8 & 9th blue print send madi plz
On 20-Dec-2016 10:11 AM, "Shivanand shivu" <[email protected]> wrote:

> Nice sir
>
> On Dec 20, 2016 8:59 AM, "Ujwala Bhajantri" <[email protected]> wrote:
> >
> > Thank you sir for sending these teaching methods
> >
> > Ujwala Patil
> >
> > On 08-Dec-2016 10:59 PM, "Shreenivas Naik" <shreenivasnaik.hindi.vogga@
> gmail.com> wrote:
> >>
> >> व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य:-
> >> छात्रों को शुद्ध बोलने, लिखने तथा पढ़ने की प्रेरणा देना। छात्रों को
> शुद्ध भाषा के प्रयोग सीखना। व्याकरण के द्वारा छात्रों में रचना तथा
> सर्जनात्मकता। छात्रों को ध्वनियों, ध्वनियों के सूक्ष्म अन्तर शब्द योजना,
> शब्द शक्तियों एवं शुद्ध वर्तनी का ज्ञान कराना। छात्रों को वाक्य रचना के
> नियम, विराम चिन्हों का शुद्ध प्रयोग आदि का ज्ञान कराना। छात्रों को शब्द
> सूक्ति, लोकोक्ति, मुहावरे आदि का प्रसंगानुकूल अर्थ निकालना और स्वराघात एवं
> बलाघात के अनुसार अर्थ बोध कराने के योग्य बनाना। छात्रों में भाषा के गुण दोष
> परखने की रूचि उत्पन्न कराना। भाषा रचना का ज्ञान प्राप्त करना। नवीन भाषा को…
> >>
> >>  प्रत्यक्ष भाषा शिक्षण विधि :-
> >> यह विधि बिना व्याकरण नियमों का ज्ञान कराए भाषा के शुद्ध रूप का अनुकरण
> करने के अवसर प्रदान करता है। ऐसे लेखक जिनका भाषा पर पूर्णाधिकार है उनसे
> बालकों को वार्तालाप के अवसर प्रदान किए जाते हैं, प्राथमिक स्तर के लिए एक
> विधि उपयुक्त है।
> >>
> >> लेखन कौशल के विकास में व्याकरण का महत्व :-
> >> यह बच्चों को पढ़ी या सुनी हुई बातों को शुद्ध वर्तनी तथा विराम चिन्हों का
> सही प्रयोग करते हुए लेखन कौशल का विकास करने में सहायक है। यह बच्चों के लेखन
> में संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विश्लेषण, प्रत्यय, उपसर्ग, तत्सम शब्द, तद्भव
> शब्द आदि के प्रयोग से उनके लेखन कौशल में विकास करने में सहायक है। यह बच्चों
> में विभिन्न संदर्भ शब्दों की समक्ष पैदान करने में सहायक है। यह बच्चों की
> लेखन शैली में मुहावरों का प्रयोग करने का शिक्षण देकर उनके लेखन कौशल में
> विकास करने में सहायक है। यह बच्चों को लेखन क्रिया मेें गद्य-पद्य में अन्तर
> समझाकर…
> >>
> >> On Dec 8, 2016 10:38 PM, "Shreenivas Naik" <shreenivasnaik.hindi.vogga@
> gmail.com> wrote:
> >>>
> >>> शिक्षण विधियाँ
> >>>
> >>> जिस ढंग से शिक्षक शिक्षार्थी को ज्ञान प्रदान करता है
> उसे शिक्षणविधि कहते हैं। "शिक्षणविधि" पद का प्रयोग बड़े व्यापक अर्थ में
> होता है। एक ओर तो इसके अंतर्गत अनेक प्रणालियाँ एवं योजनाएँ सम्मिलित की जाती
> हैं, दूसरी ओर शिक्षण की बहुत सी प्रक्रियाएँ भी सम्मिलित कर ली जाती हैं।
> कभी-कभी लोग युक्तियों को भी विधि मान लेते हैं; परंतु ऐसा करना भूल है।
> युक्तियाँ किसी विधि का अंग हो सकती हैं, संपूर्ण विधि नहीं। एक ही युक्ति
> अनेक विधियों में प्रयुक्त हो सकती है।
> >>>
> >>> शिक्षण की विविध विधियाँसंपादित करें
> >>> निगमनात्मक तथा आगमनात्मकसंपादित करें
> >>>
> >>> पाठ्यविषय को प्रस्तुत करने के दो ढंग हो सकते हैं। एक में छात्रों को
> कोई सामान्य सिद्धांत बताकर उसकी जाँच या पुष्टि के लिए अनेक उदाहरण दिए जाते
> हैं। दूसरे में पहले अनेक उदाहरण देकर छात्रों से कोई सामान्य नियम निकलवाया
> जाता है। पहली विधि को निगमनात्मक विधि और दूसरी को आगमनात्मक विधि कहते हैं।
> >>>
> >>> संश्लेषणात्मक तथा विश्लेषणात्मकसंपादित करें
