[8/21, 2:20 PM] Srinivas Bantwal Hindi: नुक्ता:- उर्दू भाषा से हिन्दी भाषा में आए क ख ग ज फ वर्ण को अलग से बताने के लिए इनके नीचे एक बिन्दु का प्रयोग (क़, ख़,ग़, ज़, फ़) किया जाता है। इस नीचे लगने वाले बिन्दु को नुक्ता कहते हैं।
· इस नुक्ता के प्रयोग से उस वर्ण के उच्चारण पर अधिक दबाव आ जाता है। जैसे गज हिन्दी का शब्द है जिसका अर्थ हाथी होता है। गज़ लिखे जाने पर इसका अर्थ एक नाप (Yards) के लिए हो जाता है। नुक्ता के प्रयोग के कुछ उदाहरण - ज़ - इज़रायल, रिलीज़, ब्लेज़र, ज़ज, कमज़ोर, मज़दूर, जि़ंदगी,इज़्ज़त, मरीज़, ज़ुल्म, ज़रा, ज़ेवर, ज़ोरदार, जु़ल्फ आदि। फ़ - फादर, फीचर, फ़्रेंच, फ़ोटो, फ़र्ज़, फ़रियाद, फ़तवा, फ़जीहत,फ़कीर, फ़रमान, फ़रमाइश आदि। (अंग्रेजी भाषा में ज और फ के उच्चारण पर दबाव को बताने के लिए नुक्ता का प्रयोग होता है।) [8/21, 2:22 PM] Srinivas Bantwal Hindi: किसी व्यंजन अक्षर के नीचे लगाये जाने वाले बिंदु को नुक्ता कहते हैं। उर्दू, अरबी, फ़ारसी भाषा से हिन्दी भाषा में आए क ख ग ज फ वर्ण को अलग से बताने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है क्योंकि इन भाषाओँ से लिए गए शब्दों को हिन्दी में उच्चारित सही से नहीं किया जा सकता था। नुक्ता के प्रयोग से उस वर्ण के उच्चारण पर अधिक दबाव आ जाता है। जैसे: ‘खुदा’ का अर्थ है हिंदी में ‘खुदी हुई ज़मीन’ और नुक्ता लग जाने से ‘ख़ुदा’ का अर्थ ‘भगवान’ हो जाता है। कुछ नुक्ता वाले शब्द- कमज़ोर, तूफ़ान, ज़रूर, इस्तीफ़ा, ज़ुल्म, फ़तवा, मज़दूर, ताज़ा, फ़कीर, फ़र्ज़, ज़ेवर, ज़ोर, फ़्रेंच, जि़ंदगी, इज़्ज़त, फ़रमान, रिलीज़, ब्लेज़र, ज़मानत, रफ़ू आदि। क, ख, ग में नुक्ता का प्रयोग हिंदी भाषा में अनिवार्य नहीं है परन्तु 'ज़' और 'फ़' में नुक्ता लगाना आवश्यक है। स्पर्श I में प्रयुक्त नुक्ता वाले शब्द- साफ़, दर्ज़ा, ज़रा, बाज़ार, तरफ़, ज़माना, ख़रबूज़े, ज़िन्दा, बरफ़, तेज़, बर्फ़, काफ़ी, सब्ज़ियों, मेहमाननवाज़ी, ज़िक्र, शराफ़त, गुज़र, उफ़, अफ़सर, दफ़्तर, ज़ोर, प्रोफ़ेसर, गुज़रने, परहेज़, चीज़ें, पुर्ज़े, फ़ायदा, मज़हबी, ऐतराज़, नमाज़, आज़ाद, रोज़े, गिरफ़्तार, रोज़, फौजी, ज़ुल्मों, हफ़्ते, ज़रूरत, सफ़ेद, ताज़े, हज़ारों [8/21, 2:23 PM] Srinivas Bantwal Hindi: हिन्दी भाषा के शब्दों में आमतौर पर नुक्ता बहुत कम लगता है लगभग ना के बराबर। दरसल हिन्दी भाषा में नुक्ता लगाने का उपयोग फ़ारसी-उर्दू के शब्दों के उच्चारण को सही रखने के लिए किया गया था क्योंकि इन भाषाओँ से लिए गए शब्दों को हिन्दी में उच्चारित सही से नहीं किया जा सकता था। और आज की प्रचलित हिन्दी में जो फ़ारसी-उर्दू के शब्द हैं उनके हिन्दी शब्द पहले से ही उपस्थित हैं। जैसे आपने स्वयं ही लिखा है ग़म के लिए दुःख, खुदा के लिए भगवान, और ज़मीन के लिए भूमि, ज़ेवर के लिए गहने या आभूषण इत्यादि। हिन्दी का केवल एक शब्द इस समय मेरे ध्यान में आ रहा है जिसपर नुक्ता लगता है और वह है सफ़ल। दरसल आज प्रचलित हिन्दी खिचड़ी हिन्दी है जिसमें फ़ारसी-उर्दू के अतिरिक्त अन्य बहुत सी भाषाओँ के शब्द घुलमिल गए हैं और इसके लिए कोई मानकीकरण भी नहीं है। इसलिए नुक्ता के लिए कोई नियम या सिद्धाँत नहीं बताया जा सकता। आप बस इतना कर सकते हैं कि जिस शब्द के बारे में आपको नुक्ता लगाने को लेकर भ्रम हो आप किसी से पूछ सकते हैं लेकिन उसपर भी गारण्टी कम ही है कि किसी को पता होगा क्योंकि इन बारीकियों पर कम ही लोग ध्यान देते हैं। या फिर आप विशुद्ध हिन्दी के शब्दों का उपयोग कर सकते हैं जिनमें नुक्ता लगभग ना के बराबर लगता है। वैसे विशुद्ध हिन्दी बोलने में भले ही थोड़ा अजीबोगरीब लगे लेकिन लिखने को आप लिख सकते हैं। भाषण, व्याख्यान, प्रवचन इत्यादि में विशुद्ध हिन्दी आमतौर पर बोलने के लिए भी प्रयुक्त हो जाती है। [8/21, 2:27 PM] Srinivas Bantwal Hindi: नुक़्ता