भोलेशंकर की आराधना का विशेष पर्व महाशिवरात्रि इस बार दुर्लभ संयोग के साथ आ रही 
है। वैदिक पंडितों ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि लगभग 100 साल बाद ऐसा संयोग बन 
रहा है, जिसमें भगवान शंकर का पूजन अभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होगा। 24 
फरवरी को हिंदी महीने के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व 
मनाया जाएगा। 

इस बार प्रदोष के दिन शिवरात्रि के संयोग को विशेष माना जा रहा है। शुक्रवार का 
दिन होने से श्रवण नक्षत्र के साक्षी सवार्थ सिद्धि योग, अमृत योग और त्रियोदशी 
प्रदोष का योग भक्तों को एश्वर्य एवं भौतिक सुखों में उन्नति व वृद्धि दिलाएगा। 
कालसर्प दुर करने का भी इस दिन श्रेष्ठ मुहूर्त है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्यारेदेव 
पंडा का मानना है कि शिवरात्रि में रात्रि के चारों पहर भगवान शंकर का पूजन अभिषेक 
करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही गृहगत परिस्थितियों से भी 
छुटकारा मिलता है। धर्मग्रंथों के अनुसार शिवरात्रि को ही भगवान शंकर का पार्वती 
के साथ विवाह हुआ था। यही कारण है कि इस दिन भगवान शंकर की दूल्हे के रूप में पूजा 
की जाती है। इसे शिव की सबसे प्रिय रात भी माना जाता है। बेलपत्र, दूध से भगवान का 
पूजन, उपवास तथा रात्रि जागरण करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस मौके पर 
शिवालयों में विशेष पूजा पाठ के साथ भजन-कीर्तन की तैयारी की गई है। इसके साथ कई 
जगहों पर प्राचीन मंदिरों में मेले का आयोजन भी होगा। 

हिन्दी मास के अनुसार त्रयोदशी को होता है प्रदोष 

हिन्दी मास के अनुसार त्रयोदशी तेरहवें दिन को प्रदोष माना गया है। इसे प्रदोष 
कहने का आशय संध्या में होने वाले प्रदोष काल से है । यह दिन शिव उपासना का माना 
जाता है । जिसमें उपवास तथा अभिषेक आदि का महत्व है । प्रदोष के दिन की 
महाशिवरात्रि का होना विशेष फलकारी माना जाता है। 
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