धन्यवाद On 2 Sep 2017 6:00 pm, "uma rangappanavar" <[email protected]> wrote:
> > > 2017-05-18 22:58 GMT+05:30 Shreenivas Naik <shreenivasnaik.hindi.vogga@ > gmail.com>: > >> मैं हिन्दी हूँ >> ********************* >> बहुत दुखी हूँ । समझ में नहीं आता कहां से शुरू करूं? कैसे शुरू करूं? >> मैं, जिसकी पहचान इस देश से है, इसकी माटी से है। इसके कण-कण से हैं। अपने ही >> आंगन में बेइज्जत कर दी जाती हूं! कहने को संविधान के अनुच्छेद 343 में मुझे >> राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। >> >> अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का यह कर्तव्य है कि वह मेरा प्रसार बढ़ाएं। पर >> आज यह सब मुझे क्यों कहना पड़ रहा है? नहीं जानती थी मेरा किसी 'राज्य-विशेष' >> में किसी की 'जुबान' पर आना अपराध हो सकता है। >> >> मन बहुत दुखता है जब मुझे अपनी ही संतानों को यह बताना पड़े कि मैं भारत के >> 70 प्रतिशत गांवों की अमराइयों में महकती हूं। मैं लोकगीतों की सुरीली तान में >> गुंजती हूं। मैं नवसाक्षरों का सुकोमल सहारा हूं। मैं जनसंचार का स्पंदन हूं। >> >> मैं कलकल-छलछल करती नदिया की तरह हर आम और खास भारतीय ह्रदय में प्रवाहित >> होती हूं। मैं मंदिरों की घंटियों, मस्जिदों की अजान, गुरुद्वारे की शबद और >> चर्च की प्रार्थना की तरह पवित्र हूं। क्योंकि मैं आपकी, आप सबकी-अपनी हिन्दी >> हूं। >> >> विश्वास करों मेरा कि मैं दिखावे की भाषा नहीं हूं, मैं झगड़ों की भाषा भी >> नहीं हूं। मैंने अपने अस्तित्व से लेकर आज तक कितनी ही सखी भाषाओं को अपने >> आंचल से बांध कर हर दिन एक नया रूप धारण किया है। फारसी, अरबी, उर्दू से लेकर >> 'आधुनिक बाला' अंग्रेजी तक को आत्मीयता से अपनाया है। >> >> सखी भाषा का झगड़ा मेरे लिए नया नहीं है। इससे पहले भी मेरी दक्षिण भारतीय >> 'बहनों' की संतानों ने यह स्वर उठाया था, मैंने हर बार शांत और धीर-गंभीर रह >> कर मामले को सहजता से सुलझाया है। लेकिन इस बार मेरी अनन्य सखी मराठी की >> संतानें मेरे लिए आतंक बन कर खड़ी है। इस समय जबकि सारे देश में विदेशी ताकतों >> का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में आपसी दीवारों का टकराना क्या उचित है? >> >> लेकिन कैसे समझाऊं और किस-किस को समझाऊं? महाराष्ट्र में 'कोई' दम ठोंक कर >> कहता है कि मेरा अस्तित्व मिटा देगा। मैं क्या कल की आई हुई कच्ची-पक्की बोली >> हूं जो मेरा नामोनिशान मिटा दोगे? मैं इस देश के रेशे-रेशे में बुनी हुई, >> अंश-अंश में रची-बसी ऐसी जीवंत भाषा हूं जिसका रिश्ता सिर्फ जुबान से नहीं दिल >> की धड़कनों से हैं। >> >> मेरे दिल की गहराई का और मेरे अस्तित्व के विस्तार का तुम इतने छोटे मन वाले >> भला कैसे मूल्यांकन कर पाओगे? इतिहास और संस्कृति का दम भरने वाले छिछोरी >> बुद्धि के प्रणेता कहां से ला सकेंगे वह गहनता जो अतीत में मेरी महान संतानों >> में थी। >> >> मैंने तो कभी नहीं कहा कि बस मुझे अपनाओ। बॉलीवुड से लेकर पत्रकारिता तक और >> विज्ञापन से लेकर राजनीति तक हर एक ने नए शब्द गढ़े, नए शब्द रचें, नई परंपरा, >> नई शैली का ईजाद किया। मैंने कभी नहीं सोचा कि इनके इस्तेमाल से मुझमें विकार >> या बिगाड़ आएगा। >> >> मैंने खुले दिल से सब भाषा का,भाषा के शब्दों का, शैली और लहजे का स्वागत >> किया। यह सोचकर कि इससे मेरा ही विकास हो रहा है। मेरे ही कोश में अभिवृद्धि >> हो रही है। अगर मैंने भी इसी संकीर्ण सोच को पोषित किया होता कि दूसरी भाषा के >> शब्द नहीं अपनाऊंगी तो भला उद्दाम आवेग से इठलाती-बलखाती यहां तक कैसे पहुंच >> पाती? >> >> मैंने कभी किसी भाषा को अपना दुश्मन नहीं समझा। किसी भाषा के इस्तेमाल से >> मुझमें असुरक्षा नहीं पनपी। क्योंकि मैं जानती थी कि मेरे अस्तित्व को किसी से >> खतरा नहीं है। पर महाराष्ट्र से छनकर आते घटनाक्रमों से एक पल के लिए मेरा यह >> विश्वास डोल गया। >> >> पिछले दिनों मैं और मेरी सखी भाषाएं मिलकर त्रिभाषा फार्मूला पर सोच ही रही >> थी। लेकिन इसका अर्थ यह तो कतई नहीं था कि हमारी संतान एक-दूसरे के विरुद्ध >> नफरत के खंजर निकाल लें। यह कैसा भाषा-प्रेम है? >> >> यह कैसी भाषाई पक्षधरता है? क्या 'मां' से प्रेम दर्शाने का यह तरीका है कि >> 'मौसी' की गोद में बैठने पर अपने ही भाई को दुश्मन समझ बैठो। क्या लगता है >> आपको, इससे 'मराठी' खुश होगी? नहीं हो सकती। >> >> हम सारी भाषाएं संस्कृत की बेटियां हैं। बड़ी बेटी का होने का सौभाग्य मुझे >> मिला, लेकिन इससे अन्य भाषाओं का महत्व कम तो नहीं हो जाता। और यह भी तो सच है >> ना कि मुझे अपमानित करने से मराठी का महत्व बढ़ तो नहीं जाएगा? >> >> यह कैसा भाषा गौरव है जो अपने अस्तित्व को स्थापित करने के लिए स्थापित भाषा >> को उखाड़ देने की धृष्टता करें। मुझे कहां-कहां पर प्रतिबंधित करोगे? पूरा >> महाराष्ट्र तो बहुत दूर की बात है अकेली मुंबई से मुझे निकाल पाना संभव नहीं >> है। >> >> बरसों से भारतीय दर्शकों का मनोरंजन कर रही फिल्म इंडस्ट्री से पूछ कर देख >> लों कि क्या मेरे बिना उसका अस्तित्व रह सकेगा? कैसे निकालोगे लता के सुरीले >> कंठ से, गुलजार की चमत्कारिक लेखनी से? >> >> कोई और रचनात्मक काम क्यों नहीं करते 'मराठी पुत्र'? जो 'मन' से सबको भाए ना >> कि 'मनसे' सबको डराए। अपनी सोच को थोड़ा सा विस्तार दो, मैं आपकी भी तो हूं। >> बस इतना ही, .. >> 1832/मगसम.🇮🇳 >> >> -- >> ----------- >> 1.ವಿಷಯ ಶಿಕ್ಷಕರ ವೇದಿಕೆಗೆ ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಸೇರಿಸಲು ಈ ಅರ್ಜಿಯನ್ನು ತುಂಬಿರಿ. >> - https://docs.google.com/forms/d/1Iv5fotalJsERorsuN5v5yHGuKrm >> pFXStxBwQSYXNbzI/viewform >> 2. ಇಮೇಲ್ ಕಳುಹಿಸುವಾಗ ಗಮನಿಸಬೇಕಾದ ಕೆಲವು ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ನೋಡಿ. >> -http://karnatakaeducation.org.in/KOER/index.php/ವಿಷಯಶಿಕ್ಷಕರ >> ವೇದಿಕೆ_ಸದಸ್ಯರ_ಇಮೇಲ್_ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ >> 3. ಐ.ಸಿ.ಟಿ ಸಾಕ್ಷರತೆ ಬಗೆಗೆ ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ಈ ಪುಟಕ್ಕೆ ಭೇಟಿ >> ನೀಡಿ - >> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:ICT_Literacy >> 4.ನೀವು ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶ ಬಳಸುತ್ತಿದ್ದೀರಾ ? ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶದ ಬಗ್ಗೆ >> ತಿಳಿಯಲು -http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Public_ >> Software >> ----------- >> --- >> You received this message because you are subscribed to the Google Groups >> "HindiSTF" group. >> To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an >> email to [email protected]. >> To post to this group, send email to [email protected]. >> For more options, visit https://groups.google.com/d/optout. >> > > > > -- > uma rangappanavar > Govt high school > Kalakeri > Tq/Dist; Dharwad > > -- > 1. 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If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org. > in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member > > ----------- > 1.ವಿಷಯ ಶಿಕ್ಷಕರ ವೇದಿಕೆಗೆ ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಸೇರಿಸಲು ಈ ಅರ್ಜಿಯನ್ನು ತುಂಬಿರಿ. > - https://docs.google.com/forms/d/1Iv5fotalJsERorsuN5v5yHGuKrmpF > XStxBwQSYXNbzI/viewform > 2. ಇಮೇಲ್ ಕಳುಹಿಸುವಾಗ ಗಮನಿಸಬೇಕಾದ ಕೆಲವು ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ನೋಡಿ. > -http://karnatakaeducation.org.in/KOER/index.php/ವಿಷಯಶಿಕ್ > ಷಕರವೇದಿಕೆ_ಸದಸ್ಯರ_ಇಮೇಲ್_ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ > 3. ಐ.ಸಿ.ಟಿ ಸಾಕ್ಷರತೆ ಬಗೆಗೆ ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ಈ ಪುಟಕ್ಕೆ ಭೇಟಿ > ನೀಡಿ - > http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:ICT_Literacy > 4.ನೀವು ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶ ಬಳಸುತ್ತಿದ್ದೀರಾ ? ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶದ ಬಗ್ಗೆ > ತಿಳಿಯಲು -http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/ > Public_Software > ----------- > --- > You received this message because you are subscribed to the Google Groups > "HindiSTF" group. > To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an > email to [email protected]. > To post to this group, send email to [email protected]. > For more options, visit https://groups.google.com/d/optout. > -- 1. 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