This issue is not that simple & straightforward as it seems , it may 
certainly help adiwasis of Assam but this change in Modalities of ST 
reservation will cause so many serious problems for real Adiwasis of 
different states like MP,CG,Jharkhand etc. in coming future .
So many non-tribal General/OBC castes who are in no way adiwasis will now 
get ST reservation very easily due to the simplification & dilution of 
Modalities of ST reservation.


On Wednesday, October 14, 2015 at 11:05:26 PM UTC+5:30, AYUSH | adivasi 
yuva shakti wrote:
>
>
>
> On Friday, October 9, 2015 at 10:24:10 PM UTC+5:30, AYUSH | adivasi yuva 
> shakti wrote:
>>
>> अब गैर आदिवासियों को भी आदिवासी रिजर्वेशन मिलने वाला हैं , करीब १००० 
>> जातियाँ ST रिजर्वेशन में शामिल होने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के पास 
>> एप्लीकेशन दिए हैं इसलिए मोदी सरकार ने ये बदलाव करने का फैसला किया हैं। कुछ 
>> ही महीनो में ये ऑफिसियल हो जायेगा। आदिवासी संघटनो को इसका विरोध करना चाहिए 
>> क्योंकि इस नियम बदलाव के कारण करोड़ों की जनसँख्या आदिवासी रिजर्वेशन में 
>> शामिल हो जाएँगी।
>>
>>
>> On Thursday, September 17, 2015 at 11:36:09 AM UTC+5:30, bhalla wrote:
>>>
>>> आपण सर्वानी मिळून याला प्रोटेस्ट करायला पाहिजे, रस्त्यावर येऊन , आपल्या 
>>> नेत्यांद्वारे, आणि कायद्याचा आधार घेऊन कोर्टा मध्ये ............ आपण सर्वत 
>>> कमजोर मनूनच  सरकार आपल्याला सर्वत प्रथम संपवायला बघत आहे !!
>>>
>>> 2015-09-14 11:06 GMT+05:30 Deepak Gawali <[email protected]>:
>>>
>>>> निधि शर्मा, नई दिल्ली
>>>> मोदी सरकार अनुसूचित जनजाति (शेड्यूल्ड
>>>> ट्राइब्स) के दायरे में समुदायों को रखने का
>>>> मानक बदलने जा रही है। इसके साथ ही उसने इस
>>>> प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्णय भी किया
>>>> है। एसटी कैटिगरी में समुदायों को शामिल
>>>> करने के राज्यों के प्रस्तावों कई बार कुछ साल
>>>> बाद विचार किया जाता था। हालांकि अब
>>>> इन्हें छह महीने में निपटा दिया जाएगा और
>>>> सचिवों की एक समिति पूरी प्रक्रिया पर
>>>> नजर रखेगी। इस प्रक्रिया को दुरुस्त करने के
>>>> निर्णय पर इसी महीने कैबिनेट मंजूरी दे सकती
>>>> है।
>>>> अब तक पांच मानक: एसटी में समुदायों को
>>>> शामिल करने के लिए अब तक पांच मानकों
>>>> यानी आदिम विशेषताओं, विशेष संस्कृति,
>>>> दूसरों के संपर्क में आने से हिचक, भौगोलिक
>>>> अलगाव और पिछड़ापन को आधार बनाया
>>>> जाता था। सरकार ने मानकों में सामाजिक-
>>>> आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ापन और स्वायत्त
>>>> धार्मिक परंपराओं को भी शामिल करने का
>>>> निर्णय किया है।
>>>> सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि 'आदिम
>>>> विशेषता' के मानक में भी बदलाव किया
>>>> जाएगा ताकि यह अपमानजनक न लगे।
>>>> भौगोलिक अलगाव के मानक में भी संशोधन कर
>>>> इसमें दूसरे आदिवासी समुदायों, खासतौर से
>>>> एसटी समुदाय के साथ संपर्क को शामिल