> >>>
> >>> दूसरे दृष्टिकोण से शिक्षणविधि के दो अन्य प्रकार हो सकते हैं।
> पाठ्यवस्तु को उपस्थित करने का ढंग यदि ऐसा हैं कि पहले अंगों का ज्ञान देकर
> तब पूर्ण वस्तु का ज्ञान कराया जाता है तो उसे संश्लेषणात्मक विधि कहते हैं।
> जैसे हिंदीपढ़ाने में पहले वर्णमाला सिखाकर तब शब्दों का ज्ञान कराया जाता है।
> तत्पश्चात् शब्दों से वाक्य बनवाए जाते हैं। परंतु यदि पहले वाक्य सिखाकर तब
> शब्द और अंत में वर्ण सिखाए जाएँ तो यह विश्लेषणात्मक विधि कहलाएगी क्योंकि
> इसमें पूर्ण से अंगों की ओर चलते हैं।
> >>>
> >>> वस्तुविधिसंपादित करें
> >>>
> >>> शिक्षण का एक प्रसिद्ध सूत्र हैं - "मूर्त से अमूर्त की ओर"। वास्तव में
> हमें बाह्य संसार का ज्ञान अपनी ज्ञानेंद्रियों के द्वारा होता है जिनमें
> नेत्र प्रमुख हैं। किसी वस्तु पर दृष्टि पड़ते ही हमें उसका सामान्य परिचय मिल
> जाता है। अत: मूर्त वस्तु ज्ञान प्रदान करने का सबसे सरल साधन है। इसीलिये
> आरंभ से वस्तुविधि का सहारा लिया जाता है अर्थात् बच्चों को पढ़ाने के लिए
> वस्तुओं का प्रदर्शन करके उनके विषय में ज्ञान प्रदान किया जाता है। यहाँ तक
> कि अमूर्त को भी मूर्त बनाने का प्रयास किया जाता है। जैसे, तीन और दो पाँच को
> समझाने के लिए पहले छात्रों के सम्मुख तीन गोलियाँ रखी जाती हैं। फिर उनमें दो
> गोलियाँ और मिलाकर सबको एक साथ गिनाते हैं तब तीन और दो पाँच स्पष्ट हो जाता
> है।
> >>>
> >>> दृष्टांतविधिसंपादित करें
> >>>
> >>> वस्तुविधि का एक दूसरा रूप है - दृष्टांतविधि। वस्तुविधि में जिस प्रकार
> वस्तुओं के द्वारा ज्ञान प्रदान किया जाता है दृष्टांतविधि में उसी
> प्रकार दृष्टांतों के द्वारा। दृष्टांत दृश्य भी हो सकते हैं और श्रव्य भी।
> इसमें चित्र, मानचित्र, चित्रपट आदि के सहारे वस्तु का स्पष्टीकण किया जाता
> है। साथ ही उपमा, उदाहरण, कहानी, चुटकुले आदि के द्वारा भी विषय का
> स्पष्टीकरण हो सकता है।
> >>>
> >>> कथनविधि एवं व्याख्यानविधिसंपादित करें
> >>>
> >>> वस्तु एवं दृष्टांतविधियों से ज्ञान प्राप्त करते करते जब बच्चों को कुछ
> कुछ अनुमान करने तथा अप्रत्यक्ष वस्तु को भी समझने का अभ्यास हो जाता है
> तब कथनविधि का सहारा लिया जाता है। इसमें वर्णन के द्वारा छात्रों को
> पाठ्यवस्तु का ज्ञान दिया जाता है। परंतु इस विधि में छात्र अधिकतर निष्क्रिय
> श्रोता बने रहते हैं और पाठन प्रभावशाली नहीं होता। इसी से प्रसिद्ध
> शिक्षाशास्त्री हर्बर्ट स्पेंसर ने कहा है- "बच्चों को कम से कम बतलाना चाहिए,
> उन्हें अधिक से अधिक स्वत: ज्ञान द्वारा सीखना चाहिए"। व्याख्यानविधिइसी की
> सहचरी है। उच्च कक्षाओं में प्राय: व्याख्यानविधि का ही प्रयोग लाभदायक समझा
> जाता है।
> >>>
> >>> कथनविधि में प्राय: हर्बर्ट के पाँच सोपानों का प्रयोग किया जाता है। वे
> हैं
> >>>
> >>> (1) प्रस्तावना, (2) प्रस्तुतीकरण, (3) तुलना या सिद्धांतस्थापन, (4)
> आवृत्ति, (5) प्रयोग।
> >>>
> >>> परंतु केवल ज्ञानार्जन के पाठों में ही पाँचों सोपानों का प्रयोग होता
> है। कौशल तथा रसास्वादन के पाठों में कुछ सीमित सोपानों का ही प्रयोग होता है।
> >>>
> >>> प्रश्नोत्तर विधि (सुकरराती विधि)संपादित करें
> >>>
> >>> प्रश्न यद्यपि एक युक्ति है फिर भी सुकरात ने प्रश्नोत्तर को एक विधि के
> रूप में प्रयोग करके इसे अधिक महत्व प्रदान किया है। इसी से इसे सुकराती
> विधि कहते हैं। इसमें प्रश्नकर्ता से ही प्रश्न किए जाते हैं और उसके उत्तरों
> के आधार पर उसी से प्रश्न करते करते अपेक्षित उत्तर निकलवा लिया जाता है।
