8 & 9th blue print send madi plz On 20-Dec-2016 10:11 AM, "Shivanand shivu" <[email protected]> wrote:
> Nice sir > > On Dec 20, 2016 8:59 AM, "Ujwala Bhajantri" <[email protected]> wrote: > > > > Thank you sir for sending these teaching methods > > > > Ujwala Patil > > > > On 08-Dec-2016 10:59 PM, "Shreenivas Naik" <shreenivasnaik.hindi.vogga@ > gmail.com> wrote: > >> > >> व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य:- > >> छात्रों को शुद्ध बोलने, लिखने तथा पढ़ने की प्रेरणा देना। छात्रों को > शुद्ध भाषा के प्रयोग सीखना। व्याकरण के द्वारा छात्रों में रचना तथा > सर्जनात्मकता। छात्रों को ध्वनियों, ध्वनियों के सूक्ष्म अन्तर शब्द योजना, > शब्द शक्तियों एवं शुद्ध वर्तनी का ज्ञान कराना। छात्रों को वाक्य रचना के > नियम, विराम चिन्हों का शुद्ध प्रयोग आदि का ज्ञान कराना। छात्रों को शब्द > सूक्ति, लोकोक्ति, मुहावरे आदि का प्रसंगानुकूल अर्थ निकालना और स्वराघात एवं > बलाघात के अनुसार अर्थ बोध कराने के योग्य बनाना। छात्रों में भाषा के गुण दोष > परखने की रूचि उत्पन्न कराना। भाषा रचना का ज्ञान प्राप्त करना। नवीन भाषा को… > >> > >> प्रत्यक्ष भाषा शिक्षण विधि :- > >> यह विधि बिना व्याकरण नियमों का ज्ञान कराए भाषा के शुद्ध रूप का अनुकरण > करने के अवसर प्रदान करता है। ऐसे लेखक जिनका भाषा पर पूर्णाधिकार है उनसे > बालकों को वार्तालाप के अवसर प्रदान किए जाते हैं, प्राथमिक स्तर के लिए एक > विधि उपयुक्त है। > >> > >> लेखन कौशल के विकास में व्याकरण का महत्व :- > >> यह बच्चों को पढ़ी या सुनी हुई बातों को शुद्ध वर्तनी तथा विराम चिन्हों का > सही प्रयोग करते हुए लेखन कौशल का विकास करने में सहायक है। यह बच्चों के लेखन > में संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विश्लेषण, प्रत्यय, उपसर्ग, तत्सम शब्द, तद्भव > शब्द आदि के प्रयोग से उनके लेखन कौशल में विकास करने में सहायक है। यह बच्चों > में विभिन्न संदर्भ शब्दों की समक्ष पैदान करने में सहायक है। यह बच्चों की > लेखन शैली में मुहावरों का प्रयोग करने का शिक्षण देकर उनके लेखन कौशल में > विकास करने में सहायक है। यह बच्चों को लेखन क्रिया मेें गद्य-पद्य में अन्तर > समझाकर… > >> > >> On Dec 8, 2016 10:38 PM, "Shreenivas Naik" <shreenivasnaik.hindi.vogga@ > gmail.com> wrote: > >>> > >>> शिक्षण विधियाँ > >>> > >>> जिस ढंग से शिक्षक शिक्षार्थी को ज्ञान प्रदान करता है > उसे शिक्षणविधि कहते हैं। "शिक्षणविधि" पद का प्रयोग बड़े व्यापक अर्थ में > होता है। एक ओर तो इसके अंतर्गत अनेक प्रणालियाँ एवं योजनाएँ सम्मिलित की जाती > हैं, दूसरी ओर शिक्षण की बहुत सी प्रक्रियाएँ भी सम्मिलित कर ली जाती हैं। > कभी-कभी लोग युक्तियों को भी विधि मान लेते हैं; परंतु ऐसा करना भूल है। > युक्तियाँ किसी विधि का अंग हो सकती हैं, संपूर्ण विधि नहीं। एक ही युक्ति > अनेक विधियों में प्रयुक्त हो सकती है। > >>> > >>> शिक्षण की विविध विधियाँसंपादित करें > >>> निगमनात्मक तथा आगमनात्मकसंपादित करें > >>> > >>> पाठ्यविषय को प्रस्तुत करने के दो ढंग हो सकते हैं। एक में छात्रों को > कोई सामान्य सिद्धांत बताकर उसकी जाँच या पुष्टि के लिए अनेक उदाहरण दिए जाते > हैं। दूसरे में पहले अनेक उदाहरण देकर छात्रों से कोई सामान्य नियम निकलवाया > जाता है। पहली विधि को निगमनात्मक विधि और दूसरी को आगमनात्मक विधि कहते हैं। > >>> > >>> संश्लेषणात्मक तथा विश्लेषणात्मकसंपादित करें > >>> > >>> दूसरे दृष्टिकोण से शिक्षणविधि के दो अन्य प्रकार हो सकते हैं। > पाठ्यवस्तु को उपस्थित करने का ढंग यदि ऐसा हैं कि पहले