Hi Farid,
            Thank you for posting such a nice poem. I recited your
poem to many friends, and they liked it so much!
            We are anxiously waiting for your TV Serial.
            Congratulations. Expecting to read from you more.

regards
Zulfikar
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पानी

खबर आई है कि कुएँ बंद किए जा रहे हैं,
जहाँ से गुज़रने वाला कोई भी राहगीर,
किसी से भी पानी माँग लिया करता था।

वैज्ञानिकों के दल ने बताया है,
कि इसमें आयरन की कमी है,
मिनिरलस का अभाव है,
बुखार होने का खतरा है।

अब इस कुएँ के पानी से,
सूर्य को अर्घ्य नहीं दिया जा सकेगा,
उठा देनी पड़ेगी रस्म गुड़ और पानी की।

सील कर दिये कुएँ,
रोक दी गई सिचाई।

सूखी धरती पर,
चिलचिलाती धूप में बैठी,
आँखें मिचमिचाते हुए अम्मा ने बताया,
चेहरे से उतर गया पानी,
नालियों में बह गया पानी,
आँखों का सूख गया पानी,
प्लास्टिक में बिक गया पानी।
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-फरीद खान
[* फ़रीद पटना के रहने वाले हैं.. उर्दू में एम ए और लखनऊ से भारतेन्दु
नाट्य
अकादमी से नाट्य कला में डिप्लोमा करने के बाद पिछले पाँच साल से मुम्बई
में
हैं.. फिल्म्स एवं टेलेवीज़न के लिए लिख कर अपनी रोज़ी कमाते हैं.  आजकल
चाणक्य
फेम चन्द्र प्रकाश दुइवेदी जी के नीर्देशन में 'उपनिषद गंगा' नामक
टेलिविज़न
सीरीज़ के लीए वेदंतीक दर्शन पर कार्य कर रहे हैं. कविताएं लिखते रहे
हैं.. पर
कभी छ्पाई नहीं.पानी जैसे मूलभूत तत्व के प्रति श्रद्धांजलि के तौर पर
फ़रीद खान
की क़लम से एक कविता फूटी है.. आप सब की नज़र है. *]
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