Dhanyvad sir ji
On 28 Aug 2016 2:59 pm, "Shreenivas Naik" <
[email protected]> wrote:

>
> पार्वती जी श्रद्धा हैं और भगवान शिव विश्वास है।
> जब श्रद्धा और विश्वास मिल जाते हैं तो भगवान वहां
> प्रकट हो जाते हैं। भगवान शिव ने पार्वती जी को
> राम कथा सुनाई है। शिवजी कहते हैं-) हे गिरिजे! श्री
> रामजी के चरित्र सौ करोड़ (अथवा) अपार हैं। वेद और
> सरस्वती भी उनका वर्णन नहीं कर सकते॥
> यह पवित्र कथा भगवान् के परम पद को देने वाली है।
> इसके सुनने से अविचल भक्ति प्राप्त होती है। बिमल
> कथा हरि पद दायनी। भगति होइ सुनि अनपायनी॥
> मैंने वह सब सुंदर कथा कही जो काकभुशुण्डिजी ने
> गरुड़जी को सुनाई थी॥ हे भवानी! सो कहो, अब और
> क्या कहूँ?
> रामजी की मंगलमयी कथा सुनकर पार्वतीजी अत्यंत
> विनम्र तथा कोमल वाणी बोलीं- हे त्रिपुरारि। मैं
> धन्य हूँ, धन्य-धन्य हूँ जो मैंने जन्म-मृत्यु के भय को हरण करने
> वाले श्री रामजी के गुण (चरित्र) सुने॥ हे नाथ! आपका
> मुख रूपी चंद्रमा श्री रघुवीर की कथा रूपी अमृत
> बरसाता है। हे मतिधीर मेरा मन कर्णपुटों से उसे पीकर
> तृप्त नहीं होता॥
> राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह
> नाहीं॥ श्री रामजी के चरित्र सुनते-सुनते जो तृप्त हो
> जाते हैं (बस कर देते हैं), उन्होंने तो उसका विशेष रस
> जाना ही नहीं।
> भव सागर चह पार जो पावा। राम कथा ता कहँ दृढ़
> नावा॥ जो संसार रूपी सागर का पार पाना चाहता
> है, उसके लिए तो श्री रामजी की कथा दृढ़ नौका के
> समान है।
> ते जड़ जीव निजात्मक घाती। जिन्हहि न रघुपति
> कथा सोहाती॥ जिन्हें श्री रघुनाथजी की कथा नहीं
> सुहाती, वे मूर्ख जीव तो अपनी आत्मा की हत्या करने
> वाले हैं॥
> हे नाथ! आपने कहा कि यह सुंदर कथा काकभुशुण्डिजी
> ने गरुड़जी से कही थी। लेकिन काकभुसुण्डि तो एक
> कौवा है। उसे भगवान की भक्ति कैसे प्राप्त हुई, इस
> बात पर मुझे संदेह हो रहा है। हे देवाधिदेव महादेवजी! वह
> प्राणी अत्यंत दुर्लभ है जो मद और माया से रहित होकर
> श्री रामजी की भक्ति के परायण हो। हे विश्वनाथ!
> ऐसी दुर्लभ हरि भक्ति को कौआ कैसे पा गया, मुझे
> समझाकर कहिए॥ भुशुण्डिजी ने कौए का शरीर किस
> कारण पाया? हे कृपालु! बताइए, उस कौए ने प्रभु का यह
> पवित्र और सुंदर चरित्र कहाँ पाया? और हे कामदेव के
> शत्रु! यह भी बताइए, आपने इसे किस प्रकार सुना?
> और गरुण जी जो श्री हरि के सेवक है उन्होंने मुनियों के
> समूह को छोड़कर, कौए से जाकर हरिकथा किस कारण
> सुनी? काकभुशुण्डि और गरुड़ इन दोनों हरिभक्तों की
> बातचीत किस प्रकार हुई?
> शिवजी सुख पाकर आदर के साथ बोले-हे सती! तुम धन्य
> हो, तुम्हारी बुद्धि अत्यंत पवित्र है। श्री रघुनाथजी के
> चरणों में तुम्हारा कम प्रेम नहीं है। (अत्यधिक प्रेम है)।
> शिव कहते हैं- पक्षीराज गरुड़जी ने भी जाकर
> काकभुशुण्डिजी से प्रायः ऐसे ही प्रश्न किए थे। हे
> उमा! मैं वह सब आदरसहित कहूँगा, तुम मन लगाकर सुनो॥
> पहले तुम्हारा अवतार दक्ष के घर हुआ था। तब तुम्हारा
> नाम सती था॥ दक्ष के यज्ञ में तुम्हारा अपमान हुआ।
> तब तुमने अत्यंत क्रोध करके प्राण त्याग दिए थे और फिर
> मेरे सेवकों ने यज्ञ विध्वंस कर दिया था। वह सारा प्रसंग
> तुम जानती ही हो॥ तब मेरे मन में बड़ा सोच हुआ और हे
> प्रिये! मैं तुम्हारे वियोग से दुःखी हो गया।
> मैं विरक्त भाव से सुंदर वन, पर्वत, नदी और तालाबों का
> कौतुक (दृश्य) देखता फिरता था॥ सुमेरु पर्वत की उत्तर
> दिशा में और भी दूर, एक बहुत ही सुंदर नील पर्वत है। उसके
> सुंदर स्वर्णमय शिखर हैं, (उनमें से) चार सुंदर शिखर मेरे मन
> को बहुत ही अच्छे लगे॥ न शिखरों में एक-एक पर बरगद,