>>>> किया जाएगा।
>>>> छह महीने में खत्म होगी प्रक्रिया: नए नियमों
>>>> के तहत राज्य सरकार को अगर किसी समुदाय
>>>> को एसटी कैटिगरी में शामिल कराना हो तो
>>>> वह इसका प्रस्ताव आदिवासी मामलों के
>>>> मंत्रालय में भेजेगी। मंत्रालय इस पर रजिस्ट्रार
>>>> जनरल ऑफ इंडिया, एंथ्रोपोलॉजिकल
>>>> सोसायटी ऑफ इंडिया और नेशनल कमीशन
>>>> ऑफ शेड्यूल्ड ट्राइब्स की राय लेगा। इनमें से
>>>> किसी भी अथॉरिटी के पास राज्य सरकार
>>>> की सलाह को खारिज करने का अधिकार नहीं
>>>> होगा। इनकी राय को सचिवों की समिति के
>>>> सामने रखा जाएगा, जिसकी अध्यक्षता
>>>> आदिवासी मामलों के मंत्रालय के सचिव करेंगे।
>>>> अगर यह समिति राज्य सरकार की सिफारिश
>>>> मान लेती है तो फिर कैबिनेट नोट बनाया
>>>> जाएगा। यह प्रक्रिया छह महीने में पूरी करनी
>>>> होगी। कुछ राज्यों के प्रस्ताव वर्षों तक अटक
>>>> जाया करते थे। इसमें प्रस्ताव आदिवासी
>>>> मामलों के मंत्रालय को भेजा जाता है, जो
>>>> रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और नेशनल
>>>> कमीशन फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स की राय लेता है।
>>>> इन दोनों के पास सिफारिश को खारिज करने
>>>> का अधिकार है।
>>>> सूत्रों ने बताया कि सरकार इस प्रस्ताव पर
>>>> तेजी से कदम बढ़ा रही है क्योंकि इस निर्णय
>>>> का सीधा असर असम में 26 टी ट्राइब्स और
>>>> पांच समुदायों पर पड़ेगा। असम में अगले साल
>>>> विधानसभा चुनाव होने हैं। इन समुदायों को
>>>> एसटी कैटिगरी में शामिल करने का प्रस्ताव
>>>> असम ने 2013 में भेजा था।
>>>> कदम पर सवाल भी: हालांकि दलित
>>>> ऐक्टिविस्ट्स इस कदम को संदेह की नजर से देख
>>>> रहे हैं। नैशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस के जनरल
>>>> सेक्रेटरी रमेश नाथन ने कहा, 'यह बहुत बड़ा कदम
>>>> है। सरकार को मानकों में कोई भी बदलाव करने
>>>> से पहले राज्यों की राय लेनी चाहिए। फिर
>>>> सचिवों की समिति को इतना ज्यादा
>>>> अधिकार देना भी ठीक नहीं होगा। कुछ
>>>> अधिकार रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को
>>>> देने के पीछे एक वजह थी। वह किसी भी समुदाय
>>>> के दावे की वैधता जांचने के लिए वैज्ञानिक
>>>> आंकड़ों का उपयोग करते थे।'
>>>> देवनागरी लिपि में ही अधिसूचना: प्रक्रिया
>>>> में एक अहम बदलाव यह होगा कि किसी
>>>> आदिवासी समुदाय को एसटी कैटिगरी में
>>>> शामिल करने की अधिसूचना देवनागरी में ही
>>>> जारी की जाएगी। अभी यह अधिसूचना
>>>> अंग्रेजी में जारी होती है और इससे आरक्षण देने
>>>> में व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं। एक सूत्र ने
>>>> ईटी को बताया, 'रोमन स्क्रिप्ट में लिखे नाम
>>>> के उच्चारण के कई तरीके होते हैं। लिहाजा अब
>>>> वर्गीकरण केवल देवनागरी लिपि में जारी करने
>>>> का निर्णय किया गया है। राज्यों से भी
>>>> सिफारिशें केवल देवनागरी लिपि में भेजने को
>>>> कहा जाएगा।' मानकों में बदलाव की
>>>> प्रक्रिया यूपीए सरकार ने 2014 फरवरी में शुरू
>>>> की थी।
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