> >>>
> >>> करके सीखनासंपादित करें
> >>>
> >>> जब से बाल मनोविज्ञान के विकास ने यह सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा केंद्र
> न तो विषय है न अध्यापक वरन् छात्र है तब से शिक्षण में सक्रियता को अधिक
> महत्व दिया जाने लगा है। करके सीखना (learning by doing) अर्थात् स्वानुभव
> द्वारा ज्ञान प्राप्त करना आजकल का सर्वाधिक व्यापक शिक्षणसिद्धांत है।
> अत: रूसों से लेकर मांटेसरी और ड्यूबीतक शिक्षाशास्त्रियों ने बच्चों की
> ज्ञानेंद्रियों को अधिक कार्यशील बनाने तथा उनके द्वारा शिक्षा देने पर अधिक
> बल दिया है। महात्मा गांधी ने भी इसी सिद्धांत के आधार पर बेसिक शिक्षा को
> जन्म दिया। अत: सक्रिय विधि के अंतर्गत अनेक विधियाँ सम्मिलित की जा सकती हैं
> जैसे- शोधविधि(ह्यूरिस्टिक), योजना (प्रोजेक्ट) विधि, डाल्टन
> प्रणाली, बेसिक-शिक्षा-विधि, इत्यादि।
> >>>
> >>> शोधविधिसंपादित करें
> >>>
> >>> जर्मनी के प्रोफेसर आर्मस्ट्रौंग द्वारा शोधविधि का प्रतिपादन हुआ था।
> इस विधि में छात्रों को उपयुक्त वातावरण में रखकर स्वयं किसी तथ्य को ढूढ़ने
> के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका यह अर्थ नहीं है कि अध्यापक कुछ नहीं करता
> और छात्रों को मनमाना काम करने को छोड़ देता है। सच पूछिए तो वह छात्र का
> पथप्रदर्शन करता तथा उसे गलत रास्ते से हटाकर सीधे रास्ते पर लाता रहता है।
> उसका लक्ष्य यह रहता है कि जो ज्ञान छात्र अपने निरीक्षण अथवा प्रयोग द्वारा
> प्राप्त कर सकता है उसे बताया न जाए। इस विधि का प्रयोग पहले तो विज्ञान की
> शिक्षा में किया गया। फिर धीरे-धीरे गणित, भूगोल तथा अन्य विषयों में भी इसका
> प्रयोग होने लगा।
> >>>
> >>> प्रोजेक्ट विधिसंपादित करें
> >>>
> >>> अमरीका के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री ड्यूवी, किलपैट्रिक, स्टीवेंसन आदि के
> सम्मिलित प्रयास का फल योजना (प्रोजेक्ट) विधि है। इसके अनुसार ज्ञानप्राप्ति
> के लिए स्वाभाविक वातावरण अधिक उपयुक्त होता है। इस विधि से पढ़ाने के लिए
> पहले कोई समस्या ली जाती है जो प्राय: छात्रों के द्वारा उठाई जाती है और उस
> समस्या का हल करने के लिए उन्हीं के द्वारा योजना बनाई जाती है और योजना को
> स्वाभाविक वातावरण में पूर्ण किया जाता है। इसी से इसकी परिभाषा इस प्रकार की
> जाती है कि योजना वह समस्यामूलक कार्य है जो स्वाभाविक वातावरण में पूर्ण किया
> जाए।
> >>>
> >>> डालटन योजनासंपादित करें
> >>>
> >>> अमरीका के डाल्टन नामक स्थान में 1912 से 1915 के बीच कुमारी हेलेन
> पार्खर्स्ट्र ने शिक्षा की एक नई विधि प्रयुक्त की जिसे डाल्टन योजना कहते
> हैं। यह विधि कक्षाशिक्षण के दोषों को दूर करने के लिए लिए आविष्कृत की गई थी।
> डाल्टन योजना में कक्षाभवन का स्थान प्रयोगशाला ले लेती है। प्रत्येक विषय की
> एक प्रयोगशाला होती है जिसमे उस विषय के अध्ययन के लिए पुस्तकें, चित्र,
> मानचित्र तथा अन्य सामग्री के अतिरिक्त सन्दर्भग्रंथ भी रहते हैं। विषय का
> विशेषज्ञ अध्यापक प्रयोगशाला में बैठकर छात्रों की सहायता करता, उनके कार्यों
> का संशोधन तथा जाँच करता है। वर्ष भर का कार्य 9 या 10 भागों में बाँटक
> निर्धारित कार्य (असाइनमेंट) के रूप में प्रत्येक छात्र को लिखित दिया जाता
> है। छात्र उस निर्धारित कार्य को अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न प्रयोगशालाओं
> में जाकर पूरा करता है। कार्य अन्वितियों में बँटा रहता है। जितनी अन्विति का