> पीपल, पाकर और आम का एक-एक विशाल वृक्ष है। पर्वत
> के ऊपर एक सुंदर तालाब शोभित है। उस सुंदर पर्वत पर
> वही पक्षी (काकभुशुण्डि) बसता है। उसका नाश कल्प
> के अंत में भी नहीं होता।
> उस पर्वत के आस पास गुण-दोष, मोह, काम आदि
> अविवेक जो सारे जगत् में छा रहे हैं वो नही फटकते। उन
> काकभुशुण्डि जी का श्री हरि के भजन को छोड़कर उसे
> दूसरा कोई काम नहीं है॥ बरगद के नीचे वह श्री हरि की
> कथाओं के प्रसंग कहता है। वहाँ अनेकों पक्षी आते और
> कथा सुनते हैं। वह विचित्र रामचरित्र को अनेकों प्रकार
> से प्रेम सहित आदरपूर्वक गान करता है॥ जब मैंने वहाँ
> जाकर यह कौतुक (दृश्य) देखा, तब मेरे हृदय में विशेष आनंद
> उत्पन्न हुआ॥ तब मैंने हंस का शरीर धारण कर कुछ समय
> वहाँ निवास किया और श्री रघुनाथजी के गुणों को
> आदर सहित सुनकर फिर कैलास को लौट आया॥ मैंने वह
> सब इतिहास कहा कि जिस समय मैं काकभुशुण्डि के
> पास गया था।
>
> --
> 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/
> forum/hindistf
> Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi
>
> 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also)
>
> 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/
> Frequently_Asked_Questions
>
> 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member
>
> 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software
> सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर
> ---
> You received this message because you are subscribed to the Google Groups
> "HindiSTF" group.
> To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an
> email to [email protected].
> To post to this group, send email to [email protected].
> Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf.
> To view this discussion on the web, visit https://groups.google.com/d/
> msgid/hindistf/CAOWNnMGGvXuPhujeqsmxv%3DSBAeJrHRx2Y3eSJo_
> i72gAb9u87g%40mail.gmail.com
> <https://groups.google.com/d/msgid/hindistf/CAOWNnMGGvXuPhujeqsmxv%3DSBAeJrHRx2Y3eSJo_i72gAb9u87g%40mail.gmail.com?utm_medium=email&utm_source=footer>
> .
> For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.
>

-- 
1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/forum/hindistf
Hindi KOER web portal is available on 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi

2. For Ubuntu 14.04 installation,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha   (It has Hindi 
interface also)

3. For doubts on Ubuntu and other public software,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions

4. If a teacher wants to join STF,    visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member

5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software 
सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर
--- 
You received this message because you are subscribed to the Google Groups 
"HindiSTF" group.
To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email 
to [email protected].
To post to this group, send an email to [email protected].
Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf.
To view this discussion on the web, visit 
https://groups.google.com/d/msgid/hindistf/CAKe37sHDScyTBsKvdaWNJ3ca3duAR_0YjRYozV24Ad3kGQzZVQ%40mail.gmail.com.
For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.

Reply via email to