On Friday, October 9, 2015 at 10:24:10 PM UTC+5:30, AYUSH | adivasi yuva 
shakti wrote:
>
> अब गैर आदिवासियों को भी आदिवासी रिजर्वेशन मिलने वाला हैं , करीब १००० 
> जातियाँ ST रिजर्वेशन में शामिल होने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के पास 
> एप्लीकेशन दिए हैं इसलिए मोदी सरकार ने ये बदलाव करने का फैसला किया हैं। कुछ 
> ही महीनो में ये ऑफिसियल हो जायेगा। आदिवासी संघटनो को इसका विरोध करना चाहिए 
> क्योंकि इस नियम बदलाव के कारण करोड़ों की जनसँख्या आदिवासी रिजर्वेशन में 
> शामिल हो जाएँगी।
>
>
> On Thursday, September 17, 2015 at 11:36:09 AM UTC+5:30, bhalla wrote:
>>
>> आपण सर्वानी मिळून याला प्रोटेस्ट करायला पाहिजे, रस्त्यावर येऊन , आपल्या 
>> नेत्यांद्वारे, आणि कायद्याचा आधार घेऊन कोर्टा मध्ये ............ आपण सर्वत 
>> कमजोर मनूनच  सरकार आपल्याला सर्वत प्रथम संपवायला बघत आहे !!
>>
>> 2015-09-14 11:06 GMT+05:30 Deepak Gawali <[email protected]>:
>>
>>> निधि शर्मा, नई दिल्ली
>>> मोदी सरकार अनुसूचित जनजाति (शेड्यूल्ड
>>> ट्राइब्स) के दायरे में समुदायों को रखने का
>>> मानक बदलने जा रही है। इसके साथ ही उसने इस
>>> प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्णय भी किया
>>> है। एसटी कैटिगरी में समुदायों को शामिल
>>> करने के राज्यों के प्रस्तावों कई बार कुछ साल
>>> बाद विचार किया जाता था। हालांकि अब
>>> इन्हें छह महीने में निपटा दिया जाएगा और
>>> सचिवों की एक समिति पूरी प्रक्रिया पर
>>> नजर रखेगी। इस प्रक्रिया को दुरुस्त करने के
>>> निर्णय पर इसी महीने कैबिनेट मंजूरी दे सकती
>>> है।
>>> अब तक पांच मानक: एसटी में समुदायों को
>>> शामिल करने के लिए अब तक पांच मानकों
>>> यानी आदिम विशेषताओं, विशेष संस्कृति,
>>> दूसरों के संपर्क में आने से हिचक, भौगोलिक
>>> अलगाव और पिछड़ापन को आधार बनाया
>>> जाता था। सरकार ने मानकों में सामाजिक-
>>> आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ापन और स्वायत्त
>>> धार्मिक परंपराओं को भी शामिल करने का
>>> निर्णय किया है।
>>> सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि 'आदिम
>>> विशेषता' के मानक में भी बदलाव किया
>>> जाएगा ताकि यह अपमानजनक न लगे।
>>> भौगोलिक अलगाव के मानक में भी संशोधन कर
>>> इसमें दूसरे आदिवासी समुदायों, खासतौर से
>>> एसटी समुदाय के साथ संपर्क को शामिल
>>> किया जाएगा।
>>> छह महीने में खत्म होगी प्रक्रिया: नए नियमों
>>> के तहत राज्य सरकार को अगर किसी समुदाय
>>> को एसटी कैटिगरी में शामिल कराना हो तो
>>> वह इसका प्रस्ताव आदिवासी मामलों के
>>> मंत्रालय में भेजेगी। मंत्रालय इस पर रजिस्ट्रार
>>> जनरल ऑफ इंडिया, एंथ्रोपोलॉजिकल
>>> सोसायटी ऑफ इंडिया और नेशनल कमीशन
>>> ऑफ शेड्यूल्ड ट्राइब्स की राय लेगा। इनमें से
>>> किसी भी अथॉरिटी के पास राज्य सरकार
>>> की सलाह को खारिज करने का अधिकार नहीं
>>> होगा। इनकी राय को सचिवों की समिति के
>>> सामने रखा जाएगा, जिसकी अध्यक्षता
>>> आदिवासी मामलों के मंत्रालय के सचिव करेंगे।
>>> अगर यह समिति राज्य सरकार की सिफारिश
>>> मान लेती है तो फिर कैबिनेट नोट बनाया
>>> जाएगा। यह प्रक्रिया छह महीने में पूरी करनी
>>> होगी। कुछ राज्यों के प्रस्ताव वर्षों तक अटक
>>> जाया करते थे। इसमें प्रस्ताव आदिवासी
>>> मामलों के मंत्रालय को भेजा जाता है, जो
>>> रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और नेशनल
>>> कमीशन फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स की राय लेता है।
>>> इन दोनों के पास सिफारिश को खारिज करने
>>> का अधिकार है।
>>> सूत्रों ने बताया कि सरकार इस प्रस्ताव पर
>>> तेजी से कदम बढ़ा रही है क्योंकि इस निर्णय
>>> का सीधा असर असम में 26 टी ट्राइब्स और
>>> पांच समुदायों पर पड़ेगा। असम में अगले साल
>>> विधानसभा चुनाव होने हैं। इन समुदायों को
>>> एसटी कैटिगरी में शामिल करने का प्रस्ताव
>>> असम ने 2013 में भेजा था।
>>> कदम पर सवाल भी: हालांकि दलित
>>> ऐक्टिविस्ट्स इस कदम को संदेह की नजर से देख
>>> रहे हैं। नैशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस के जनरल
>>> सेक्रेटरी रमेश नाथन ने कहा, 'यह बहुत बड़ा कदम
>>> है। सरकार को मानकों में कोई भी बदलाव करने
>>> से पहले राज्यों की राय लेनी चाहिए। फिर
>>> सचिवों की समिति को इतना ज्यादा
>>> अधिकार देना भी ठीक नहीं होगा। कुछ
>>> अधिकार रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को
>>> देने के पीछे एक वजह थी। वह किसी भी समुदाय
>>> के दावे की वैधता जांचने के लिए वैज्ञानिक
>>> आंकड़ों का उपयोग करते थे।'
>>> देवनागरी लिपि में ही अधिसूचना: प्रक्रिया
>>> में एक अहम बदलाव यह होगा कि किसी
>>> आदिवासी समुदाय को एसटी कैटिगरी में
>>> शामिल करने की अधिसूचना देवनागरी में ही
>>> जारी की जाएगी। अभी यह अधिसूचना
>>> अंग्रेजी में जारी होती है और इससे आरक्षण देने
>>> में व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं। एक सूत्र ने
>>> ईटी को बताया, 'रोमन स्क्रिप्ट में लिखे नाम
>>> के उच्चारण के कई तरीके होते हैं। लिहाजा अब
>>> वर्गीकरण केवल देवनागरी लिपि में जारी करने
>>> का निर्णय किया गया है। राज्यों से भी
>>> सिफारिशें केवल देवनागरी लिपि में भेजने को
>>> कहा जाएगा।' मानकों में बदलाव की
>>> प्रक्रिया यूपीए सरकार ने 2014 फरवरी में शुरू
>>> की थी।
>>>
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