्रात:काल से ही मनुष्यय को इसका इंतजार रहता है। समाज की उन्नुति में इसका अहम 
> योगदान रहा है।
> लाभ
> हमारे आसपास व देश-विदेश की घटनाओं की जानकारी समाचार पत्र से ही प्राप्तद होती 
> है। समाचार पत्र का प्रकाशन कलकत्‍ता से प्रारंभ हुआ। पूर्व में समाचार पत्र का 
> उपयोग सैनिकों द्वारा सूचना देने के लिए किया जाता था। हमें हर तरह की जानकारी 
> इससे ही मिलती है। शिक्षा, खेल, मनोरंजन, साहित्यर आदि की प्रमुख खबरें दैनिक 
> समाचार में प्रकाशित होती हैं। हर देश में भिन्नल-भिन्नज भाषाओं में इसका 
> प्रकाशन होता है। दैनिक समाचार पत्र के अलावा मासिक, पाक्षिक व साप्तानहिक 
> पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है। हमें समाचार पत्र से घर बैठे देश-विदेश की 
> गतिविधि का पता चल जाता है। समाचार के लेख, खबरें समाज की उन्नेति में इनका 
> विशिष्टव योगदान रहा है। 
> 'उपसंहार' 
> समाचार पत्र के अलावा हमें टीवी, इंटरनेट पर भी खबरों की सुविधा मिल जाती है। यह 
> न्याय के खिलाफ हमेशा तत्पर रहता है। पहले इतने साधन नहीं थे, लेकिन अब समाचार 
> पत्र के कारण हमें नई-नई ज्ञान की बातें भी मिलती है। 
> ५} बेरोजगारी की समस्या
> प्रस्तावना प्राचीन काल में भारत आर्थिक दृष्टि से पूर्णत: सम्पन्न था । तभी तो 
> यह ‘ सोने की चिड़िया ‘ के नाम से विख्यात था । किन्तु, आज भारत आर्थिक दृष्टि 
> से विकासशील देशों की श्रेणी में है । आज यहाँ कुपोषण और बेरोजगारी है । 
> बेरोजगारी का अर्थ
> काम करने योग्य इच्छुक व्यक्ति को कोई काम न मिलना । 
> बेरोजगारी का रूप 
> बेरोजगारी में एक वर्ग तो उन लोगों का है, जो अशिक्षित या अर्द्धशिक्षित हैं और 
> रोजी-रोटी की तलाश में भटक रहे हैं । दूसरा वर्ग उन बेरोजगारों का है जो शिक्षित 
> हैं, जिसके पास काम तो है, पर उस काम से उसे जो कुछ प्राप्त होता है, वह उसकी 
> आजीविका के लिए पर्याप्त नहीं है । बेरोजगारी की इस समस्या से शहर और गाँव दोनों 
> आक्रांत हैं ।
> बेरोजगारी का कारण
> हमारे देश में बेरोजगारी की इस भीषण समस्या के अनेक कारण हैं । उन कारणों में 
> लॉर्ड मैकॉले की दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति, जनसंख्या की अतिशय वृद्धि, बड़े-बड़े 
> उद्योगों की स्थापना के कारण कुटीर उद्योगों का ह्रास आदि प्रमुख हैं । आधुनिक 
> शिक्षा प्रणाली में रोजगारोन्मुख शिक्षा व्यवस्था का सर्वथा अभाव है । इस कारण 
> आधुनिक शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों के सम्मुख भटकाव के अतिरिक्त और कोई चारा नहीं 
> रह गया है । बेरोजगारी की विकराल समस्या के समाधान के लिए कुछ राहें तो खोजनी ही 
> पड़ेगी । इस समस्या के समाधान के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए ।
> 'उपसंहार' 
> भारत में बेरोजगारी की समस्या का हल आसान नहीं है, फिर भी प्रत्येक समस्या का 
> समाधान तो है ही । इस समस्या के समाधान के लिए मनोभावना में परिवर्तन लाना 
> आवश्यक है । मनोभावना में परिवर्तन का तात्पर्य है – किसी कार्य को छोटा नहीं 
> समझना । 
> समास के उदा
>
> अव्ययीभाव कर्मधारय तत्पुरुष द्विगु द्वंद्व बहुव्रीहि
> प्रतिदिन नीलकमल जलप्रपात चौमासा श्रद्धा-भक्ति वीणापाणी
> भरपेट पीतांबर राजवंश नौरात्री होश-हवास धनश्याम
> आजन्म नीलकंठ राजमहल सतसई देश-विदेश श्वेतांबर
> बेखटके कनकलता सत्याग्रह त्रिधारा राम-लक्षण लंबोदर
> यथासंभव चंद्रमुख ग्रंथकार पंचवटी सीता-राम चक्रपाणि
> अनजाने मुखचंद्र गगनचुंबी त्रिवेणी पाप-पुण्य त्रिनेत्र
> प्रत्येक करामल परलोकगमन शताब्दी सुबह-श्याम दशानन
> प्रतिमाह सद्‍धर्म देशप्रेम चौराह सुख-दुख नीलकंठ
> आमरण धरणीधर रेखांकित बारहमासा दाल-रोटी चतुरानन
> संधि के उदा
>
> दीर्घ संधि शब्द गुण संधि शब्द वृधि संधि शब्द यण संधि शब्द अयादि संधि शब्द
> पर्वतावली गजेंद्र एकैक अत्यधिक चयन
> सहानुभूति परमेश्वर मतैक्य इत्यादि नयन
> संग्रहालय महेंद्र सदैव प्रत्युपकार गायक
> जलाशय रमेश महैश्वर्य मन्वंतर नायिका
> समानाधिकार वार्षिकोत्सव परमौज स्वागत भवन
> धर्मात्मा जलोर्मि वनौषध पित्रानुमति पावन
> विद्यार्थी महोत्सव महौजस्वी पित्राज्ञा नाविक्क
> विद्यालय महोर्मि महौषधि पित्रुपदेश नायक
> कवींद्र सप्तर्षि हरेक अत्यंत सावन
> गिरीश महर्षि तथैव अत्यानंद भावुक
> महींद्र परोपकार महौज प्रत्येक पवित्र
> रजनीश नरेंद्र नरैश्वर्य प्रत्युत्तर 
> लघूत्तर राकेश परमौषध अन्वय 
> सिंधूजा नरोत्तम मात्रादेश 
> वधूत्सव गंगोर्मि 
> भूर्जा महोदर 
> व्यंजन संधि शब्द विसर्ग संधि शब्द
> दिग्गज तद्रूप निश्चय पुरोहित
> सदवाणी सज्जन निष्कपट निश्चिंत
> अजन्त सदाचार नीरस विस्तार
> षड्‍दर्शन संशय दुर्गंध निस्संदेह
> वाग्‍जाल संसार मनोरथ निर्मल
> Contributed by : 
> RAJ KUMAR
> GOVERNMENT HIGH SCHOOL
> YELLODU GUDI BANDE (T)
> CHIKKABALLAPURA
> MOBILE NO:9449321475. 
>
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> Hindi KOER web portal is available on 
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi
>
> 2. For Ubuntu 14.04 installation,    visit 
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha   (It has 
> Hindi interface also)
>
> 3. For doubts on Ubuntu and other public software,    visit 
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions
>
> 4. If a teacher wants to join STF,    visit 
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member
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Hindi KOER web portal is available on 
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2. For Ubuntu 14.04 installation,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha   (It has Hindi 
interface also)

3. For doubts on Ubuntu and other public software,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions

4. If a teacher wants to join STF,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member

5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see 
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