** <http://way2wisdom.wordpress.com/> ** ** ज्योतिष 4 अयन, ऋतु, मास
*अयन* *अयन दो हैं, “उत्तरायण” तथा “दक्षिणायन”। सूर्य नारायण जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो वे उत्तरायण कहलाते हैं और जब कर्क में प्रवेश करते हैं तो दक्षिणायन कहे जाते हैं। प्रत्येक अयन में सूर्य भचक्र पर ६ राशियों में भ्रमण करते हैं। उत्तरायण के समय “मकर से मिथुन” छः राशियों और दक्षिणायन के समय “कर्क से धनु” छः राशियों में सूर्य का गोचर होता है।* * * *वास्तव में पृथ्वी उत्तरायण या दक्षिणायन होती है लेकिन अध्ययन या समझाने की सुविधा के लिए सूर्य को उत्तरायण या दक्षिणायन कहा जाता है। जब हमारा उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर झुका होता है उस समय को उत्तरायण और जब पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य के किरणे अधिक पड़ती हैं तो उस समय सूर्य को दक्षिणायन कहते हैं।* * * *समस्त शुभ कार्यों के लिए उत्तरायण सूर्य शुभ माना जाता है। यहां तक की जन्म तथा मृत्यु के लिए भी उत्तरायण सूर्य शुभ होता है। हर वर्ष लगभग १४ जनवरी से १५ जुलाई तक सूर्य नारायण उत्तरायण होते हैं।* * * *पाप ग्रह दक्षिणायन में तथा शुभ ग्रह उत्तरायण होने पर बली होते हैं।* * * * * *ऋतु* *हमारे पंचांगों के अनुसार वर्ष में दो-दो महीने की छः (६) ऋतुएं होती हैं।* * ऋतु ग्रह चान्द्र मास* *१. वसंत शुक्र चैत्र-वैशाख (Spring) March-May* *२. ग्रीष्म मं+सू ज्येष्ठ-अषाढ़ (Summer) May-July* *३. वर्षा चन्द्र श्रावण-भाद्रपद (Rainy) July-Sept* *४. शरद बुध आश्विन-कार्तिक (Autumn) Sept-Nov* *५. हेमन्त गुरु मार्गशीर्ष-पौष (Winter) Nov-January* *६. शिशिर शनि माघ-फाल्गुन (Cool) January-March* * * *मास (चाँद के महीने)* *चन्द्र के अनुसार एक वर्ष में बारह महीने होते हैं। चन्द्र का वर्ष (३५४ दिन) सूर्य के वर्ष (३६५) से ग्यारह दिन छोटा होता है, इसका तालमेल बिठाने के लिए किसी-किसी चन्द्र-वर्ष में एक मास अधिक होता है, जोकि अधिक-मास नाम से जाना जाता है। अधिक-मास को और बहुत से नामों से पुकारा जाता हैं।* * * *अधिक-मास, लीप-इयर की २९फरवरी की तरह हैं, लेकिन अधिम-मास चार वर्ष के बाद न होकर ढाई वर्ष (३० महीने) बाद होता है। इसलिए हर दो-तीन वर्ष बाद १३ महीनों का संवत् (वर्ष) होता है। जिस वर्ष में अधिक-मास जिस मौसम में पड़ता है, उस वर्ष वह मौसम भी एक महीना लम्बा हो जाता है।* * * *अधिक मास को आध्यात्मिक विकास के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अधिक-मास में कीर्तन-भजन, ध्यान, उपासना, धार्मिक कृत्य, यज्ञ, अनुष्ठान आदि अधिक से अधिक करने चाहिए। लेकिन इस माह में भौतिक सुख-समृद्धि के लिए यज्ञ-अनुष्ठान या क्रिया-कलाप नहीं होते।* * * *किसी महीनें की पूर्णिमा के दिन चन्द्र जिस नक्षत्र पर होता है, उसी नक्षत्र के नाम पर उस महीने का नाम होता है।* * * *चन्द्र मास नक्षत्र* *१. चैत्र (March-April) चित्रा* *२. वैशाख (April-May) विशाखा* *३. ज्येष्ठ (May-June) ज्येष्ठा* *४. अषाढ़ (July-August) पूर्वा षाढा* *५. श्रावण (August-Sept) श्रवण* *६. भाद्रपद (Sept-Oct) पूर्वा भाद्रपद* *७. आश्विन (Oct-Nov) अश्विनी* *८. कार्तिक (Nov-Dec) कृतिका* *९. मार्गशीर्ष (Dec-Jan) मृगशिरा* *१०. पौष (Jan-Feb) पुष्य* *११. माघ (Feb-Mar) मघा* *१२. फाल्गुन (Mar-April) पूर्वा फाल्गुनी -- Service Above Self cnu.pne *