अंगों का ज्ञान देकर > तब पूर्ण वस्तु का ज्ञान कराया जाता है तो उसे संश्लेषणात्मक विधि कहते हैं। > जैसे हिंदीपढ़ाने में पहले वर्णमाला सिखाकर तब शब्दों का ज्ञान कराया जाता है। > तत्पश्चात् शब्दों से वाक्य बनवाए जाते हैं। परंतु यदि पहले वाक्य सिखाकर तब > शब्द और अंत में वर्ण सिखाए जाएँ तो यह विश्लेषणात्मक विधि कहलाएगी क्योंकि > इसमें पूर्ण से अंगों की ओर चलते हैं। > >>> > >>> वस्तुविधिसंपादित करें > >>> > >>> शिक्षण का एक प्रसिद्ध सूत्र हैं - "मूर्त से अमूर्त की ओर"। वास्तव में > हमें बाह्य संसार का ज्ञान अपनी ज्ञानेंद्रियों के द्वारा होता है जिनमें > नेत्र प्रमुख हैं। किसी वस्तु पर दृष्टि पड़ते ही हमें उसका सामान्य परिचय मिल > जाता है। अत: मूर्त वस्तु ज्ञान प्रदान करने का सबसे सरल साधन है। इसीलिये > आरंभ से वस्तुविधि का सहारा लिया जाता है अर्थात् बच्चों को पढ़ाने के लिए > वस्तुओं का प्रदर्शन करके उनके विषय में ज्ञान प्रदान किया जाता है। यहाँ तक > कि अमूर्त को भी मूर्त बनाने का प्रयास किया जाता है। जैसे, तीन और दो पाँच को > समझाने के लिए पहले छात्रों के सम्मुख तीन गोलियाँ रखी जाती हैं। फिर उनमें दो > गोलियाँ और मिलाकर सबको एक साथ गिनाते हैं तब तीन और दो पाँच स्पष्ट हो जाता > है। > >>> > >>> दृष्टांतविधिसंपादित करें > >>> > >>> वस्तुविधि का एक दूसरा रूप है - दृष्टांतविधि। वस्तुविधि में जिस प्रकार > वस्तुओं के द्वारा ज्ञान प्रदान किया जाता है दृष्टांतविधि में उसी > प्रकार दृष्टांतों के द्वारा। दृष्टांत दृश्य भी हो सकते हैं और श्रव्य भी। > इसमें चित्र, मानचित्र, चित्रपट आदि के सहारे वस्तु का स्पष्टीकण किया जाता > है। साथ ही उपमा, उदाहरण, कहानी, चुटकुले आदि के द्वारा भी विषय का > स्पष्टीकरण हो सकता है। > >>> > >>> कथनविधि एवं व्याख्यानविधिसंपादित करें > >>> > >>> वस्तु एवं दृष्टांतविधियों से ज्ञान प्राप्त करते करते जब बच्चों को कुछ > कुछ अनुमान करने तथा अप्रत्यक्ष वस्तु को भी समझने का अभ्यास हो जाता है > तब कथनविधि का सहारा लिया जाता है। इसमें वर्णन के द्वारा छात्रों को > पाठ्यवस्तु का ज्ञान दिया जाता है। परंतु इस विधि में छात्र अधिकतर निष्क्रिय > श्रोता बने रहते हैं और पाठन प्रभावशाली नहीं होता। इसी से प्रसिद्ध > शिक्षाशास्त्री हर्बर्ट स्पेंसर ने कहा है- "बच्चों को कम से कम बतलाना चाहिए, > उन्हें अधिक से अधिक स्वत: ज्ञान द्वारा सीखना चाहिए"। व्याख्यानविधिइसी की > सहचरी है। उच्च कक्षाओं में प्राय: व्याख्यानविधि का ही प्रयोग लाभदायक समझा > जाता है। > >>> > >>> कथनविधि में प्राय: हर्बर्ट के पाँच सोपानों का प्रयोग किया जाता है। वे > हैं > >>> > >>> (1) प्रस्तावना, (2) प्रस्तुतीकरण, (3) तुलना या सिद्धांतस्थापन, (4) > आवृत्ति, (5) प्रयोग। > >>> > >>> परंतु केवल ज्ञानार्जन के पाठों में ही पाँचों सोपानों का प्रयोग होता > है। कौशल तथा रसास्वादन के पाठों में कुछ सीमित सोपानों का ही प्रयोग होता है। > >>> > >>> प्रश्नोत्तर विधि (सुकरराती विधि)संपादित करें > >>> > >>> प्रश्न यद्यपि एक युक्ति है फिर भी सुकरात ने प्रश्नोत्तर को एक विधि के > रूप में प्रयोग करके इसे अधिक महत्व प्रदान किया है। इसी से इसे सुकराती > विधि कहते हैं। इसमें प्रश्नकर्ता से ही प्रश्न किए जाते हैं और उसके उत्तरों > के आधार पर उसी से प्रश्न करते करते अपेक्षित उत्तर निकलवा लिया जाता है। > >>> > >>> करके सीखनासंपादित करें > >>> > >>> जब से बाल मनोविज्ञान के विकास ने यह सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा केंद्र > न तो विषय है न अध्यापक वरन् छात्र है तब से शिक्षण में सक्रियता को अधिक > महत्व दिया जाने लगा