बहुत अच्छा है

On Tue, Mar 17, 2020, 3:41 PM BABU NAIK <[email protected]> wrote:

> वर्ण विचार (Phonology)
>
>      वर्ण : उस छोटी से छोटी ध्वनि को वर्ण अथवा अक्षर कहा जाता है, जिसके
> टुकड़े न किये जा सकें; जैसे - अ, इ, प, द, ल, ऊ इत्यादि |  भाषा के निर्माण का
> मूल यही अक्षर हैं; क्योंकि अक्षरों से शब्द और शब्दों से वाक्य तथा वाक्यों
> से भाषा बनती है | इसको आप निम्न उदाहरण से समझ सकते हैं -
>
>      राधिका नाचती है | यह एक वाक्य है जो कि भाषा का एक अंग है | इस वाक्य
> में तीन शब्द हैं - 'राधिका', 'नाचती' और 'है' | ये तीनों शब्द अनेक अक्षरों
> से मिलकर बने हैं | इनमें कौन कौन से अक्षर हैं, यहाँ बताया जा रहा है -
> राधिका =  र् + आ + ध् + इ + क् + आ
> नाचती = न् + आ + च + त् + ई
> है = ह् + ऐ
>
>      वर्णों के प्रकार : वर्ण दो प्रकार के होते हैं - स्वर तथा व्यंजन |
>
> वर्णमाला
> स्वर :
>        अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ,
> व्यञ्जन :
>       • स्पर्श  व्यञ्जन  -
>        क, ख, ग, घ, ङ
>      च, छ, ज, झ, ज्ञ
>      ट, ठ, ड, ढ, ण,
>      त, थ, द, ध, न
>      प, फ, ब, भ, म
>      • अन्तःस्थ -
>      य, र, ल, व
>      • ऊष्म -
>      श, ष, स, ह
>
>      उपर्युक्त वर्णों के अतिरिक्त दो व्यञ्जन और भी हैं, जिनको वर्णमाला में
> स्थान नहीं दिया गया है, ये वर्ण हैं - ड़, ढ़ | वर्णमाला में इनको इसलिए
> सम्मिलित नहीं किया गया; क्योंकि ये ड और ढ वर्णों की ही ध्वनि में थोड़ा
> परिवर्तन करके बनाये गये हैं | अं और अ: को भी वर्णमाला में स्थान नहीं दिया
> गया है; क्योंकि ये भी अन्य वर्णों के परिवर्तित रूप ही हैं |
> स्वरों के भेद :
>      स्वरों के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं -
>      (क) ह्रस्व अथवा मूल स्वर
>      (ख) दीर्घ अथवा सन्धि स्वर
>      (ग) प्लुत स्वर
>
>      (क) ह्रस्व अथवा मूल स्वर : जिन स्वरों को बोलने में बहुत थोड़ा समय लगता
> है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं | ये स्वर सदैव ही अपने मूल रूप में रहते
> हैं, अर्थात् इनमें कभी कोई स्वर अथवा व्यञ्जन नहीं मिलता, अपितु ये दूसरे
> स्वर अथवा व्यञ्जनों में मिल जाते हैं; अतः इन्हें मूल स्वर भी कहा जाता है |
> ये मूल स्वर चार हैं - अ, इ, उ, ऋ |
>
>      (ख) दीर्घ अथवा सन्धि स्वर : जिन स्वरों के ह्रस्व स्वरों से दोगुना समय
> लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं | ये सभी स्वर क्योंकि ह्रस्व स्वरों के
> योग द्वारा बनते हैं; अतः इन्हें सन्धि स्वर भी कहा जाता है | इन स्वरों की
> संख्या सात है - आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ |
>
>      (ग) प्लुत स्वर : जिन स्वरों को बोलने में ह्रस्व स्वर से तीन गुना समय
> लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं | प्लुत स्वर के आगे ३ लिखा होता है |
> हिन्दी में इस स्वर का प्रयोग कहीं नहीं होता |
>
> व्यञ्जनों के भेद :
>      व्यञ्जनों को उच्चारण की दृष्टि से तीन भागों में विभक्त किया जाता है -
>      (क) स्पर्श व्यञ्जन (ख) अन्तःस्थ व्यञ्जन (ग) ऊष्म व्यञ्जन
>
>      (क) स्पर्श व्यञ्जन : जिन व्यञ्जनों का उच्चारण करते समय जीभ मुख के
> विभिन्न स्थानों का पूर्णरूपेण स्पर्श करती है, उन्हें स्पर्श व्यञ्जन कहते
> हैं | 'क' से लेकर 'म' तक के सभी २५ व्यञ्जन स्पर्श व्यञ्जन हैं |
>
>      (ख) अन्तःस्थ व्यञ्जन : जिन व्यञ्जनों का उच्चारण करते समय जीभ मुख के
> विभिन्न स्थानों को छूती तो अवश्य है, किन्तु पूर्णरूपेण स्पर्श नहीं करती है,
> उन्हें अन्तःस्थ व्यंजन कहते हैं | य, र, ल, व ये चार अन्तःस्थ व्यञ्जन हैं |
>
>      (ग) ऊष्म व्यञ्जन : जिन व्यञ्जनों का उच्चारण करते समय मुख से निकलने
> वाली वायु अत्यधिक घर्षण के कारण ऊष्म (गर्म) हो जाती है, उन्हें ऊष्म व्यञ्जन
> कहते हैं | श, ष, स, ह ये चार ऊष्म व्यञ्जन हैं |
>
>      ऊपर के चित्र में तीनों प्रकार के व्यञ्जनों को स्पष्ट रूप से समझाया
> गया है | इनके क्रम और विभाजन को नीचे दी गयी वर्णमाला में भी आप देख सकते हैं
> |
>
> वर्णों का उच्चारण-स्थान :
>      वर्णमाला के समस्त वर्णों का उच्चारण मुख के जिन स्थानों की सहायता से
> किया जाता है उन स्थानों को उन वर्णों का उच्चारण स्थान कहा जाता है | सभी
> वर्णों के उच्चारण में मुख के कुल नौ अंगों का सहयोग लेना पड़ता है | किस वर्ण
> के उच्चारण में कौन सा अंग सहयोग करता है, इसी आधार पर उनका नामकरण भी कर दिया
> गया है |
>
>  वर्ण
>  उच्चारण-स्थान
>  नाम
>  अ, आ, क, ख, ग, घ, अ:, ह
> कण्ठ
> कण्ठ्य
>  इ, ई, च, छ, ज, झ, य, श
> तालु
> तालव्य
>  ऋ, ट, ठ, ड, ढ, र, ष
> मूर्धा
> मूर्धन्य
>  त, थ, द, ध, ल, स
> दन्त
> दन्त्य
>  उ, ऊ, प, फ, ब, भ
> ओष्ठ
> ओष्ठ्य
>  ङ, ञ, ण, न, म, अं
> नासिक
> नासिक्य
>  ए, ऐ
> कंठ-तालु
> कण्ठतालव्य
>  ओ, औ
> कण्ठोष्ठ
> कण्ठोष्ठ्य
>  व
> दन्तोष्ठ
> दन्तोष्ठ्य
>
>      संयुक्त व्यञ्जन : जब दो व्यञ्जन आपस में मिलते हैं तो उनकी आकृति में
> परिवर्तन हो जाता है | व्यञ्जनों के उसी परिवर्तित रूप को हम संयुक्त व्यञ्जन
> कहते हैं | कुछ मुख्य संयुक्त व्यञ्जनों को हम तालिका के रूप में दे रहे हैं |
>
> क् + ष = क्ष
> ज् + ञ = ज्ञ
> त् + र = त्र
> श् + र = श्र
> द् + य = द्य
> द् + व = द्व
> क् + त = क्त
> द् + ध = द्ध
>
>      सभी संयुक्त व्यञ्जनों में 'र' के संयोग (मेल) से बनने वाले संयुक्त
> अक्षरों का रूप परिवर्तन होता है, इसको आप नीचे उदाहरण से भली प्रकार से समझ
> सकते हैं |
>
> र् + म = र्म
> प् + र = प्र
> ह् + र = ह्र
> ड् + र = ड्र
> चर्म
> प्रकाश
> ह्रास
> ड्रम
> म् + र = म्र
> द् + र = द्र
> ट् + र = ट्र
> स् + र = स्र
> नम्र
> द्रव्य
> ट्रक
> मिस्र
>
> --
> 1. Webpage for this HindiSTF is :
> https://groups.google.com/d/forum/hindistf
> 2. For doubts on Ubuntu and other public software, visit
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions
> 3. If a teacher wants to join STF, visit
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member
>
> -----------
> 1.ವಿಷಯ ಶಿಕ್ಷಕರ ವೇದಿಕೆಗೆ ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಸೇರಿಸಲು ಈ ಅರ್ಜಿಯನ್ನು ತುಂಬಿರಿ.
