Sir ,9 aur 8 vi fa 1 prashna patrika hai to bhejo. ms word format me.pls. On Aug 25, 2016 4:46 PM, "Shreenivas Naik" < [email protected]> wrote:
> *हिन्दी संस्मरण का इतिहास* > > संस्मरण और रेखाचित्र में बहुत सूक्ष्म अंतर है। कुछ विद्वानों ने तो इन > दोनों विधाओं को एक-दूसरे की पूरक विधा भी कहा है। संस्मरण का सामान्य अर्थ > होता है सम्यक् स्मरण। सामान्यतः इसमें चारित्रिक गुणों से युक्त किसी महान > व्यक्ति को याद करते हुए उसके परिवेश के साथ उसका प्रभावशाली वर्णन किया जाता > है। इसमें लेखक स्वानुभूत विषय का यथावत अंकन न करके उसका पुनर्सृजन करता है। > रेखाचित्र की तरह यह वर्ण्य विषय के प्रति तटस्थ नहीं होता। आत्मकथात्मक विधा > होते हुए भी संस्मरण आत्मकथा से पर्याप्त भिन्नता रखता है। > > आरंभिक युग > > बालमुकुंद गुप्त द्वारा सन् 1907 में प्रतापनारायण मिश्र पर लिखे संस्मरण को > हिंदी का प्रथम संस्मरण माना जाता है। बाद में इस काल की एकमात्र संस्मरण > पुस्तक ‘हरिऔध’ पर केंद्रित गुप्त जी द्वारा लिखित ‘हरिऔध’ के संस्मरण’ के नाम > से प्रकाशित हुई। इसमें हरिऔध को वर्ण्य विषय बनाकर पंद्रह संस्मरणों की रचना > की गई है। > > द्विवेदी युग > > हिंदी की पत्र-पत्रिकाओं ने गद्य विधाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का > निर्वाह किया। ‘सरस्वती’ में स्वयं महावीर प्रसाद द्विवेदी ने कई संस्मरण > लिखे। उन्होंने अपने साथी लेखकों को नई गद्य विधाओं के लिए प्रेरित भी किया। > इस समय के प्रमुख संस्मरण लेखकों में द्विवेदी जी के अतिरिक्त रामकुमार खेमका, > काशीप्रसाद जायसवाल और श्यामसुंदर दास हैं। श्यामसुंदर दास ने लाला भगवानदीन > पर रोचक संस्मरण लिखे। अपने समकालीन साहित्यकारों पर उस समय से आरंभ हुई > परंपरा आज तक लगातार चल रही है। > > छायावादोत्तर युग > > रेखाचित्र की तरह ही संस्मरण को गद्य की विशिष्ट विधा के रूप में स्थापित > करने की दिशा में भी पद्म सिंह शर्मा (1876-1932) का महत्त्वपूर्ण योगदान माना > जाता है। इनके संस्मरण ‘प्रबंध मंजरी’ और ‘पद्म पराग’ में संकलित हैं। महाकवि > अकबर, सत्यनारायण कविरत्न और भीमसेन शर्मा आदि पर लिखे हुए इनके संस्मरणों ने > इस विधा को स्थिरता प्रदान करने में मदद की। विनोद की एक हल्की रेखा इनकी पूरी > रचनाओं के भीतर देखी जा सकती है। > > महादेवी वर्मा ने अपने संस्मरणों में अपने जीवन में आए अनमोल पलों को अपने > ‘पथ के साथी’ में संकलित किया है। अपने समकालीन साहित्यकारों पर इन > रेखाचित्रों में अब तक किसी भी लेखक द्वारा लिखी गई सर्वश्रेष्ठ टिप्पणी कहें > तो इसमें कोई अतिशयोक्ति की बात न होगी। > > निराला के ‘बिल्लेसुर बकरिहा’ और ‘कुल्लीभाट’ में संस्मरण और रेखाचित्र का > अनुपम संयोग हुआ है। इन्हें किसी एक विधा के अन्तर्गत रखना संभव नहीं है लेकिन > अपनी सजीवता और व्यंग्य के कारण इन्हें अप्रतिम कहा जा सकता है। > > प्रकाशचंद गुप्त ने ‘पुरानी स्मृतियाँ’ नामक संग्रह में अपने संस्मरणों को > लिपिबद्ध किया। इलाचंद्र जोशी कृत ‘मेरे प्राथमिक जीवन की स्मृतियाँ’ और > वृंदावनलाल वर्मा कृत ‘कुछ संस्मरण’ इस काल की उल्लेखनीय रचनाएँ हैं। > > स्वातंत्रयोत्तर युग > > सन् 1950 के आस-पास का समय संस्मरण लेखन की दृष्टि से विशेष महत्त्व का है। > इस समय अनेक लेखक संस्मरणों की रचना कर रहे थे। बनारसीदास चतुर्वेदी को > संस्मरण लेखन के क्षेत्र में विशेष सफलता मिली। पेशे से साहित्यिक पत्रकार > होने के कारण इनके संस्मरणों के विषय बहुत व्यापक हैं। अपनी कृति ‘संस्मरण’ > में संकलित रचनाओं की शैली पर इनके मानवीय पक्ष की प्रबलता को साफ देखा