नुक़्ता देवनागरी, गुरमुखी और अन्य ब्राह्मी परिवार की लिपियों में किसी व्यंजन अक्षर के नीचे लगाए जाने वाले बिंदु को कहते हैं। इस से उस अक्षर का उच्चारण परिवर्तित होकर किसी अन्य व्यंजन का हो जाता है। मसलन 'ज' के नीचे नुक्ता लगाने से 'ज़' बन जाता है और 'ड' के नीचे नुक्ता लगाने से 'ड़' बन जाता है। नुक़्ते ऐसे व्यंजनों को बनाने के लिए प्रयोग होते हैं जो पहले से मूल लिपि में न हों, जैसे कि 'ढ़' मूल देवनागरी वर्णमाला में नहीं था और न ही यह संस्कृत में पाया जाता है। अरबी-फ़ारसी लिपि में भी अक्षरों में नुक़्तों का प्रयोग होता है, उदाहरणार्थ 'ر' का उच्चारण 'र' है जबकि इसी अक्षर में नुक़्ता लगाकर 'ز' लिखने से इसका उच्चारण 'ज़' हो जाता है। मूल रूप से 'नुक़्ता' अरबी भाषा का शब्द है और इसका मतलब 'बिंदु' होता है। साधारण हिन्दी-उर्दू में इसका अर्थ 'बिंदु' ही होता है। नुक़्ता वाले अक्षर हिन्दी में प्रयोग होने वाले नुक़्तेदार अक्षर और उनके बिना नुक्ते वाले रूप नीचे की तालिका दिए गए हैं। उनके हन्टेरियन लिप्यन्तरण और अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला चिह्न भी दिए गए हैं। जहाँ उपलब्ध है उनके लिए एक बजाई जा सकने वाले ध्वनि भी दी गई है। हिन्दी में नुक्ते के प्रयोग के विषय में मानक नुक्ता लम्बे समय से हिंदी विद्वानों के बीच विमर्श का विषय रहा है। किशोरीदास वाजपेयी (हिंदी शब्दानुशासन, नागरी प्रचारिणी सभा) जैसे व्याकरण के विद्वान हिन्दी लेखन में नुक्ता लगाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि ये सब शब्द अब हिंदी के अपने हो गए हैं और हिंदी भाषी इन शब्दों का उच्चारण ऐसे ही करते हैं जैसे उनमें नुक्ता नहीं लगा हो। बहुत कम लोगों को उर्दू के नुक्ते वाले सही उच्चारण का ज्ञान है। केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा जारी मानक हिन्दी वर्तनी के अनुसार उर्दू से आए अरबी-फ़ारसी मूलक वे शब्द जो हिंदी के अंग बन चुके हैं और जिनकी विदेशी ध्वनियों का हिंदी ध्वनियों में रूपांतर हो चुका है, हिंदी रूप में ही स्वीकार किए जा सकते हैं। जैसे :– कलम, किला, दाग आदि (क़लम, क़िला, दाग़ नहीं)। पर जहाँ उनका शुद्ध विदेशी रूप में प्रयोग अभीष्ट हो अथवा उच्चारणगत भेद बताना आवश्यक हो (जैसे उर्दू कविता को मूल रूप में उद्दृत करते समय) , वहाँ उनके हिंदी में प्रचलित रूपों में यथास्थान नुक्ते लगाए जाएँ। जैसे :– खाना : ख़ाना, राज : राज़, फन : हाइफ़न आदि। [8/21, 2:30 PM] Srinivas Bantwal Hindi: http://bharatdiscovery.org/india/नुक़्ता [8/21, 2:31 PM] Srinivas Bantwal Hindi: 👆� Nukthaa ke baare me Aur bhi Adhik jaanakaari chaahiye tho Uparyukt Link par click keejiye.👍 -- 1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/forum/hindistf Hindi KOER web portal is available on http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:Hindi 2. For Ubuntu 14.04 installation, visit http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Kalpavriksha (It has Hindi interface also) 3. For doubts on Ubuntu and other public software, visit http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions 4. If a teacher wants to join STF, visit http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member 5. Are you using pirated software? Use Sarvajanika Tantramsha, see http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Why_public_software सार्वजनिक संस्थानों के लिए सार्वजनिक सॉफ्टवेयर --- You received this message because you are subscribed to the Google Groups "HindiSTF" group. To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email to [email protected]. 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