> -
> https://docs.google.com/forms/d/1Iv5fotalJsERorsuN5v5yHGuKrmpFXStxBwQSYXNbzI/viewform
> 2. ಇಮೇಲ್ ಕಳುಹಿಸುವಾಗ ಗಮನಿಸಬೇಕಾದ ಕೆಲವು ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ನೋಡಿ.
> -
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/index.php/ವಿಷಯಶಿಕ್ಷಕರವೇದಿಕೆ_ಸದಸ್ಯರ_ಇಮೇಲ್_ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ
> 3. ಐ.ಸಿ.ಟಿ ಸಾಕ್ಷರತೆ ಬಗೆಗೆ ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ಈ ಪುಟಕ್ಕೆ ಭೇಟಿ
> ನೀಡಿ -
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Portal:ICT_Literacy
> 4.ನೀವು ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶ ಬಳಸುತ್ತಿದ್ದೀರಾ ? ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶದ ಬಗ್ಗೆ
> ತಿಳಿಯಲು -
> http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Public_Software
> -----------
> ---
> You received this message because you are subscribed to the Google Groups
> "HindiSTF" group.
> To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an
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> To view this discussion on the web, visit
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> .
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1. Webpage for this HindiSTF is : https://groups.google.com/d/forum/hindistf
2. For doubts on Ubuntu and other public software, visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Frequently_Asked_Questions
3. If a teacher wants to join STF, visit 
http://karnatakaeducation.org.in/KOER/en/index.php/Become_a_STF_groups_member
 
-----------
1.ವಿಷಯ ಶಿಕ್ಷಕರ ವೇದಿಕೆಗೆ  ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಸೇರಿಸಲು ಈ  ಅರ್ಜಿಯನ್ನು ತುಂಬಿರಿ.
 - 
https://docs.google.com/forms/d/1Iv5fotalJsERorsuN5v5yHGuKrmpFXStxBwQSYXNbzI/viewform
2. ಇಮೇಲ್ ಕಳುಹಿಸುವಾಗ ಗಮನಿಸಬೇಕಾದ ಕೆಲವು ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ನೋಡಿ.
-http://karnatakaeducation.org.in/KOER/index.php/ವಿಷಯಶಿಕ್ಷಕರವೇದಿಕೆ_ಸದಸ್ಯರ_ಇಮೇಲ್_ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ
3. ಐ.ಸಿ.ಟಿ ಸಾಕ್ಷರತೆ ಬಗೆಗೆ ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ಈ ಪುಟಕ್ಕೆ ಭೇಟಿ ನೀಡಿ -
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4.ನೀವು ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶ ಬಳಸುತ್ತಿದ್ದೀರಾ ? ಸಾರ್ವಜನಿಕ ತಂತ್ರಾಂಶದ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿಯಲು 
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