है। करके सीखना (learning by doing) अर्थात् स्वानुभव > द्वारा ज्ञान प्राप्त करना आजकल का सर्वाधिक व्यापक शिक्षणसिद्धांत है। > अत: रूसों से लेकर मांटेसरी और ड्यूबीतक शिक्षाशास्त्रियों ने बच्चों की > ज्ञानेंद्रियों को अधिक कार्यशील बनाने तथा उनके द्वारा शिक्षा देने पर अधिक > बल दिया है। महात्मा गांधी ने भी इसी सिद्धांत के आधार पर बेसिक शिक्षा को > जन्म दिया। अत: सक्रिय विधि के अंतर्गत अनेक विधियाँ सम्मिलित की जा सकती हैं > जैसे- शोधविधि(ह्यूरिस्टिक), योजना (प्रोजेक्ट) विधि, डाल्टन > प्रणाली, बेसिक-शिक्षा-विधि, इत्यादि। > >>> > >>> शोधविधिसंपादित करें > >>> > >>> जर्मनी के प्रोफेसर आर्मस्ट्रौंग द्वारा शोधविधि का प्रतिपादन हुआ था। > इस विधि में छात्रों को उपयुक्त वातावरण में रखकर स्वयं किसी तथ्य को ढूढ़ने > के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका यह अर्थ नहीं है कि अध्यापक कुछ नहीं करता > और छात्रों को मनमाना काम करने को छोड़ देता है। सच पूछिए तो वह छात्र का > पथप्रदर्शन करता तथा उसे गलत रास्ते से हटाकर सीधे रास्ते पर लाता रहता है। > उसका लक्ष्य यह रहता है कि जो ज्ञान छात्र अपने निरीक्षण अथवा प्रयोग द्वारा > प्राप्त कर सकता है उसे बताया न जाए। इस विधि का प्रयोग पहले तो विज्ञान की > शिक्षा में किया गया। फिर धीरे-धीरे गणित, भूगोल तथा अन्य विषयों में भी इसका > प्रयोग होने लगा। > >>> > >>> प्रोजेक्ट विधिसंपादित करें > >>> > >>> अमरीका के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री ड्यूवी, किलपैट्रिक, स्टीवेंसन आदि के > सम्मिलित प्रयास का फल योजना (प्रोजेक्ट) विधि है। इसके अनुसार ज्ञानप्राप्ति > के लिए स्वाभाविक वातावरण अधिक उपयुक्त होता है। इस विधि से पढ़ाने के लिए > पहले कोई समस्या ली जाती है जो प्राय: छात्रों के द्वारा उठाई जाती है और उस > समस्या का हल करने के लिए उन्हीं के द्वारा योजना बनाई जाती है और योजना को > स्वाभाविक वातावरण में पूर्ण किया जाता है। इसी से इसकी परिभाषा इस प्रकार की > जाती है कि योजना वह समस्यामूलक कार्य है जो स्वाभाविक वातावरण में पूर्ण किया > जाए। > >>> > >>> डालटन योजनासंपादित करें > >>> > >>> अमरीका के डाल्टन नामक स्थान में 1912 से 1915 के बीच कुमारी हेलेन > पार्खर्स्ट्र ने शिक्षा की एक नई विधि प्रयुक्त की जिसे डाल्टन योजना कहते > हैं। यह विधि कक्षाशिक्षण के दोषों को दूर करने के लिए लिए आविष्कृत की गई थी। > डाल्टन योजना में कक्षाभवन का स्थान प्रयोगशाला ले लेती है। प्रत्येक विषय की > एक प्रयोगशाला होती है जिसमे उस विषय के अध्ययन के लिए पुस्तकें, चित्र, > मानचित्र तथा अन्य सामग्री के अतिरिक्त सन्दर्भग्रंथ भी रहते हैं। विषय का > विशेषज्ञ अध्यापक प्रयोगशाला में बैठकर छात्रों की सहायता करता, उनके कार्यों > का संशोधन तथा जाँच करता है। वर्ष भर का कार्य 9 या 10 भागों में बाँटक > निर्धारित कार्य (असाइनमेंट) के रूप में प्रत्येक छात्र को लिखित दिया जाता > है। छात्र उस निर्धारित कार्य को अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न प्रयोगशालाओं > में जाकर पूरा करता है। कार्य अन्वितियों में बँटा रहता है। जितनी अन्विति का > कार्य पूरा हो जाता है उतनी का उल्लेख उसके रेखापत्र (ग्राफकार्ड) पर किया > जाता है। एक मास का कार्य पूरा हो जाने पर ही दूसरे मास का निर्धारित कार्य > दिया जाता है। इस प्रकार छात्र की उन्नति उसके किए हुए कार्य पर निर्भर रहती > है। इस योजना में छात्रों को अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार कार्य करने की छूट > रहती है। मूल स्रोतों से अध्ययन करने के कारण उनमें स्वावलंबन भी आ जाता है। > इस योजना के अनेक