Yeah Hindu mythology is great as it connects Gods with animals. marrying a male Goat, being with a horse to get a child, ridiculous cheers. On 2/3/16, avinash shahi <[email protected]> wrote: > Interesting to know that Prior to Dritirashtra Gandhari marriage, > Gandhari was married to a male goat! Indian mythology is the best,I'd > say :( > And the king Dhritirashtra was born blind cause he ordered for the > stoning of a sea-bird is farce. > http://www.jagran.com/spiritual/sant-saadhak-why-dhritarashtra-was-born-blind-13528141.html > > स वजह से धृतराष्ट्र जन्म से ही अंधे थे महाभारत में धृतराष्ट्र अंधे थे, > लेकिन उन्हें यह अंधापन पिछले जन्म में मिले एक श्राप के कारण मिला था। > धृतराष्ट्र ने ही गांधारी के परिवार को मरवाया था। लेकिन क्यों मिला था > उन्हें अंधें होने का श्राप और क्यों मरवाया था उन्होंने अपनी पत्नी > गांधारी के परिवार को? आइये जानते है धृतराष्ट्र से जुडी कुछ ऐसी ही खास > बातें- > > > भीम ने धृतराष्ट्र के प्रिय पुत्र दुर्योधन और दु:शासन को बड़ी निर्दयता > से मार डाला था, इस कारण धृतराष्ट्र भीम को भी मार डालना चाहते थे। जब > युद्ध समाप्त हो गया तो श्रीकृष्ण के साथ युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल > और सहदेव महाराज धृतराष्ट्र से मिलने पहुंचे। युधिष्ठिर ने धृतराष्ट्र को > प्रणाम किया और सभी पांडवों ने अपने-अपने नाम लिए, प्रणाम किया। > श्रीकृष्ण महाराज के मन की बात पहले से ही समझ गए थे कि वे भीम का नाश > करना चाहते हैं। धृतराष्ट्र ने भीम को गले लगाने की इच्छा जताई तो > श्रीकृष्ण ने तुरंत ही भीम के स्थान पर भीम की लोहे की मूर्ति आगे बढ़ा > दी। धृतराष्ट्र बहुत शक्तिशाली थे, उन्होंने क्रोध में आकर लोहे से बनी > भीम की मूर्ति को दोनों हाथों से दबोच लिया और मूर्ति को तोड़ डाला। > > मूर्ति तोड़ने की वजह से उनके मुंह से भी खून निकलने लगा और वे जमीन पर > गिर गए। कुछ ही देर में उनका क्रोध शांत हुआ तो उन्हें लगा की भीम मर गया > है तो वे रोने लगे। तब श्रीकृष्ण ने महाराज से कहा कि भीम जीवित है, आपने > जिसे तोड़ा है, वह तो भीम के आकार की मूर्ति थी। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने > भीम के प्राण बचा लिए। > > धृतराष्ट्र थे जन्म से अंधे > > महाराज शांतनु और सत्यवती के दो पुत्र हुए विचित्रवीर्य और चित्रांगद। > चित्रांगद कम आयु में ही युद्ध में मारे गए। इसके बाद भीष्म ने > विचित्रवीर्य का विवाह काशी की राजकुमारी अंबिका और अंबालिका से करवाया। > विवाह के कुछ समय बाद ही विचित्रवीर्य की भी बीमारी के कारण मृत्यु हो > गई। अंबिका और अंबालिका संतानहीन ही थीं तो सत्यवती के सामने यह संकट > उत्पन्न हो गया कि कौरव वंश आगे कैसे बढ़ेगा। > > वंश को आगे बढ़ाने के लिए सत्यवती ने महर्षि वेदव्यास से उपाय पूछा। तब > वेदव्यास से अपनी दिव्य शक्तियों से अंबिका और अंबालिका से संतानें > उत्पन्न की थीं। अंबिका ने महर्षि के भय के कारण आंखें बद कर ली थी तो > इसकी अंधी संतान के रूप में धृतराष्ट्र हुए। दूसरी राजकुमारी अंबालिका भी > महर्षि से डर गई थी और उसका शरीर पीला पड़ गया था तो इसकी संतान पाण्डु > हुई। पाण्डु जन्म से ही कमजोर थे। दोनों राजकुमारियों के बाद एक दासी पर > भी महर्षि वेदव्यास ने शक्तिपात किया था। उस दासी से संतान के रूप में > महात्मा विदुर उत्पन्न हुए। > > एक श्राप के कारण धृतराष्ट्र जन्मे थे अंधे : > > धृतराष्ट्र अपने पिछले जन्म मैं एक बहुत दुष्ट राजा था। एक दिन उसने देखा > की नदी मैं एक हंस अपने बच्चों के साथ आराम से विचरण कर रहा हे। उसने > आदेश दिया की उस हंस की आँख फोड़ दी जायैं और उसके बच्चों को मार दिया > जाये। इसी वजह से अगले जन्म मैं वह अंधा पैदा हुआ और उसके पुत्र भी उसी > तरह मृत्यु को प्राप्त हुये जैसे उस हंस के। > > अंधे होने के कारण धृतराष्ट्र से पहले पाण्डु बने थे राजा > > धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर के पालन-पोषण का भार भीष्म के ऊपर था। तीनों > पुत्र बड़े हुए तो उन्हें विद्या अर्जित करने भेजा गया। धृतराष्ट्र बल > विद्या में श्रेष्ठ हुए, पाण्डु धनुर्विद्या में और विदुर धर्म और नीति > में पारंगत हो गए। तीनों पुत्र युवा हुए तो बड़े पुत्र धृतराष्ट्र को > नहीं, बल्कि पाण्डु को राजा बनाया गया, क्योंकि धृतराष्ट्र अंधे थे और > विदुर दासी पुत्र थे। पाण्डु की मृत्यु के बाद धृतराष्ट्र को राजा बनाया > गया। धृतराष्ट्र नहीं चाहते थे कि उनके बाद युधिष्ठिर राजा बने, बल्कि वे > चाहते थे कि उनका पुत्र दुर्योधन