http://m.jagran.com/news/Agra-11759341.html
जागरण संवाददाता, आगरा: अंतदृष्टि संगठन और ब्लाइंड स्टार्स संस्था
द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अधिवेशन ब्लाइंड स्टार बियांड फेसबुक ब्रिजिंग
द गैप के दूसरे दिन भी नेत्रहीनों में जज्बा दिखाई दिया। उन्होंने कई
महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। ताकि उनके जीवन में कभी दुख की छाया तक
नहीं आए।

डॉ.बीआर अंबेडकर विवि के गोल्डन जुबली हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में
शनिवार को हुई गोष्ठी का विषय रहा दृष्टिहीन युवतियों के लिए चुनौतियां।
जिसमें कहा गया है कि आज भी नेत्रहीन युवतियों के लिए उनका घर कैदखाना
है। जिसे खत्म करना चाहिए। जो नेत्रहीन लड़की घर से बाहर निकल कर पढ़ाई
करती है, वह साहस का काम है।

इस गोष्ठी में आइबीएम में परियोजना समन्वयक नेहा अग्रवाल, स्टेट बैंक
पटियाला देहरादून में क्लर्क खुशी नेगी, पंजाब नेशनल बैंक, दिल्ली में
सहायक मैनेजर मो.खालिद, निकिता पाटिल आदि ने विचार व्यक्त किये। नेशनल
चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अतुल गुप्ता, होटल क्लार्क शिराज के एचआर हेड
प्रदीप ओबराय भी मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत अखिल श्रीवास्तव ने,
संचालन पत्रकार प्रशांत टंडन ने व धन्यवाद ज्ञापन डॉ.मुकुल श्रीवास्तव ने
किया।

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अधिकार पीछे-पीछे आएंगे

सिल्वर लाइनिंग्स की डायरेक्टर

प्रीति मोंगा दृष्टिहीन हैं, उन्होंने कहा कि खुद दृष्टिहीन लड़के ही
दृष्टिहीन लड़कियों से विवाह नहीं करना चाहते है। पहले से ही समाज में
उनकी स्थिति काफी खराब होती है। ऐसे में और घुटन महसूस करने लगती हैं।
लेकिन अपने कार्य करते रहे तो अधिकार अपने आप पीछे आएंगे।

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शिक्षा तो सबके लिए जरूरी

सेंटर फॉर ब्लांइड वूमेन की संस्थापक शालिनी खन्ना ने बताया कि वह दिल्ली
में संस्थान चला रही है, जिसमें से निकल काफी युवतियां देश के कई नामचीन
विश्वविद्यालय में हैं। लेकिन अभिभावकों को जागरूक होना पड़ेगा।

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दृष्टिहीनों ने बजाया बैंड

अधिवेशन के तहत दिल्ली गेट स्थित गोवर्धन होटल में एक शाम संगीत के नाम
रखी गई। जिसमें दृष्टिहीनों के बैंड ने विभिन्न गानों पर धुन निकाली, जिस
पर श्रोता झूम उठे।

बैंड के प्रमुख गोकुल चांद ने बताया कि पिछले 4 वर्षो से बैंड चला रहे
है। बैंड में 9 कलाकार हैं, जिनमें गायक, गिटार, ढोल, ऑक्टापेड वादक हैं।
इनमें गायक को छोड़कर सभी दृष्टिहीन है। देश में कई नगरों में स्टेज शो कर
चुके है। उनका कहना है दृष्टिहीनों का बैंड होने के चलते कई दिक्कत आती
हैं। जल्दी कोई काम नहीं देता, लेकिन जब एक बार कोई उनका गाय


-- 
Avinash Shahi
Doctoral student at Centre for Law and Governance JNU
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