जा > सकता है। इनके संस्मरण रोचकता के लिए विशेष प्रसिद्ध हुए। शैली वर्णनात्मक है > और भाषा अत्यंत सरल है। कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर ने अपनी कृतियों ‘भूले हुए > चेहरे’ तथा ‘दीप जले शंख बजे’ के कारण इस समय के एक अन्य महत्त्वपूर्ण संस्मरण > लेखक हैं। लगभग इसी समय उपेंद्रनाथ अश्क का ‘मंटो मेरा दुश्मन’ प्रकाशित हुआ > जिसका साहित्यिक और गैर-साहित्यिक दोनों स्थानों पर भरपूर स्वागत हुआ। > जगदीशचंद्र माथुर ने ‘दस तस्वीरें’ और ‘जिन्होंने जीना जाना’ के माध्यम से > अपने समय की महत्वपूर्ण संस्मरणात्मक चित्र प्रस्तुत किए। > > संस्मरण और रेखाचित्रों में कोई भी तात्विक भेद नहीं मानने वाले आलोचक डा. > नगेन्द्र ने ‘चेतना के बिंब’ नाम की कृति के माध्यम से इसविधा को समृद्ध किया। > प्रभाकर माचवे, विष्णु प्रभाकर, अज्ञेय और कमलेश्वर इस समय के अन्य प्रमुख > संस्मरण लेखक रहे हैं। > > समकालीन युग > > समकालीन लेखन में आत्मकथात्मक विधाओं की भरमार है। संस्मरण आज बहुतायत में > लिखे जा रहे हैं। अपने अतीत को बयान करने की ललक हर आदमी के भीतर होती है और > उसकी अभिव्यक्ति करना अन्य विधाओं की तुलना में काफी आसान होता है। डॉ. > विश्वनाथ त्रिपाठी द्वारा नामवर सिंह पर लिखित संस्मरण ‘हक अदा न हुआ’ ने इस > विधा को नई ताजगी से भर दिया है और इससे प्रभावित होकर कई नए और पुराने लेखक > इस ओर मुड़े हैं। इनकी सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘नंगातलाई का गांव’ (2004) को > उन्होंने स्मृति आख्यान कहा है। वर्तमान समय के संस्मरण लेखकों में काशीनाथ > सिंह, कांतिकुमार जैन, राजेंद्र यादव, रवीन्द्र कालिया, ममता कालिया अखिलेश का > नाम काफी प्रमुखता से ले सकते हैं। > > -- > 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/ > forum/hindistf > Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi > > 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also) > > 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/ > Frequently_Asked_Questions > > 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member > > 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software > सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर > --- > You received this message because you are subscribed to the Google Groups > "HindiSTF" group. > To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an > email to [email protected]. > To post to this group, send email to [email protected]. > Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf. > To view this discussion on the web, visit https://groups.google.com/d/ > msgid/hindistf/CAOWNnME%2BB5RwCd6O4XCNyscPg0EDSmGK1ZG2 > FhXuD0Xza_Rv3w%40mail.gmail.com > <https://groups.google.com/d/msgid/hindistf/CAOWNnME%2BB5RwCd6O4XCNyscPg0EDSmGK1ZG2FhXuD0Xza_Rv3w%40mail.gmail.com?utm_medium=email&utm_source=footer> > . > For more options, visit https://groups.google.com/d/optout. > -- 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/forum/hindistf Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also) 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर --- You received this message because you are subscribed to the Google Groups "HindiSTF" group. To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email to [email protected]. 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