Sir very useful On 26 Aug 2017 10:01 p.m., "Mahesh Patil" <[email protected]> wrote:
> सर जी , बहुत अच्छा इन्फॉर्मेशन आपने दिया है। बहुत बहुत धन्यवाद। > > On 26 Aug 2017 9:44 p.m., "Shreenivas Naik" <shreenivasnaik.hindi.vogga@ > gmail.com> wrote: > >> कर्ता कारक :-वाक्य में जो शब्द काम करने वाले के अर्थ में आता है, उसे >> कर्ता कहते है। दूसरे शब्द में-क्रिया का करने वाला 'कर्ता' कहलाता है। >> इसकी विभक्ति 'ने' लुप्त है। >> >> जैसे- ''मोहन खाता है।'' इस वाक्य में खाने का काम मोहन करता है अतः कर्ता >> मोहन है । >> ''मनोज ने पत्र लिखा।'' इस वाक्य क्रिया का करने वाला 'मनोज' कर्ता है। >> विशेष- कभी-कभी कर्ता कारक में 'ने' चिह्न नहीं भी लगता है। जैसे- 'घोड़ा' >> दौड़ता है। >> >> इसकी दो विभक्तियाँ है- ने और ०। संस्कृत का कर्ता ही हिन्दी का कर्ताकारक >> है। वाक्य में कर्ता का प्रयोग दो रूपों में होता है- पहला वह, जिसमें 'ने' >> विभक्ति नहीं लगती, अर्थात जिसमें क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के >> अनुसार होते हैं। इसे 'अप्रत्यय कर्ताकारक' कहते है। इसे 'प्रधान कर्ताकारक' >> भी कहा जाता है। >> >> उदाहरणार्थ, 'मोहन खाता है। यहाँ 'खाता हैं' क्रिया है, जो कर्ता 'मोहन' के >> लिंग और वचन के अनुसार है। इसके विपरीत जहाँ क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष >> कर्ता के अनुसार न होकर कर्म के अनुसार होते है, वहाँ 'ने' विभक्ति लगती है। >> इसे व्याकरण में 'सप्रत्यय कर्ताकारक' कहते हैं। इसे 'अप्रधान कर्ताकारक' भी >> कहा जाता है। उदाहरणार्थ, 'श्याम ने मिठाई खाई'। इस वाक्य में क्रिया 'खाई' >> कर्म 'मिठाई' के अनुसार आयी है। >> >> कर्ता के 'ने' चिह्न का प्रयोग कर्ताकारक की विभक्ति 'ने' है। बिना विभक्ति >> के भी कर्ताकारक का प्रयोग होता है। 'अप्रत्यय कर्ताकारक' में 'ने' का प्रयोग >> न होने के कारण वाक्यरचना में कोई खास कठिनाई नहीं होती। 'ने' का प्रयोग >> अधिकतर 'पश्र्चिमी हिन्दी' में होता है। बनारस से पंजाब तक इसके प्रयोग में >> लोगों को विशेष कठिनाई नहीं होती; क्योंकि इस 'ने' विभक्ति की सृष्टि उधर ही >> हुई है। >> >> हिन्दी भाषा की इस विभक्ति से अहिन्दीभाषी घबराते हैं। लेकिन, थोड़ी सावधानी >> रखी जाय और इसकी व्युत्पत्ति को ध्यान में रखा जाय, तो यह स्पष्ट हो जायेगा कि >> ''इसका स्वरूप तथा प्रयोग जैसा संस्कृत में है, वैसा हिन्दी में भी है, हिन्दी >> में वैशिष्टय नहीं आया।'' >> >> खड़ीबोली हिन्दी में 'ने' चिह्न कर्ताकारक में संज्ञा-शब्दों की एक विश्लिष्ट >> विभक्ति है, जिसकी स्थिति बड़ी नपी-तुली और स्पष्ट है। किन्तु, हिन्दी लिखने >> में इसके प्रयोग की भूलें प्रायः हो जाया करती हैं। 