> कार्य पूरा हो जाता है उतनी का उल्लेख उसके रेखापत्र (ग्राफकार्ड) पर किया
> जाता है। एक मास का कार्य पूरा हो जाने पर ही दूसरे मास का निर्धारित कार्य
> दिया जाता है। इस प्रकार छात्र की उन्नति उसके किए हुए कार्य पर निर्भर रहती
> है। इस योजना में छात्रों को अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार कार्य करने की छूट
> रहती है। मूल स्रोतों से अध्ययन करने के कारण उनमें स्वावलंबन भी आ जाता है।
> इस योजना के अनेक रूपांतर हुए जैस बटेविया, विनेटका आदि योजनाएँ। डेक्रौली
> योजना यद्यपि इससे पूर्व की है, फिर भी उसके सिद्धांतों में डाल्टन योजना के
> आधार पर परिवर्तन किए गए।
> >>>
> >>> वर्धा योजना या बुनियादी तालीमसंपादित करें
> >>> महात्मा जी की वर्धा योजना या बेसिक शिक्षा (बुनियादी तालीम) भी अपने ढंग
> की एक शिक्षाविधि है। गांधी जी ने देश की तत्कालीन स्थिति को देखते हुए शिक्षा
> में 'हाथ के काम' को प्रधानता दी। उनका विश्वास था कि जब तक छात्र हाथ से काम
> नहीं करता तब तक उसे श्रम का महत्व नहीं ज्ञात होता। सैद्धांतिक ज्ञान मनुष्य
> को अहंकारी एवं निष्क्रिय बना देता है। अत: बच्चों को आरंभ से ही किसी न
> किसी हस्तकौशल के द्वारा शिक्षा देनी चाहिए। हमारे देश
> में कृषिएवं कताई-बुनाई बुनियादी धंधे हैं जिनमें देश की तीन चौथाई जनता लगी
> हुई है। अत: उन्होंने इन्हीं दोनों को मूल हस्तकौशल मानकर शिक्षा में प्रमुख
> स्थान दिया। बेसिक शिक्षा की प्रमुख विशेषताएँ हैं :-
> >>> (1) मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा,
> >>> (2) हस्तकौशल केंद्रित शिक्षा,
> >>> (3) सात से 14 वर्ष तक नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा,
> >>> (4) शिक्षा स्वावलंबी हो, अर्थात् कम से कम अध्यापकों का वेतन छात्रों के
> किए हुए कार्यों की बिक्री से आ जाए।
> >>>
> >>> अंतिम सिद्धांत का बड़ा विरोध हुआ और बेसिक शिक्षा में से हटा दिया गया।
> >>>
> >>> अंग्रेजी शिक्षा ने देश के अधिकांश शिक्षित वर्ग को ऐसा पंगु बना दिया है
> कि वे हाथ से काम करना हेय मानते हैं। यही कारण है कि संपन्न तथा उच्च वर्ग के
> लोगों ने बुनियादी शिक्षा के प्रति उदासीनता दिखाई जिससे यह शिक्षा केवल
> निर्धन वर्ग के लिए रह गई है। अत: यह धीरे-धीरे असफल होती जा रही है।
> >>>
> >>> उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट है कि शिक्षणविधियाँ अनेक हैं। सबका
> प्रवर्तन किसी न किसी विशेष परिस्थिति में किसी शिक्षाशास्त्री के द्वारा हुआ
> है। वास्तव में प्रत्येक अध्यापक की अपनी शिक्षाविधि होती है जिससे व छात्रों
> को उनकी रुचि तथा योग्यता के अनुरूप ज्ञान प्रदान करता है। जो विधि जिसके लिए
> अधिक उपयोगी हो वही उसके लिए सर्वश्रेष्ठ विधि है।
> >>
> >> --
> >> 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/
> forum/hindistf
> >> Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi
> >>
> >> 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also)
> >>
> >> 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/
> Frequently_Asked_Questions
> >>
> >> 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member
> >>
> >> 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software
> >> सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर
> >> ---
> >> You received this message because you are subscribed to the Google
> Groups "HindiSTF" group.
> >> To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send