राजा बने। इसी कारण वे लगातार पाण्डव > पुत्रों की उपेक्षा करते रहे। > > गांधार की राजकुमारी से विवाह > > भीष्म ने धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी गांधारी से कराया था। > विवाह से पूर्व गांधारी को ये बात मालूम नहीं थी कि धृतराष्ट्र अंधे हैं। > जब गांधारी को ये बात मालूम हुई तो उसने भी अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। > अब पति और पत्नी दोनों अंधे के समान हो गए थे। धृतराष्ट्र और गांधारी के > सौ पुत्र और एक पुत्री थी। दुर्योधन सबसे बड़ा और सबसे प्रिय पुत्र था। > दुर्योधन के प्रति धृतराष्ट्र को अत्यधिक मोह था। इसी मोह के कारण > दुर्योधन के गलत कार्यों पर भी वे मौन रहे। दुर्योधन की गलत इच्छाओं को > पूरा करने के लिए भी हमेशा तैयार रहते थे। यही मोह पूरे वंश के नाश का > कारण बना। > > धृतराष्ट्र ने मरवाया था गांधारी के परिवार को > > ध्रतराष्ट्र का विवाह गांधार देश की गांधारी के साथ हुआ था। गंधारी की > कुंडली मैं दोष होने की वजह से एक साधु के कहे अनुसार उसका विवाह पहले एक > बकरे के साथ किया गया था। बाद मैं उस बकरे की बलि दे दी गयी थी। यह बात > गांधारी के विवाह के समय छुपाई गयी थी. जब ध्रतराष्ट्र को इस बात का पता > चला तो उसने गांधार नरेश सुबाला और उसके 100 पुत्रों को कारावास मैं डाल > दिया और काफी यातनाएं दी। > > एक एक करके सुबाला के सभी पुत्र मरने लगे। उन्हैं खाने के लिये सिर्फ > मुट्ठी भर चावल दिये जाते थे। सुबाला ने अपने सबसे छोटे बेटे शकुनि को > प्रतिशोध के लिये तैयार किया। सब लोग अपने हिस्से के चावल शकुनि को देते > थे ताकि वह जीवित रह कर कौरवों का नाश कर सके। मृत्यु से पहले सुबाला ने > ध्रतराष्ट्र से शकुनि को छोड़ने की बिनती की जो ध्रतराष्ट्र ने मान ली। > सुबाला ने शकुनि को अपनी रीढ़ की हड्डी क पासे बनाने के लिये कहा, वही > पासे कौरव वंश के नाश का कारण बने। > > शकुनि ने हस्तिनापुर मैं सबका विश्वास जीता और 100 कौरवों का अभिवावक > बना। उसने ना केवल दुर्योधन को युधिष्ठिर के खिलाफ भडकाया बल्कि महाभारत > के युद्ध का आधार भी बनाया। > > धृतराष्ट्र चले गए वन में > > युद्ध के बाद धृतराष्ट्र और गांधारी, पांडवों के साथ एक ही महल रहने लगे > थे। भीम अक्सर धृतराष्ट्र से ऐसी बातें करते थे जो कि उन्हें पसंद नहीं > थीं। भीम के ऐसे व्यवहार से धृतराष्ट्र बहुत दुखी रहने लगे थे। वे > धीरे-धीरे दो दिन या चार दिन में एक बार भोजन करने लगे। इस प्रकार पंद्रह > वर्ष निकल गए। फिर एक दिन धृतराष्ट्र के मन में वैराग्य का भाव जाग गया > और वे गांधारी के साथ वन में चले गए। > > -- > Avinash Shahi > Doctoral student at Centre for Law and Governance JNU > > Register at the dedicated AccessIndia list for discussing accessibility of > mobile phones / Tabs on: > http://mail.accessindia.org.in/mailman/listinfo/mobile.accessindia_accessindia.org.in > > > Search for old postings at: > http://www.mail-archive.com/[email protected]/ > > To unsubscribe send a message to > [email protected] > with the subject unsubscribe. > > To change your subscription to digest mode or make any other changes, please > visit the list home page at > http://accessindia.org.in/mailman/listinfo/accessindia_accessindia.org.in > > > Disclaimer: > 1. 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-- "It doesn't matter what we have, but it really matters what we do with what we have." With Sincere Regards Balanagendran. D IAS Aspirant Skype: balanagendran Twitter: http://twitter.com/balanagendran89 Register at the dedicated AccessIndia list for discussing accessibility of mobile phones / Tabs on: http://mail.accessindia.org.in/mailman/listinfo/mobile.accessindia_accessindia.org.in Search for old postings at: http://www.mail-archive.com/[email protected]/ To unsubscribe send a message to [email protected] with the subject unsubscribe. To change your subscription to digest mode or make any other changes, please visit the list home page at http://accessindia.org.in/mailman/listinfo/accessindia_accessindia.org.in Disclaimer: 1. Contents of the mails, factual, or otherwise, reflect the thinking of the person sending the mail and AI in no way relates itself to its veracity; 2. AI cannot be held liable for any commission/omission based on the mails sent through this mailing list..