रूपांतर हुए जैस बटेविया, विनेटका आदि योजनाएँ। डेक्रौली > योजना यद्यपि इससे पूर्व की है, फिर भी उसके सिद्धांतों में डाल्टन योजना के > आधार पर परिवर्तन किए गए। > >>> > >>> वर्धा योजना या बुनियादी तालीमसंपादित करें > >>> महात्मा जी की वर्धा योजना या बेसिक शिक्षा (बुनियादी तालीम) भी अपने ढंग > की एक शिक्षाविधि है। गांधी जी ने देश की तत्कालीन स्थिति को देखते हुए शिक्षा > में 'हाथ के काम' को प्रधानता दी। उनका विश्वास था कि जब तक छात्र हाथ से काम > नहीं करता तब तक उसे श्रम का महत्व नहीं ज्ञात होता। सैद्धांतिक ज्ञान मनुष्य > को अहंकारी एवं निष्क्रिय बना देता है। अत: बच्चों को आरंभ से ही किसी न > किसी हस्तकौशल के द्वारा शिक्षा देनी चाहिए। हमारे देश > में कृषिएवं कताई-बुनाई बुनियादी धंधे हैं जिनमें देश की तीन चौथाई जनता लगी > हुई है। अत: उन्होंने इन्हीं दोनों को मूल हस्तकौशल मानकर शिक्षा में प्रमुख > स्थान दिया। बेसिक शिक्षा की प्रमुख विशेषताएँ हैं :- > >>> (1) मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा, > >>> (2) हस्तकौशल केंद्रित शिक्षा, > >>> (3) सात से 14 वर्ष तक नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा, > >>> (4) शिक्षा स्वावलंबी हो, अर्थात् कम से कम अध्यापकों का वेतन छात्रों के > किए हुए कार्यों की बिक्री से आ जाए। > >>> > >>> अंतिम सिद्धांत का बड़ा विरोध हुआ और बेसिक शिक्षा में से हटा दिया गया। > >>> > >>> अंग्रेजी शिक्षा ने देश के अधिकांश शिक्षित वर्ग को ऐसा पंगु बना दिया है > कि वे हाथ से काम करना हेय मानते हैं। यही कारण है कि संपन्न तथा उच्च वर्ग के > लोगों ने बुनियादी शिक्षा के प्रति उदासीनता दिखाई जिससे यह शिक्षा केवल > निर्धन वर्ग के लिए रह गई है। अत: यह धीरे-धीरे असफल होती जा रही है। > >>> > >>> उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट है कि शिक्षणविधियाँ अनेक हैं। सबका > प्रवर्तन किसी न किसी विशेष परिस्थिति में किसी शिक्षाशास्त्री के द्वारा हुआ > है। वास्तव में प्रत्येक अध्यापक की अपनी शिक्षाविधि होती है जिससे व छात्रों > को उनकी रुचि तथा योग्यता के अनुरूप ज्ञान प्रदान करता है। जो विधि जिसके लिए > अधिक उपयोगी हो वही उसके लिए सर्वश्रेष्ठ विधि है। > >> > >> -- > >> 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/ > forum/hindistf > >> Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi > >> > >> 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also) > >> > >> 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/ > Frequently_Asked_Questions > >> > >> 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member > >> > >> 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software > >> सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर > >> --- > >> You received this message because you are subscribed to the Google > Groups "HindiSTF" group. > >> To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send > an email to [email protected]. > >> To post to this group, send email to [email protected]. > >> Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf. > >> To view this discussion on the web, visit https://groups.google.com/d/ > msgid/hindistf/CAOWNnMFMCCbAN61CCw5vM9mX8zRfAF2nwivCGwVhhgjYpBx4pA%40mail. > gmail.com. > >> For more options, visit https://groups.google.com/d/optout. > > > > -- > > 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/ > forum/hindistf > > Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi > > > > 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also) > > > > 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/ > Frequently_Asked_Questions > > > > 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member > > > > 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software > > सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर > > --- > > You received this message because you are subscribed to the Google > Groups "HindiSTF" group. > > To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send > an email to [email protected]. > > To post to this group, send email to [email protected]. > > Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf. > > To view this discussion on the web, visit https://groups.google.com/d/ > msgid/hindistf/CAMsu-cV4aK9BBm4Ffxbx0qXYAi%3DV0%2BtKCv%3DO39UrLJDKGBOGqw% > 40mail.gmail.com. > > > > For more options, visit https://groups.google.com/d/optout. > > -- > 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/ > forum/hindistf > Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi > > 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also) > > 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/ > Frequently_Asked_Questions > > 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member > > 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software > सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर > --- > You received this message because you are subscribed to the Google Groups > "HindiSTF" group. > To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an > email to [email protected]. > To post to this group, send email to [email protected]. > Visit this group at https://groups.google.com/group/hindistf. > To view this discussion on the web, visit https://groups.google.com/d/ > msgid/hindistf/CAOqh_pFv3sFVKijrac75YcrNnQhXrDj0463 > A2TrYyWdfu9X9gw%40mail.gmail.com > <https://groups.google.com/d/msgid/hindistf/CAOqh_pFv3sFVKijrac75YcrNnQhXrDj0463A2TrYyWdfu9X9gw%40mail.gmail.com?utm_medium=email&utm_source=footer> > . > For more options, visit https://groups.google.com/d/optout. > -- ----------- 1.ವಿಷಯ ಶಿಕ್ಷಕರ ವೇದಿಕೆಗೆ ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಸೇರಿಸಲು ಈ ಅರ್ಜಿಯನ್ನು ತುಂಬಿರಿ. - https://docs.google.com/formsd1Iv5fotalJsERorsuN5v5yHGuKrmpFXStxBwQSYXNbzI/viewform 2. ಇಮೇಲ್ ಕಳುಹಿಸುವಾಗ ಗಮನಿಸಬೇಕಾದ ಕೆಲವು ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ನೋಡಿ. -http://karnatakaeducation.org.in/KOER/index.php/ವಿಷಯಶಿಕ್ಷಕರವೇದಿಕೆ_ಸದಸ್ಯರ_ಇಮೇಲ್_ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ 3. ಐ.ಸಿ.ಟಿ ಸಾಕ್ಷರತೆ ಬಗೆಗೆ ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ಈ ಪುಟಕ್ಕೆ ಭೇಟಿ ನೀಡಿ - http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:ICT_Literacy 4.ನೀವು ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶ ಬಳಸುತ್ತಿದ್ದೀರಾ ? ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶದ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿಯಲು -http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Public_Software ----------- --- You received this message because you are subscribed to the Google Groups "HindiSTF" group. 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