> an email to [email protected].
> >> To post to this group, send email to [email protected].
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> >> To view this discussion on the web, visit https://groups.google.com/d/
> msgid/hindistf/CAOWNnMFMCCbAN61CCw5vM9mX8zRfAF2nwivCGwVhhgjYpBx4pA%40mail.
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> >> For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.
> >
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> > 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/
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> > Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi
> >
> > 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also)
> >
> > 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/
> Frequently_Asked_Questions
> >
> > 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member
> >
> > 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see
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> > सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर
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> 40mail.gmail.com.
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> in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi
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> 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org.
> in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also)
>
> 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/
> Frequently_Asked_Questions
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> 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org.
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> 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see
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> <https://groups.google.com/d/msgid/hindistf/CAOqh_pFv3sFVKijrac75YcrNnQhXrDj0463A2TrYyWdfu9X9gw%40mail.gmail.com?utm_medium=email&utm_source=footer>
> .
> For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.
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-- 
-----------
1.ವಿಷಯ ಶಿಕ್ಷಕರ ವೇದಿಕೆಗೆ  ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಸೇರಿಸಲು ಈ  ಅರ್ಜಿಯನ್ನು ತುಂಬಿರಿ.
 - 
https://docs.google.com/formsd1Iv5fotalJsERorsuN5v5yHGuKrmpFXStxBwQSYXNbzI/viewform
2. ಇಮೇಲ್ ಕಳುಹಿಸುವಾಗ ಗಮನಿಸಬೇಕಾದ ಕೆಲವು ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ನೋಡಿ.
-http://karnatakaeducation.org.in/KOER/index.php/ವಿಷಯಶಿಕ್ಷಕರವೇದಿಕೆ_ಸದಸ್ಯರ_ಇಮೇಲ್_ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ
3. ಐ.ಸಿ.ಟಿ ಸಾಕ್ಷರತೆ ಬಗೆಗೆ ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ಈ ಪುಟಕ್ಕೆ ಭೇಟಿ ನೀಡಿ -
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:ICT_Literacy
4.ನೀವು ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶ ಬಳಸುತ್ತಿದ್ದೀರಾ ? ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶದ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿಯಲು 
-http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Public_Software
-----------
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