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"अक्सर हम लोग ये रोना रोते हैं की हमारे यहाँ ये कमी है, वो कमी है. ऐसे में
हम ये भूल जाते हैं कि हमारे भीतर भी बहुत कुछ सकारात्मक और श्रेष्ठ है. हमें
उस सकारात्मक और श्रेष्ठ भाव को याद रखना चाहिए. हम शोध के क्षेत्र में
सर्वश्रेष्ठ कर रहे हैं. हम शोध और खुशहाली में अमेरिका से आगे हैं. और यह बड़ी
बात है."
उपयुक्त विचार भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रमुख वैज्ञानिक डा0 ए0 पी0 जे0
अब्दुल कलाम ने युवाओं और बच्चों से बातचीत करते हुए व्यक्त किये. वे कल लखनऊ
में हिन्दुस्तान टाइम्स के कार्यालय में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे.
बच्चों और युवाओं को अपनी प्राथमिकता बताने पर उन्होंने कहा कि ये ही देश का
भविष्य हैं. उन्होंने सफलता का मंत्र देते हुए कहा- जीवन में एक सूत्र याद रखो!
मैं कर सकता हूँ, हम कर सकते हैं, भारत यह करेगा. उन्होंने कहा- सीखने कि
प्रवृत्ति रचनात्मकता है. रचनात्मकता विचार देती है. विचार ज्ञान देते हैं.
ज्ञान आपको महान बनाता है.
डा0 कलाम ने अपने जीवन के रोल माडल के बारे में बताते हुए कहा- मेरे प्राइमरी
के टीचर शिवा सुब्रामनियम अय्यर मेरे रोल माडल हैं. जब मैं १० साल का था, तो
उन्होंने मुझे बताया था कि चिडिया कैसे उडती है. उनके बताने का तरीका इतना
प्रभावशाली था कि मेरे भीतर उड़ान की ललक जाग उठी. उसी प्रेरणा के कारण मन
ऐरोनाटिकल इंजीनीयर, मिसाइल इंजीनीयर और राकेट वैज्ञानिक बन सका.
उन्होंने कहा जीवन में नकारात्मक चीजों को कंडेम करना चाहिए और सकारात्मक चीजों
को बढ़ना चाहिए. क्योंकि सकारात्मकता हमारे भीतर की शक्ति को जागृत करती है,
हमारे पथ को आलोकित करती है.