'ने' का प्रयोग केवल >> हिन्दी और उर्दू में होता है। अहिन्दीभाषियों को 'ने' के प्रयोग में कठिनाई >> होती है। >> >> यहाँ यह दिखाया गया है कि हिन्दी भाषा में 'ने' का प्रयोग कहाँ होता है और >> कहाँ नहीं होता। >> >> कर्ता के 'ने' विभक्ति-चिह्न का प्रयोग कहाँ होता ? >> >> 'ने' विभक्ति का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है। >> (i) 'ने' का प्रयोग कर्ता के साथ तब होता है, जब एकपदीय या संयुक्त क्रिया >> सकर्मक भूतकालिक होती है। केवल सामान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत, संदिग्ध >> भूत, हेतुहेतुमद् भूत कालों में 'ने' विभक्ति लगती है। जैसे- >> >> सामान्य भूत- राम ने रोटी खायी। >> आसन्न भूत- राम ने रोटी खायी है। >> पूर्ण भूत- राम ने रोटी खायी थी। >> संदिग्ध भूत-राम ने रोटी खायी होगी। >> हेतुहेतुमद् भूत- राम ने पुस्तक पढ़ी होती, तो उत्तर ठीक होता। >> >> तात्पर्य यह है कि केवल अपूर्ण भूत को छोड़ शेष पाँच भूतकालों में 'ने' का >> प्रयोग होता है। >> >> (ii) सामान्यतः अकर्मक क्रिया में 'ने' विभक्ति नहीं लगती, किन्तु कुछ ऐसी >> अकर्मक क्रियाएँ है, जैसे- नहाना, छींकना, थूकना, खाँसना- जिनमें 'ने' चिह्न >> का प्रयोग अपवादस्वरूप होता है। इन क्रियाओं के बाद कर्म नहीं आता। >> >> जैसे- उसने थूका। राम ने छींका। उसने खाँसा। उसने नहाया। >> >> (iii) जब अकर्मक क्रिया सकर्मक बन जाय, तब 'ने' का प्रयोग होता है, अन्यथा >> नहीं। >> >> जैसे- उसने टेढ़ी चाल चली। उसने लड़ाई लड़ी। >> >> (iv) जब संयुक्त क्रिया के दोनों खण्ड सकर्मक हों, तो अपूर्णभूत को छोड़ शेष >> सभी भूतकालों में कर्ता के आगे 'ने' चिह्न का प्रयोग होता है। >> >> जैसे- श्याम ने उत्तर कह दिया। किशोर ने खा लिया। >> >> (v) प्रेरणार्थक क्रियाओं के साथ, अपूर्णभूत को छोड़ शेष सभी भूतकालों में >> 'ने' का प्रयोग होता है। >> >> जैसे- मैंने उसे पढ़ाया। उसने एक रुपया दिलवाया। >> >> कर्ता के 'ने' विभक्ति-चिह्न का प्रयोग कहाँ नहीं होता ? >> >> 'ने' विभक्ति का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में नहीं होता है। >> (i) वर्तमान और भविष्यत् कालों की क्रिया में कर्ता के साथ 'ने' का प्रयोग >> नहीं होता। >> जैसे- राम जाता है। राम जायेगा। >> >> (ii) बकना, बोलना, भूलना- ये क्रियाएँ यद्यपि सकर्मक हैं, तथापि अपवादस्वरूप >> सामान्य, आसत्र, पूर्ण और सन्दिग्ध भूतकालों में कर्ता के 'ने' चिह्न का >> व्यवहार नहीं होता। >> >> जैसे- वह गाली बका। वह बोला। वह मुझे भूला। >> हाँ, 'बोलना' क्रिया में कहीं-कहीं 'ने' आता है। >> जैसे- उसने बोलियाँ बोलीं। >> 'वह बोलियाँ बोला'- ऐसा भी लिखा या कहा जा सकता है। >> >> (iii) यदि संयुक्त क्रिया का अन्तिम खण्ड अकर्मक हो, तो उसमें 'ने' का >> प्रयोग नहीं होता। >> जैसे- मैं खा चुका। वह पुस्तक ले आया। उसे रेडियो ले जाना है। >> >> (iv) जिन वाक्यों में लगना, जाना, सकना तथा चुकना सहायक क्रियाएँ आती हैं >> उनमे 'ने' का प्रयोग नहीं होता। >> जैसे- वह खा चुका। मैं पानी पीने लगा। उसे पटना जाना हैं। >> >> -- >> 1. 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